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		<title>नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की</title>
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		<pubDate>Tue, 11 Aug 2020 11:02:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अष्‍टमी तिथि प्रारंभ: 11 अगस्‍त से 9 बजकर 07 मिनट से लगेगी अष्टमी अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 13 अगस्त को सुबह 03 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 22 मिनट तक रहेगा 12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात...</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%ad%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be/">नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>अष्‍टमी तिथि प्रारंभ: 11 अगस्‍त से 9 बजकर 07 मिनट से लगेगी<br />
अष्टमी अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक<br />
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 13 अगस्त को सुबह 03 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 22 मिनट तक रहेगा<br />
12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है।<br />
पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी।</p>
<p>इस मंत्र से कीजिए पूजा</p>
<p>ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।<br />
देहि मे तनयं कृष्णं त्वामहं शरणं गत: ।।</p>
<p>भगवान श्रीकृष्ण की पूजा इन मंत्रों से करने से इंसान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, लोगों को खुशी और सुख प्राप्त होता है, जिनको धन की कमी हैं उन्हें धन, जिन्हें प्रेम की कमी है उन्हें प्यार और जिन्हें संतान का सुख नहीं मिला है उन्हें संतान प्राप्ति होती है।</p>
<p>चार खास संयोग में 12 अगस्त को मनाना श्रेष्ठ 12 अगस्त को चार विशेष संयोग बन रहे हैं। सर्वार्थसिद्धि योग, वृषभ का चंद्रमा, बुधवार का दिन और सूर्य उदय की अष्टमी। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय ये चार संयोग थे। इसके अलावा एक और संयोग नक्षत्र का था। भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार यह नक्षत्र दोनों ही दिन नहीं आ रहा है। लेकिन चार संयोगों का होना इस बात की पुष्टि करता है कि जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाना ही श्रेष्ठ और शास्त्र सम्मत है। हालांकि स्मार्त मत को मानने वाले लोग 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे और वैष्णव मत को मानने वाले 12 अगस्त को मनाएंगे। वैसे उदय तिथि के अनुसार व्रत-त्योहार मनाना शास्त्र सम्मत माना जाता है और उदय तिथि अष्टमी 12 को ही है।</p>
<p>।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।।</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%ad%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be/">नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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		<title>क्यो करते है दूध से अभिषेक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jul 2020 04:12:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>भगवान शिव जी को श्रावण माह में दूध चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है &#8216;रुद्राभिषेक&#8217; और अन्य अवसरों पर भी महादेव जी को दूध चढ़ाया जाता है ने बताया कि शिवजी को दूध चढ़ाने का पौराणिक कारण है:- पौराणिक कारण:- सृष्टि की रचना होने के बाद जब देवताओं और असुरों...</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%95/">क्यो करते है दूध से अभिषेक</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>भगवान शिव जी को श्रावण माह में दूध चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है</p>
<p>&#8216;रुद्राभिषेक&#8217; और अन्य अवसरों पर भी महादेव जी को दूध चढ़ाया जाता है ने बताया कि शिवजी को दूध चढ़ाने का पौराणिक कारण है:-</p>
