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Culture

जन्माष्टमी पर गौ रक्षा, गौ पालन का भी लें संकल्प: नवीन गोयल

जन्माष्टमी पर गौ रक्षा गौ पालन का भी लें संकल्प: नवीन गोयल

-गाय को हमें माता कहना ही काफी नहीं, मानना भी जरूरी
-गंदगी खाती गायों को चारा डालने की परम्परा का करें निर्वहन

गुरुग्राम। जन्माष्टमी पर विभिन्न स्थानों पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करके पर्यावरण संरक्षण विभाग भाजपा हरियाणा के प्रमुख एवं एक भारत श्रेष्ठ भारत कमेटी के प्रदेश सह-संयोजक नवीन गोयल ने इस पर्व की शुभकामनाएं दीं। साथ ही लोगों से आह्वान किया कि जन्माष्टमी पर्व मनाने के साथ हमें गायों को भी पालना चाहिए। उनका संरक्षण करना चाहिए। अगर हम अपने घर में गाय पाल नहीं सकते तो कम से कम सडक़ों, गलियों में विचरने वाली गायों को आसपास से चारा लाकर उन्हें खिला तो सकते हैं। इससे गौ माता गंदगी खाने से बच जाएगी।

नवीन गोयल ने कहा कि जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ा पर्व है और भगवान श्रीकृष्ण गऊओं को भी चराते थे। इसलिए हमें इस पर्व से यह भी प्रेरणा लेनी चाहिए कि हम अपनी सनातन संस्कृति को बेहतर बनाने के लिए गऊओं का भी उतना ही ख्याल रखें। हमें अक्सर किसी गली, सडक़ किनारे गाय कूड़ा-करकट खाती नजर आती हैं। हमें ऐसा देखकर तकलीफ होनी चाहिए और उस तकलीफ का यह असर हो कि हम आगे से उस जगह पर गऊओं के लिए चारा डालकर आएं। क्योंकि भूखी गाय फिर से वहां पर आकर गंदगी में पेट भरने का प्रयास करेगी। अगर गायों को उसी जगह पर चारा मिल जाए तो उनका पेट अच्छे से भर सकता है। प्रदेश सरकार की ओर से भी गायों के संरक्षण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। सडक़ों पर घूमती गायों को गौशालाओं में पहुंचाया गया है। फिर भी कुछ लोग दूध देना बंद करने वाली गायों को सडक़ों पर छोड़ जाते हैं। ऐसे में इन गायों के लिए चारे का संकट हो जाता है। प्लास्टिक की थैलियां और गंदगी खाकर गाय बीमार हो जाती हैं और एक दिन उनकी मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि उम्र के अनुसार मृत्यु स्वाभाविक है, लेकिन चारे के अभाव में या थैलियां खाकर बीमार होने वाली गायों को हम बचा सकते हैं। नवीन गोयल ने कहा कि अपने बच्चों को भी इस तरह की शिक्षा दें। वे जल्दी सुबह उठें तो आसपास से चारा लाकर, या फिर घर के बड़े खुद चारा लाकर बच्चों के हाथ से गायों को खिलाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं, मॉडर्न बनाएं, कोई बुराई नहीं है। इन सबके साथ बच्चों को अपनी संस्कृति के बारे में भी बताएं। अपने पशु-पक्षियों की जानकारी दें। उनकी सेवा करने की सीख दें। यह भी जरूरी है।

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