newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu & Kashmir, Trending news | News Mantra
CSRPSU Mantra

उम्मीद की नई धड़कन: एनसीएल के ‘नन्हा सा दिल’ अभियान ने ग्रामीण अंचलों में सुधारे मासूमों के दिल, प्रांजलि की कहानी जगा रही नई आस

NCL का 'नन्हा सा दिल' अभियान: ग्रामीण बच्चों को मिला मुफ्त हृदय उपचार, प्रांजलि की कहानी बनी मिसाल

सिंगरौली। एनसीएल की ‘नन्हा सा दिल’ पहल: के अभिनव प्रयासों के फलस्वरूप  सिंगरौली की कोल् बेल्ट के आस पास के गावो में न केवल जागरूकता  पैदा की है ,  बल्कि नन्हा सा दिल     प्रोग्राम  के ;प्रति ग्रामीणों में अटूट विश्वास पैदा कर दिया है।  इस प्रोग्राम के अंतर्गत  जन्मजात हृदय रोग’  से प्रभवित बच्चो (सीएचडी)  की आरम्भ जांच ,  काउंसलिंग, यात्रा, ठहरने की व्यवस्था, इलाज और बाद की देखभाल—सब कुछ इसी कार्यक्रम के माध्यम से प्रबंधित किया  जाता है।

एक छह साल की बच्ची, जो ठीक से खेल भी नहीं पाती थी। थोड़ी दूर चलने पर ही हांफने लगती थी और जिसका बचपन बार-बार की बीमारियों के साये में सिमट रहा था—आज वह स्कूल जा रही है, सहेलियों के साथ हंस-खेल रही है। यह कहानी मध्य प्रदेश के सुदूर सिंगरौली जिले के सरई गाँव की रहने वाली मासूम प्रांजलि प्रजापति की है। प्रांजलि की यह नई जिंदगी केवल एक बच्ची की रिकवरी नहीं, बल्कि कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी नर्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के उस अटूट संकल्प की बानगी है, जो ‘नन्हा सा दिल’ कार्यक्रम के जरिए सुदूर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में जीवन का उजियारा फैला रहा है।

NCL का 'नन्हा सा दिल' अभियान: ग्रामीण बच्चों को मिला मुफ्त हृदय उपचार, प्रांजलि की कहानी बनी मिसाल

अज्ञानता का अंधेरा और बेबसी के आंसू

प्रांजलि के पिता संतोष प्रजापति पेशे से किसान हैं। महीने में बमुश्किल 5,000 से 6,000 रुपये कमा पाने वाले इस परिवार के लिए जिंदगी हमेशा से एक कड़ा संघर्ष रही है। प्रांजलि जब भी बीमार होती, माता-पिता उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाते। लेकिन अंदरूनी इलाकों में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञों की कमी के कारण कोई यह नहीं बता पा रहा था कि आखिर इस मासूम की जान पर क्या आफत है।

ग्रामीण भारत के अधिकांश हिस्सों की तरह संतोष का परिवार भी ‘जन्मजात हृदय रोग’ (Congenital Heart Disease – CHD) जैसे गंभीर शब्द से पूरी तरह अनजान था। जब बीमारी का ही पता न हो, तो महानगर के किसी बड़े अस्पताल में जाकर लाखों का इलाज कराने की बात सोचना भी इन ग्रामीणों के लिए एक डरावने सपने जैसा था। बेबसी इस कदर हावी थी कि उम्मीदें दम तोड़ चुकी थीं और आँखों के आँसू भी सूख गए थे।

जब गाँव पहुंची उम्मीद की ‘संजीवनी’

कहानी में मोड़ तब आया जब एनसीएल की ‘नन्हा सा दिल’ टीम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के कर्मियों के साथ सरई गाँव में बाल हृदय जांच शिविर लगाने पहुँची। स्क्रीन के दौरान डॉक्टरों को प्रांजलि के दिल में कुछ गड़बड़ी का अंदेशा हुआ। शुरुआती झिझक के बाद, जब कार्यक्रम के समन्वयकों ने संतोष को समझाया, तो वे प्रांजलि को पास के ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) देवसर में आयोजित ‘इको कैंप’ में ले गए।

वहाँ श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट ने जब प्रांजलि का इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) किया, तो कड़वा सच सामने आया—मासूम के दिल में छेद था।

मुफ़्त इलाज, मुफ़्त सफर: ‘नन्हा सा दिल’ ने संभाली जिम्मेदारी

दिल में छेद की बात सुनते ही माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। लेकिन इसी हताशा के बीच एनसीएल के ‘नन्हा सा दिल’ प्रोजेक्ट के समन्वयकों ने उन्हें संभाला। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि:

“पैसों की चिंता बिल्कुल मत कीजिए। आपकी बेटी को पूरी तरह स्वस्थ करके घर लौटाने की जिम्मेदारी अब हमारी है।”

इसके बाद का सफर किसी चमत्कार से कम नहीं था। सिंगरौली के इस इंटीरियर कोयला बेल्ट से लेकर हरियाणा के पलवल स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल तक का पूरा सफर बेहद व्यवस्थित था। काउंसलिंग, आने-जाने का सफर, रहने-खाने की व्यवस्था, सर्जरी और ऑपरेशन के बाद की देखभाल (Follow-up Care)—सब कुछ एनसीएल के सहयोग से पूरी तरह निःशुल्क प्रबंधित किया गया।

कोल् बेल्ट में जागा अटूट विश्वास, बढ़ी जागरूकता

आज प्रांजलि पूरी तरह स्वस्थ है और उसका सामान्य बचपन लौट आया है। लेकिन यह बदलाव सिर्फ प्रांजलि तक सीमित नहीं है। एनसीएल की इस अनूठी पहल ने सिंगरौली के ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ा सामाजिक बदलाव लाया है:

भ्रम और डर का खात्मा: पहले ग्रामीण बच्चे के दिल की बीमारी को लाइलाज मानकर भाग्य के भरोसे छोड़ देते थे, लेकिन अब वे जांच के लिए आगे आ रहे हैं।

अटूट ग्रामीण विश्वास: सुदूर गाँवों के लोगों में अब यह भरोसा बैठ गया है कि अगर बच्चे के दिल में कोई दिक्कत है, तो एनसीएल और साईं संजीवनी उनके साथ खड़े हैं।

द्वार पर विशेषज्ञ सुविधाएं: कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत अब अति-आधुनिक कार्डियक स्क्रीनिंग ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के दरवाजे तक पहुँच रही है।

प्रांजलि जैसी सैकड़ों मुस्कुराती जिंदगियां इस बात का प्रमाण हैं कि कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियां सिर्फ कोयला निकालकर देश को रोशन नहीं कर रही हैं, बल्कि ‘नन्हा सा दिल’ जैसी पहलों से देश के भविष्य को भी एक स्वस्थ और सुरक्षित धड़कन दे रही हैं।

@CoalIndiaHQ (Coal India Limited)

@NCL_Singrauli (Northern Coalfields Limited)

@MinistryOfCoal (Ministry of Coal, Government of India)

#CoalIndia #NCL #NanhaSaDil #CorporateSocialResponsibility #CSRIndia #RuralHealthcare #CancerScreening #Singrauli #PublicSectorExcellence

Related posts

PFC Consulting Ltd Declares Final Dividend for Financial Year 2023-24

Newsmantra

PFC Sets Up Five New Companies for Major Renewable Energy Projects

Newsmantra

IndianOil Shining bright at 94 in ‘Fortune Global 500’ listing of 2023

Newsmantra

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More