<p>पौराणिक कारण:- सृष्टि की रचना होने के बाद जब देवताओं और असुरों में निरंतर भयंकर युद्ध होने लगे तब असुरों की विशालकाय सेना और बाहुबल देवताओं पर भारी पड़ने लगा, देवताओं को अत्यधिक होनेवाली हानि से चिंतित देवराज इंद्र समस्त देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास पहुंचे और वृतांत सुनाया, ब्रह्माजी बोले आपलोग जगतपालक श्रीहरि विष्णु के पास जाईए, वहीं आपकी चिंता दूर करेंगे.<br />
सभी देव विष्णुजी के पास पहुंचे और अपना वृतांत पुनः सुनाया, विष्णुजी ने समुद्र मंथन और उससे प्राप्त होने वाले अमृत तत्व का रहस्य समझाया&#8230;. समुद्र मंथन हुआ तो सर्वप्रथम वो &#8220;हलाहल विष&#8221; प्राप्त हुआ, क्या करें इस विष का पृथ्वी पर पड़े तो समस्त पृथ्वी नष्ट होगी, आकाश में फेकें तो अंतरिक्ष नष्ट और जल में फेकने पर जल संसाधन हीं हलाहल बन जाएगा, महादेव शिव जी ने उस हलाहल को पीकर अपने कंठ में स्थिर कर लिया और विष के कारण उनका कंठ नीले रंग का हो गया, इसीलिए महादेव को &#8216;नीलकंठ&#8217; नाम भी मिला विष की उष्णता को नियंत्रित रखने के लिए शीतलता की आवश्यकता होती है और गाय के दूध से शीतल क्या हो सकता है?<br />
जिन्होने विष को कंठ में धारण कर लिया हो उनको विष की उष्णता क्या हानि पहुंचा सकती, असंभव, बिल्कुल नहीं।</p>
<p>लेकिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हम उनके प्रति अपनी निष्ठा और श्रद्धा को बताने के लिए दूध का अभिषेक करते हैं.! शिवजी को दूध की आवश्यकता नहीं, हमे शिव जी की आवश्यकता है और इसीलिए अभिषेक होता है.!</p>
<p>।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।।<br />
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%95/">क्यो करते है दूध से अभिषेक</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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		<title>Travancore royal family got Padmanabh temple again</title>
		<link>https://newsmantra.in/travancore-royal-family-got-padmanabh-temple-again/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2020 05:55:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Culture]]></category>
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		<category><![CDATA[Lord Padmanabha]]></category>
		<category><![CDATA[padmnabh temple]]></category>
		<category><![CDATA[TEMPLE]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Supreme Court upholds the rights of Travancore royal family in the administration of Sree Padmanabhaswamy Temple at Thiruvananthapuram in Kerala. The controversy over the administration and management of the historic temple was pending in the apex court for last nine years in the wake of charges of alleged financial irregularities....</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>Supreme Court upholds the rights of Travancore royal family in the administration of Sree Padmanabhaswamy Temple at Thiruvananthapuram in Kerala.</p>
<p>The controversy over the administration and management of the historic temple was pending in the apex court for last nine years in the wake of charges of alleged financial irregularities.</p>
<p>Meanwhile The state government made it clear that it has no plan to go in for a review or appeal and it will go by the verdict of the apex court even as devotees took to streets in large numbers to celebrate it by distributing sweets. Since lockdown was in place in the state capital they took care to avoid a big gathering outside the temple.</p>
