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आपदा में अवसर दे सकती है आटोमोबाईल इंडस्ट्री

कोरोना काल के बाद सबसे बड़ा संकट रोजगार का आने वाला है . हर कोई ये सवाल पूछ रहा है कि रोजगार कहां से आयेंगे और कितनों की नौकरी जायेगी .इस सवाल का एक जवाब आटोमोबाईल इंडस्ट्री बन सकता है. आप ये सोच रहे होंगे कि ऐसे समय में जबकि पिछले तीन महीने से पूरा देश बंद है और आटोमोबाईल सेक्टर में अब तक की सबसे बडी गिरावट आ रही तब इसमें क्या संभावनायें है.
भारत की आटोमोबाईल इंडस्ट्री दुनिया की चौथी सबसे बडी इंडस्ट्री है जो सौ करोड डालर से ज्यादा सालाना का कारोबार करती है और इसमें तीन करोड से ज्यादा लोग काम करते हैं. कहा जा रहा है कि कोरोना काल ने इसको सबसे ज्यादा नुकसान पहुचांया है पिछले तीन महीने से ज्यादातर कारखाने और डीलर की दुकाने बंद है और ना तो माल आ रहा है ना बिक रहा है . अब जब हम फिर से बाजार खोलने की तरफ बढ रहे है तब ये आटोमोबाईल इंडस्ट्री एक बड़ा विकल्प बन सकती है.
ये बोलने की वजह ये है कि
1. कोरोना के बाद लोग अब सार्वजनिक यातायात के बजाय निजी वाहनों को तरजीह देंगे चाहे वो निकट की दूरी जाना हो या स्कूल कालेज या बाजार ताकि सोशल डिस्टेसिंग बनी रहे .
2. कोरोना काल के बाद ग्रामीण जनसंखया और कामकाज में भारी बढोत्तरी होगी .गांव में सार्वजनिक यातायात कम ही होता है लोग बाईक या किसी निजी बाहन से जायेंगे .
3. कोरोना काल के बाद घरेलू सप्लाई या आनलाईन शापिंग को बढावा मिलेगा ये ज्यादातर माल डिलीवरी ब्याय किसी ना किसी निजी वाहन से देंगे .
4. कोरोना काल के बाद दीवाली तक लोग अपने मूड को बदलने के लिए कुछ ना कुछ खरीदेंगे निजी व्हीकल बाईक या कार उनको खुशी के साथ साथ गर्व भी देगी ..

ये तमाम कारण डिमांड बढायेंगे और जाहिर है जब डिमांड होगी तो सप्लाई के लिए भी जोर रहेगा तब कारखानो में क्षमता बढाने के लिए और रोजगार के अवसर के साथ ही वितरण के लिए डीलरशिप और सुधारने के लिए मैकेनिक की जरुरत भी बढेगी .
इसके साथ ही चीन और अन्य देशों से कई बडी आटोमोबाईल कंपनिया भारत आना चाहती है . उनके आने से भी बाजार में उपलब्धता बढेगी .
इन सबमें सबसे बड़ा चैलेंज है कि मांग कैसे बनायी जाये तो उसके दो ही रास्ते हैं
1. प्रोडक्ट सस्ता बेहतर और आवश्यकता के अनुरुप हो .
2. दूसरा इसको खरीदने की क्षमता हो यानि खरीददार के हाथ में पैसा हो ये बैंक लोन से हो सकता है , कोरोना काल के बाद बैकों पर लोन बांटने का दवाब है . वो सस्ता लोन दे सकते हैं.

सुझाव..
1. कोरोना काल के बाद भारतीय आटोमोबाईल कंपनिया उनके स्वदेशी होने और उनको भारतीय परिवेश के अनुसार बनाने पर जोर दें
2. ब्रांड वैल्यू बढाने के लिए वाहन के साथ साथ कंपनियां कोरोना के प्रति अवेयरनेस क्रिएट करने के लिए पीआर कैपेन बनाये .
3. बाईक्स और कार में कोरोना से बचने के लिए अलग से सैनेटाईजर और मास्क रखने जैसी सुविधाये बनायी जाये .
4. .हेलमेट का प्रचार इस तरह हो कि ये कोरोना से बचा सकता है. इसे लगाये रखें .
5. इंडस्ट्री की समस्या जीएसटी और इश्योरेंस की अडचने है जिसके कारण कीमते करीब 30 फीसदी बढी है इनको सुलझाया जाये तो कम कीमत पर बेहतर वाहन मिल सकता है.
REFRENCE
The Indian automobile industry is the fourth largest in the world with an annual turnover of $100 billion and employs 32 million people. The two-wheeler industry in India is the largest in the world. India is also the largest tractor manufacturer and the eight largest commercial vehicles manufacturer in the world.
The automobile sector currently contributes about 50 per cent of the manufacturing gross domestic product (GDP) in India, 26 per cent of the industry GDP and 7.1 per cent of overall GDP, up from 2.7 per cent in 1992-93. The sector contributes approximately 13 per cent of excise revenue to the government.
The total investment in this sector is around $40 billion in the last decade. The decade of 2001-2010 saw a compounded annual sales growth of 15.67 per cent, which included 10 per cent exports. The yearly growth of exports was 23 per cent from 2000 to 2015 due to constant government support.
The automobile industry includes two-wheeler, four-wheeler, passenger vehicle and commercial vehicles. In 2018-19, 4.06 million cars were manufactured and at present around 32 million cars run on Indian streets. The two-wheeler segment dominates the industry with a share of 80 per cent.
In 2019-20, however, the sector faced troubles in maintaining sales and profitability numbers on quarterly and even yearly basis. In August 2019, there was a 35.9 per cent drop in domestic sales for market leader Maruti Suzuki with 94,728 units being sold due to subdued market confidence, slow economic growth and crisis in the non-banking financial companies (NBFCs).
The March 2020 numbers show the effect of lockdown due to the COVID-19 pandemic. The last month of any financial year is usually the peak period for inventory clearance for the industry. Maruti Suzuki India saw its total domestic passenger vehicle sales fall 47.4 per cent to 76,240 units in March 2020 compared with 145,000 units in March 2019. The export sales were down almost 55 per cent to 4,712 units from 10,463 a year ago. With overall sales down by 16 per cent, the company ended FY20 with a total sales of 1.563 million units, down from 1.862 million in the previous fiscal. Similarly there was a 40 per cent decline in domestic sales of Hyundai Motor India to 26,300 units in March 2020. Similar trend was seen in Mahindra and Mahindra’s domestic passenger vehicle sales, which drastically plunged 88 per cent to 3,384 units in March 2020 from 27,637 units in March 2019.

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