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कांग्रेस का भविष्य नहीं वर्तमान खराब है

इन दिनों हर कांग्रेसी नेता ये पूछ रहा है कि कांग्रेस में रहकर क्या फायदा . क्या ये पार्टी रहेगी या नहीं और कांग्रेस का कोई भविष्य है या नहीं . असल में ये वर्तमान से उपजा निराशावाद है जो कांग्रेसी नेताओं को आगे नहीं देखने दे रहा है . लगातार दस साल सत्त्ता से बाहर रहने के बाहर कांग्रेसी नेता छटपटाने लगे हैं उनको लगने लगा है कि एकाध बार और तो वो इंतजार कर सकते है लेकिन अगर आगे भी ऐसा ही रहा तो .ऊपर से बीजेपी का अगले 25 साल तक राज करने का नारा उनको और भी घबरा देता है. लेकिन असल जमीनी हकीकत देखें तो कांग्रेस का वर्तमान जरुर खराब है लेकिन भविष्य नहीं.ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपने कैडर को ये समझाना होगा कि अभी भली है पार्टी सबसे निचले पायदान पर है लेकिन आगे भविष्य ठीक होगा.

कांग्रेस के रणनीतिकार ये मानते है कि अभी लीडरशिप खुद भी तय नही कर पा रही है कि इसी बार मोदी को हराया जाये या अगले बार तक मोदी के जाने का इंतजार किया जाये. राहुल गांधी और उनके करीबी मानते है कि अभी लड़ाई लंबी और विचारधारा की है सत्ता में आने की राहुल को कोई जल्दबाजी नही हैं. उनको लगता है कि विचारधारा की लड़ाई पर कायम रहो जल्दी ही जब भी लोग बीजेपी से ऊबेंगे या मोदी की लीडरशिप कमजोर होगी तो मौका कांग्रेस को ही मिलेगा. वैसे उनकी बात में दम भी है क्योंकि खुद बीजेपी के नेता मानते है कि इसी बार बहुत चुनौती है भले ही नारा 400 पार का हो लेकिन जमीन पर अब बीजेपी के अंदर ही और बाहर भी विरोध होने लगा है. बीजेपी के नेता भी ये सवाल उठाने लगे है कि बाहर से आये लोगों को तरजीह दी जा रही है उनको नहीं. अगर इस बार बीजेपी और उसके सहयोगी 400 का आंकड़ा पार नहीं करते या बहुमत से दो कदम भी पीछे रह जाते है तो फिर उनकी विश्वसनीयता मे तेजी से कमी आयेगी. कांग्रेस जीत सकती है कुछ ज्यादा सीटें .

अभी कांग्रेस की रणनीति बनाने में लगे लोगों को लगता है कि किसी भी हालत में इस बार कांग्रेस की सीटें कुछ बढ़ सकती है और ये आंकड़ा 80 तक पहुंच सकता है. कांग्रेस के नेताओं को कर्नाटक,तेलंगाना. आंध्रप्रदेश . महाराष्ट्र और बिहार से कुछ बढ़त की उम्मीद है साथ ही मध्यप्रदेश ,राजस्थान . उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक से तीन सीट का इजाफा हर राज्य में मिलने की उम्मीद है . इसलिए कांग्रेस को लगता है कि अब उसके पास खोने को कुछ नही पाने को ही . हालांकि अब भी कई राज्यों में करीब 30 से 35 विधायक और इतने ही बड़े नेता बीजेपी जाने को तैयार है इसलिए पार्टी को संवाद बढ़ाना होगा और इन नेताओं को समझाना होगा कि बीजेपी में अब वैकेंसी नहीं है और वहां जाकर कुछ मिलने वाला नही है .जो नेता लड़ने तैयार है उनको रोकना चाहिये .
कांग्रेस में जेनरेशन चेंज .

ये ऐसा आखिरी चुनाव है जिसमें कांग्रेस की पुरानी पीढ़ी रहेगी उसके बाद दूसरी और तीसरी यानि नई पीढ़ी के लोग आ जायेंगे . तब कमलनाथ .अशोक गहलोत , भूपेंद्र हुडडा , मुकुल वासनिक और मधूसूदन मिस्त्री जैसे पुराने लोग हट जायेगें और वही बचेंगे जो लड़ पायेंगे . ये सच है कि देश में आज भी लोगों में कांग्रेस का आधार बचा हुआ है. अब भी उसके पास कम से कम तीन सरकारें तो है ही और आगे भी आ सकती है. ऐसे में पार्टी में कैडर का भरोसा बनाये रखना जरुरी है. पार्टी को नेगेटिव बातों से हटकर सारे कैडर को साथ लेकर और हर राज्य में किसी एक के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर काम करना होगा तो आगे जाकर कुछ तस्वीर बदल सकती है.
एक बात जरुर याद रखें परिवर्तन ही संसार का नियम है कोई भी स्थाई नहीं है राजनीति में तो बिल्कुल भी नहीं इसलिए लंबी रणनीती पर काम हो और नयी लीड़रशिप बनायी जाये तो कुछ बदल सकता है.

-संदीप सोनवलकर 

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