<p>“It is not the victory of the royal family. It is the victory of people and devotees. Finally, the will of the Lord Padmanabha Swamy prevailed. We dedicate this to the presiding deity,” said Aswathi Tirunal Lakshmi Bhai, a member of the ex-royal family. She thanked all devotees and others who stood with them in trying times.</p>
<p>The sprawling temple, an architectural splendour in granite, was rebuilt in its present form in the 18th century by the Travancore Royal House which had ruled southern Kerala and some adjoining parts of Tamil Nadu before integration of the princely state with the Indian Union in 1947.</p>
<p>Even after India&#8217;s independence, the temple continued to be governed by a trust controlled by the erstwhile royal family for whom Lord Padmanabha (Vishnu) is their family deity.</p>
<p>A bench of Justices U U Lalit and Indu Malhotra had on April 10 last year reserved its judgement on the pleas challenging the January 31, 2011 verdict of the Kerala High Court in the matter.</p>
<p>The high court had directed the state government to take steps to set up a body or trust to take control of the temple, its assets and management and to run the temple in accordance with the traditions.<br />
The apex court had on May 2, 2011 stayed the high court&#8217;s direction regarding taking over of the assets and management of the temple.</p>
<p>The top court had also directed that there shall be a detailed inventory of the articles, valuables, ornaments in Kallaras (vaults).</p>
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		<title>संकष्टी चतुर्थी व्रत की जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jul 2020 06:44:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>🌺🌺 संकष्टी चतुर्थी हिंदू पंचांग के अनुसार, चंद्र मास में दो चतुर्थी होती हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। तथा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, जो अमावस्या के बाद आती है, विनायक चतुर्थी कहलाती है। जैसा कि आप जानते हैं, संकष्टी...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>🌺🌺 संकष्टी चतुर्थी</strong></p>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, चंद्र मास में दो चतुर्थी होती हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। तथा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, जो अमावस्या के बाद आती है, विनायक चतुर्थी कहलाती है। जैसा कि आप जानते हैं, संकष्टी चतुर्थी व्रत हर महीने होता है। मुख्य संकष्टी चतुर्थी माघ महीने में आती है। यदि मंगलवार को संकष्टी चतुर्थी आ रही है। ताकि संकष्टी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाए। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है। इसी तरह पश्चिम और दक्षिण भारत में और खासकर महाराष्ट्र में और जानें अंगारकी चतुर्थी की कहानी गणेश भक्त और वेदवेते अग्निहोत्री ऋषि भारद्वाज अवंती शहर में रह रहे थे। एक बार जब वह क्षिप्रा नदी पर स्नान के लिए गए, तो एक अप्सरा पानी का खेल खेल रही थी।</p>
<p>उसे देखकर भारद्वाज का मूलाधार पिघल गया। यह पृथ्वी द्वारा धारण किया गया था। वह पुत्र जो उसके बाद पृथ्वी पर पैदा हुआ, वह जसवंत के फूल के समान लाल था। जब वह सात साल का था, तो पृथ्वी ने उसे ऋषियों को सौंप दिया। उन्होंने उपनयन किया, वेद पढ़ाए और गणेश मंत्र की पूजा करने को कहा। फिर लड़का जंगल में चला गया। उन्होंने एक हजार वर्षों तक तपस्या करके गणेश को प्रसन्न किया। उन्होंने गणेश जी से प्रसन्न होने के लिए कहा, जो स्वर्ग में रहें और अमृत प्रदर्शन करें और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हों। इस पर गणेश जी ने आज सभी को चतुर्थी का उपहार दिया। ड्रा जैसा कि आपका नाम भूमिपुत्र है, भौम अकारक की तरह लाल है, इसलिए अंककर और मंगल भी प्रसिद्ध होंगे क्योंकि यह शुभ कार्यों को करने की शक्ति रखता है। इस चतुर्थी को अनारकी कहा जाएगा और यह उपवास करने वालों के लिए ऋण मुक्त और पुण्य होगा। गणेश ने उन्हें आकाश में एक जगह दी जहां आपको ग्रहों में जगह मिलेगी और आप अमृत पीएंगे। मंगलवार को ऐसा ही युद्ध हुआ था और गणेश के उपहार के कारण, अंगारकी चतुर्थी बहुत महत्वपूर्ण हो गई थी।</p>
