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हमसे का भूल हुयी जो ये सजा हमका मिली.

मैं वापस आऊंगा के नारे के साथ पूरे महाराष्ट्र में घूमने वाले मुख्यमंत्री देवेन्द्र फणनवीस अब सत्ता से दूर और अकेले हैं .वो खुद ही सोच रहे है कि महज चार महीने पहले देश में बहुमत से ज्यादा सीटें पाने वाली भाजपा को वो जिता क्यों नही पायी .उनसे क्या भूल हुयी जो जनता ने उनको घर पर बिठा दिया.

उनकी पांच भूलें सबसे अहम है पहला मै और बस मैं देवेन्द्र फणनवीस ने सत्ता हासिल करने के साथ ही पीएम नरेद्र मोदी की राह पर चलना शुरु कर दिया था . वो भूल गये कि मोदी ने गुजरात में पहले मिलकर सरकार चलायी उसके बाद बडे हुये देवेन्द्र पहले ही दिन से सबको निपटाने में लग गये . हालत ये हुयी कि इस बार बीजेपी शिवसेना की सरकार आसानी से बन जाती लेकिन मुंबई से लेकर दिल्ली तक कोई उनके साथ खडे होने तक नही आया. देवेन्द्र ने एकनाथ खडसे. पंकजा मुंडे .विनोद तावडे .चंद्रशेखऱ बावनकुले, प्रकाश मेहता , राज पुरोहित और किरीट सौमैया जैसे तमाम दिगगजों को घर बिठा दिया .पार्टी में भी अध्यक्ष दानवे को किनारे कर दिया था . यहां तक कि अमित शाह को लगने लगा कि देवेन्द्र अब दिल्ली की तरफ देख रहे इसलिए उन्होने पहले तो मजबूत चंद्रकांत पाटिल को अध्यक्ष बनवाया और जब सरकार बनाने की बात आयी तो मदद के लिए नही आये .

सहयोगियों से धोखा : देवेन्द्र फणनवीस के बारे मे कहा जाता है कि वो सबको पांच साल से रेवडी बांट रहे थे दे कुछ नही रहे थे . शिवसेना के साथ भी उन्होने यही किया .अमित शाह ने तो नही लेकिन देवेन्द्र ने ही सत्ता के बंटवारे का फार्मूला मान लिया था . जिससे बाद में मुकर गये .इससे उनके सबसे पुराने मित्र उदधव ठाकरे ही इतने नाराज हो गये कि उनका फोन तक लेना बंद कर दिया.

चुनावी रणनीती नाकाम.देवेन्द्र फणनवीस ने चुनावी रणनीती मे कई गलतियां की. सबसे बडी तो यही कि पार्टी की राय थी कि अलग अलग चुनाव लडा जाये लेकिन अपनी कुर्सी पक्की करने के लिए फणनवीस ने शिवसेना से समझौता किया. साथ ही उनकी चाल थी कि बीजेपी कम से कम 135 सीट पा लें ताकि शिवसेना साथ छोडे भी तो सरकार बन जाये लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ . बीजेपी ने कम से 40 जगहों पर अपने ही बागी उम्मीदवार शिवसेना के खिलाफ उतारे ताकि कम से कम बीस जीत जाये . लेकिन ये भी नहीं हो सका .

जमीनी मुददों पर ध्यान नही दिया. सीएम फणनवीस बडे बडे प्रोजेक्टस मेट्रों .समृदिध महामार्ग पर तो बात करते रहे लेकिन किसानों की समस्या ,जमीन पर विकास . बारिश और बाढ से परेशानी , बेरोजगारी और मंदी जैसे मुद्दों पर कुछ भी ध्यान नही दिया .उनको लगा कि केन्द्र के मुददों पर ही जीत जायेगे . पवार को ईडी नोटिस ने और बात बिगाड दी. पूरे राज्य में मराठे एक जुट हो गये .
अब इन पांच पर भी बीजेपी ध्यान दे तो शायद आगे सुधार हो सके .
 -संदीप सोनवलकर

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