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लघु भारत बन चुके गुरुग्राम में फिल्म सिटी निर्माण के होंगे प्रयास: नवीन गोयल

लघु भारत बन चुके गुरुग्राम में फिल्म सिटी निर्माण के होंगे प्रयास: नवीन गोयल
-गुरुग्राम में फिल्म सिटी बनने पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
-सरकार को फिल्म सिटी के निर्माण के लिए सरकार को भेजेंगे मांग पत्र
-गुरुग्राम में देश के हर राज्य के लोगों का है वास
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी गुरुग्राम हरियाणा का चेहरा है। यहां पर हर राज्य के लोग रहते हैं। इनमें कारपोरेट जगत में नौकरी करने वालों के साथ कलाकार भी शामिल हैं। इसलिए यहां पर फिल्म सिटी बनाई जानी चाहिए। फिल्म सिटी बनने से गुरुग्राम ही नहीं हरियाणा व आसपास के युवाओं को कला के क्षेत्र में भविष्य बनाने का अवसर मिलेगा। फिल्म सिटी हुनर दिखाने के साथ रोजगार का भी माध्यम बनेगी। यह बात पर्यावरण संरक्षण विभाग भाजपा हरियाणा के प्रमुख एवं एक भारत श्रेष्ठ भारत कमेटी के प्रदेश सह-संयोजक नवीन गोयल ने कही। नवीन गोयल ने मंगलवार की रात को ओल्ड दिल्ली रोड स्थित राज चौहान नाईट में यह बात कही। यहां उन्होंने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
नवीन गोयल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने जिस तरह सेे फिल्म पॉलिसी बनाकर कलाकारों, फिल्म अभिनेताओं को सुविधा मुहैया कराई है, वह काबिले तारीफ है। आने वाले भविष्य में गुरुग्राम में फिल्म सिटी का भी निर्माण हो, इसके भी प्रयास किए जाएंगे। प्रदेश के कलाकारों को वर्तमान प्रदेश सरकार ने बेहतर मान-सम्मान दिया है। हरियाणवी कला को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल, प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ कला को आगे बढ़ाने के लिए हमेेशा तत्पर रहते हैं।
उन्होंने कहा कि कलाकार हर व्यक्ति होता है। कला का कोई पैमाना नहीं होता। चुप रहना भी एक कला है तो बेहतर बोलना भी एक कला है। खड़े रहना भी एक कला है तो एक्टिंग करना भी एक कला है। हमारी संस्कृति में कला को बहुत सम्मान दिया जाता है। यहां प्रतिभाओं को तराशा जाता है। हर क्षेत्र की प्रतिभा यहां पर हमें नजर आती है। नवीन गोयल ने कहा कि उन्हें गुरुग्राम में लगभग हर प्रदेश के लोगों के कार्यक्रमों में शिरकत करने का अवसर मिला है। हर जगह पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बेटियों, बहनों, युवाओं, बच्चों में जो प्रतिभा नजर आती है, वही विशेषता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को शिक्षा के साथ कला से भी जोडऩा चाहिए। बच्चों में झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्हें ऐसा मंच मिलना चाहिए, जहां वे अपने आप को प्रस्तुत कर सकें। घर में भी बच्चों के साथ माता-पिता प्रतिभा निखारने पर काम करें। उन्होंने कहा कि कलाकार भी पैदाइशी नहीं होता। उसे वैसा माहौल मिलता है और वह कला के क्षेत्र में आगे बढ़ जाता है।

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