<p><strong>गणेश छंद</strong></p>
<p>गणेशायनमस्तुभ्यंसर्वसिद्धिप्रदायक।<br />
संकष्टरमेदेव गृहाणा जल्दी्यनमो ते स्तुते ेद<br />
कृष्णपक्षेचतुथ्र्यातुसम्पूजितविधुडये।<br />
क्षिप्रंप्रसीददेव गृहाण जल्दी्यनमो ते स्तुते सी<br />
यह अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत है</p>
<p>&#8220;संकष्टी चतुर्थी&#8221; भगवान गणेश की पूजा का दिन है। दिन के दौरान उपवास करते हैं, रात के समय भगवान गणेश की पूजा करते हैं, व्रत तोड़ने के लिए चंद्र दर्शन करते हैं। ऐसा इस व्रत का संक्षिप्त ज्ञान है। &#8220;श्रीसंकटशहरगणपति&#8221; इस व्रत के देवता का नाम है। इस व्रत को करने वाली स्त्री या पुरुष को श्रावण मास में संकष्टी के दिन व्रत शुरू करना चाहिए। व्रत को 21 संकष्टों को लगातार करते हुए मनाया जाना चाहिए। इच्छा पूरी होने तक कुछ उपवास करते हैं, जबकि अन्य लगातार उपवास करते हैं। संकष्टी कलाकारों को व्रत तोड़ने से पहले हमेशा &#8220;संकष्टी चतुर्थी महात्म्य&#8221; पढ़ना चाहिए। संकष्टचतुर्थी के दिन काले तिलों से स्नान करना चाहिए। दिनभर गणेशजी का ध्यान करके उपवास करना चाहिए। आवश्यकतानुसार उपवास वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। अपना व्यवसाय दिन भर करें।</p>
<p>यदि आवश्यक हो तो शाम / रात में स्नान करें। फिर एक साफ थाली या चौकोर पर चावल या गेहूं का एक छोटा सा ढेर रखें, उस पर साफ पानी से भरा कलश (तांबा) रखें; कलश के चारों ओर दो वस्त्र लपेटें, उस पर एक तमंचा रखें और उसमें &#8220;श्रीसंकटहार गणपति&#8221; रखें। (भगवान, गणेश की सोने, चांदी, तांबे आदि धातु की मूर्तियाँ या चित्र) पूजा करने वाले को लाल रंग का वस्त्र पहनना चाहिए। पूजा में प्रवाहित होने वाली &#8220;गंध-अक्षत-पुष्प-वस्त्र&#8221; का रंग लाल होना चाहिए। : सो अपवस्त्र, गजमुखाय नम: अयं धूपं, मुसखावनयाय नम: इतना गहन, विप्राणताय नम: अतः नैवेद्य और धनदाय नम: अतः दक्षिणा अर्पित करें। पूजा के बाद, अगले ध्यान मंत्र के रूप में &#8220;श्रीसंकटशहरगणपति&#8221; का ध्यान करें।</p>
<p>रक्तांग रक्तवस्त्रं तुकुसुन्मगणै: पूजितं रक्तगंधै: स्त्रक्षीरभधो रत्नदीप सुरतरुविमले रत्नसिंहासननाथम् ो दोर्भी: पशंकुशेशता भयद्रुतिरुचिराम चन्द्रमौलिन त्रिनेत्रम्। ध्यायेच्छांत्यर्थमीशं गणपतीमलं श्री सहितं प्रसन्नम् ्य फिर अपनी इच्छाओं की राहत और पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। मम सर्वविघ्ननिवृत्थ संज्ञाचरगणपतीपति्रीतिर्थ चतुर्थी सात्वंतात्वेन यथा मीलोतोपचार द्रव्यै: शोडोपचारे पूजाकरिहाय चार यानी। फिर निम्नलिखित &#8220;संकष्टी चतुर्थी महात्म्य&#8221; पढ़ें। 21 मोदक की दवा दिखाकर आरती करनी चाहिए। आरती के बाद &#8211; माया अशुद्धता के बिना या पदार्थ के बिना कृत्रिम है। तब सभी सिद्धियाँ गणेश के समान हैं।</p>
<p>इसलिए, सत्संग नमस्कार को जोड़ा जाना चाहिए। फिर चंद्रमा का दर्शन कर चंद्रमा को अर्घ्य (जल), गंध, अक्षत, पुष्प चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए। &#8220;रोहिनाथाय नम:&#8221; के रूप में अभिवादन। फिर उपवास तोड़ो। भोजन मोदक, मीठा, नमकीन और खट्टा होना चाहिए। [पंचांग में चंद्रोदय का समय दिया गया है।] भोजन के बाद मूर्ति की पूजा की जानी चाहिए और मूर्ति या चित्र को उठा लेना चाहिए। अनाज का उपयोग किया जाना चाहिए। तुलसी में जल डालें।</p>
<p>🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏</p>
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		<title>नागपंचमी पर सांप को दूध पिलाने से पहले जान लें, ये जरूरी बातें</title>
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		<pubDate>Tue, 07 Jul 2020 06:14:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News Mantra: Exclusive]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>🙏 ।।श्री गुरूदेव दत्त।। 🙏 नागपंचमी पर सांप को दूध पिलाने से पहले जान लें, ये जरूरी बातें यूं ही न बनें क‍िसी भी परंपरा का ह‍िस्‍सा नागपंचमी के पर्व पर सांपों को दूध प‍िलाने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। लेक‍िन क्‍या आप जानते हैं क‍ि...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>🙏 ।।श्री गुरूदेव दत्त।। 🙏</strong></p>
<p><strong>नागपंचमी पर सांप को दूध पिलाने से पहले जान लें, ये जरूरी बातें</strong></p>
<p><strong>यूं ही न बनें क‍िसी भी परंपरा का ह‍िस्‍सा</strong></p>
<p>नागपंचमी के पर्व पर सांपों को दूध प‍िलाने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। लेक‍िन क्‍या आप जानते हैं क‍ि इस परंपरा के चलते नागपंचमी के द‍िन या फिर कुछ द‍िनों बाद क‍ितने सांपों की मौत हो जाती है। बता दें क‍ि इस बार नागपंचमी 25 जुलाई को है। और अगर आप भी ऐसा ही करते आए हैं तो इस बार इस परंपरा का ह‍िस्‍सा बनने से पहले यहां बताई गई बातों पर एक बार गौर जरूर कर लें। ताकि परंपराओं के नाम पर कहीं बेजुबानों जीवों की जान न चली जाए।</p>
<p><strong>भविष्य पुराण में नागपूजा का ज‍िक्र</strong></p>
<p>भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में नागपूजा और नागों को दूध पिलाने का जिक्र किया गया है। मान्‍यता है कि सावन के महीने में नाग देवता की पूजा करने और नाग पंचमी के दिन दूध अर्पित करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और नागदंश का भय नहीं रहता है। यह भी मान्यता है कि नागों की पूजा से अन्‍न-धन के भंडार भी भरे रहते हैं। मगर विज्ञान की मानें तो सांप को दूध पिलाना काफी नुकसानदेय है।</p>
<p><strong>नाग को दूध प‍िलाने की धार्मिक मान्‍यताएं</strong></p>
<p>मान्‍यता है क‍ि नाग पंचमी के दिन सांप को दूध पिलाने और धान का लावा अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन सपेरे टोलियों में घर-घर घूमकर नागों के दर्शन करवाते हैं और भिक्षा मांगते हैं। श्रद्धालु नागों को दूध पिलाने के साथ सपेरे को भी दान देते हैं। लेकिन धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार नाग को दूध पिलाने से पाचन नहीं हो पाने या प्रत्यूर्जता से उनकी मृत्यु हो जाती है। इसलिए शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने को नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने को कहा गया है। लेकिन लोगों ने सांप को दूध प‍िलाने की परंपरा ही शुरू कर दी। जबक‍ि इससे सांपों की ज‍िंदगी पर बन आती है।</p>
<p><strong>सांप को दूध प‍िलाने पर वैज्ञानिक मत</strong></p>
<p>विज्ञान कहता है सांप को दूध पिलाना खतरनाक है। विज्ञान की मानें तो सांप रेप्‍टाइल जीव हैं न कि स्‍तनधारी। रेप्‍टाइल जीव दूध को हजम नहीं कर सकते और ऐसे में कई बार उनकी मृत्‍यु तक हो जाती है। दूध पिलाने से सांप की आंत में इन्‍फेक्‍शन हो सकता है। इसके चलते कई बार सांप की जिंदगी पर बन आती है।</p>
<p><strong>यह भी है मुख्‍य वजह</strong></p>
<p>दरअसल नाग पंचमी से महीने-डेढ़ महीने पहले जंगल से सांपों को पकड़ा जाता है। उसके बाद इन्‍हें बहुत ही निर्ममता से भूखा-प्‍यासा रखा जाता है और कई बार तो इनके दांत तक निकाल दिए जाते हैं। ताकि ये काट न सकें। एक महीने तक इस तरह से रहने के बाद सांप का शरीर सूख जाने के साथ ही उसकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। यही वजह है एक महीने तक भूखा-प्‍यासा रहने के बाद नागपंचमी वाले दिन सांप तेजी से दूध पी लेते हैं। जो क‍ि इनके लिए बहुत ही नुकसानदेय होता है।<br />
यूं बन जाता है दूध सांप के ल‍िए जहर</p>
<p>सर्प विशेषज्ञों के अनुसार सपेरे नाग पंचमी से पहले ही सांपों को पकड़कर उनके दांत तोड़ देते हैं और जहर की थैली निकाल लेते हैं। इससे सांप के मुंह में घाव हो जाता है। इसके बाद सपेरे सांप को भूख रखते हैं और नागपंचमी के द‍िन इन्‍हें दूध प‍िलाते हैं। सांप क्‍योंक‍ि मांसाहारी है इसलिए भूख-प्‍यास से परेशान सांप दूध को पानी समझकर पीते हैं। जो कि उनके मुंह में बने घाव में मवाद बन जाता है और इससे कुछ ही द‍िनों में सांपों की मौत हो जाती है। इसलिए बेहतर यही है क‍ि सांपों को नागपंचमी पर दूध प‍िलाने से बचें।</p>
<p><strong>🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏</strong></p>
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		<title>कैसे करें जया पार्वती का व्रत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2020 09:11:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News Mantra: Exclusive]]></category>
		<category><![CDATA[GOD]]></category>
		<category><![CDATA[GODDESS]]></category>
		<category><![CDATA[jaya parvati vrat]]></category>
		<category><![CDATA[mahadev]]></category>
		<category><![CDATA[mythological]]></category>
		<category><![CDATA[shankar]]></category>
		<category><![CDATA[shiv]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिन्दू धर्म में किये जाने वाले व्रत-और पूजा अनुष्ठानों का मकसद हमारी मनोकामनाएं पूरी करके हमारे जीवन में शुख-शांति लाना होता है। हालाँकि जीवन में शांति हासिल करने के लिए हमें परेशानी का हल मिलना बेहद आवश्यक है। ऐसे में अगर आपके जीवन में कोई समस्या है जिसका जवाब आपको...</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5/">कैसे करें जया पार्वती का व्रत</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दू धर्म में किये जाने वाले व्रत-और पूजा अनुष्ठानों का मकसद हमारी मनोकामनाएं पूरी करके हमारे जीवन में शुख-शांति लाना होता है। हालाँकि जीवन में शांति हासिल करने के लिए हमें परेशानी का हल मिलना बेहद आवश्यक है। ऐसे में अगर आपके जीवन में कोई समस्या है जिसका जवाब आपको नहीं मिल पा रहा है तो, अभी हमारे एक्सपर्ट ज्योतिषियों से प्रश्न पूछें और जानें हर समस्या का सटीक हल।</p>
<p>हिन्दू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को जया पार्वती व्रत शुरू होता है, जो सावन महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया को समाप्त होता है। इस वर्ष जया पार्वती व्रत 3-जुलाई 2020, से शुरू होकर 8-जुलाई 2020, को पूरा होगा। इस व्रत में माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विधान बताया गया है। इस व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी महिला या कुंवारी कन्या इस व्रत को रखती है उनके सौभाग्य में वृद्धि, संतान की प्राप्ति, पति की लंबी आयु, और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इस व्रत की कथा और महत्व जानने के लिए पढ़ें ये पूरा आर्टिकल।</p>
<p>विस्तृत स्वास्थ्य रिपोर्ट करेगी आपकी हर स्वास्थ्य संबंधित परेशानी का अंत</p>
<p>कहा जाता है कि कोई भी व्रत अगर नियम से किया जाये तो ही उसका फल मिलता है, अन्यथा नहीं। तो आइये जानते हैं कि जया-पार्वती व्रत को किस विधि से किया जाना चाहिए।</p>
<p>किसी भी अन्य व्रत-पूजा की तरह इस दिन भी सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें, और इसके बाद हाथ में जल लेकर इस व्रत को पूरा करने का मन में ही संकल्प लें।</p>
<p>इसके बाद अपनी यथाशक्ति से सोने, चाँदी, या मिट्टी के बैल पर बैठे शिव-पार्वती की मूर्ति की एक ऊँचें स्थान पर स्थापना करें। स्थापना के दौरान वेद मंत्रों का उच्चारण करें।</p>
<p>पूजा में कुमकुम, कस्तूरी, अष्टगंध, शतपत्र, व, फूल इत्यादी अवश्य शामिल करें।</p>
<p>इसके बाद पूजा में नारियल, फल, फूल, मिष्ठान, दाख इत्यादि के साथ माता पार्वती और भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें।<br />
पूजा के दौरान भगवान का स्मरण करें। (आगे पढ़ें इस व्रत में क्या बरतनी होती है सावधानी) पूजा के अंत में कथा सुनें या पढ़ें।</p>
<p>इस पूजा के बाद यूँ तो ब्राह्मणों को भोजन कराने का नियम निर्धारित हैं, लेकिन क्योंकि देश की मौजूदा परिस्तिथि के मद्देनजर यह मुमकिन नहीं हो सकता, ऐसे में ब्राह्मणों के नाम पर भोजन चढ़ा दें और फिर उसे या तो पास के किसी मंदिर में दे आयें या फिर किसी ज़रूरतमंद इंसान को दान कर दें। इसके बाद खुद बिना नमक वाला भोजन कर लें।</p>
<p>कहा जाता है कि जो कोई भी इंसान पूरी श्रद्धा-भक्ति से इस पूजन विधि से जया पार्वती व्रत को रखता है उसे माँ पार्वती की प्रसन्नता अवश्य हासिल होती है।</p>
<p><strong>जया पार्वती व्रत का महत्व</strong></p>
<p>सुहागिन महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं। इस व्रत को करने से संतान सुख की भी प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस व्रत को अगर कुंवारी लड़कियाँ रखती हैं तो उन्हें मनचाहा पति और शीघ्र विवाह का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।</p>
<p>जीवन में चल रही है समस्या! समाधान जानने के लिए प्रश्न पूछे</p>
<p>इस व्रत से जुड़ी एक परम्परा के अनुसार माना जाता है कि, इस व्रत की समाप्ति के एक दिन पहले जागरण और कीर्तन किया जाना चाहिए। ऐसा करना बेहद शुभ माना गया है। जो भी महिलाएं या लड़कियाँ इस व्रत को रखती हैं, उन्हें एक रात्रि पूर्व जागरण और कीर्तन करना होता है।</p>
<p><strong>जया पार्वती व्रत कथा</strong></p>
<p>इस व्रत के बारे में प्रचलित कथा के अनुसार बताया जाता है कि, एक बार एक ब्राह्मण और उनकी पत्नी ख़ुशी-ख़ुशी अपना जीवन यापन कर रहे थे। हालाँकि जीवन की सभी ख़ुशियों के बावजूद वो संतान सुख से वांछित थे। एक दिन महर्षि नारद ब्राह्मण के घर पहुंचे तो दोनों को चिंतित देख उन्होंने वजह जाननी चाही।</p>
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<p>ब्राह्मण और उनकी पत्नी सत्या ने उन्हें बताया कि, हमारे जीवन में सब कुछ है लेकिन संतान नहीं है। कृपया हमारी मदद कीजिये और हमें कोई उपाय सुझाईये। तब नारद जी ने उन्हें माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने की सलाह दी। उपाय मानकर दोनों भगवान की भक्ति में लीन तो हो गए, लेकिन एक दिन एक सांप ने ब्राह्मण को काट लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी।</p>
<p>अपने पति को निर्जीव देखकर सत्या को जब कुछ नहीं समझ आया तो, उन्होंने माँ पार्वती का स्मरण करना शुरू कर दिया। सत्या की भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने ब्राह्मण को पुनर्जीवित कर दिया। इसके बाद माता पार्वती ने ब्राह्मण और उसकी पत्नी से कोई वर मांगने को कहा। तब ब्राह्मण और उनकी पत्नी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा जाहिर की। ब्राह्मण और उनकी पत्नी की बात सुनकर माता पार्वती ने उन्हें जया-पार्वती व्रत रखने की सलाह दी, और कुछ ही समय में इस व्रत के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, तभी से इस व्रत को रखने की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।</p>
<p>250+ पन्नों की रंगीन कुंडली खोलेगी भविष्य के राज़: बृहत् कुंडली</p>
<p>जया पार्वती व्रत रखने जा रहे हैं तो, इस बात का विशेषतौर पर रखें ध्यान।</p>
<p>इस व्रत में नमक खाना वर्जित माना गया है।<br />
इसके अलावा गेंहू का आटा और कोई भी सब्जी इस व्रत में नहीं खानी होती है।<br />
इस व्रत में फल, दूध, दही, जूस, दूध से बनी मिठाई खाई जा सकती है।<br />
इस व्रत को कुछ लोग एक दिन के लिए रखते हैं, तो कुछ पांच दिनों के लिए। इस व्रत के पूरा होने के बाद मंदिर जाकर आटे की बनी रोटी या पूड़ी, सब्जी खायी जाती है और तब ही इस व्रत का उद्यापन पूरा माना जाता है। हालाँकि अभी मंदिर नहीं जा सकते हैं तो फोन पर या वीडियो कॉल पर किसी पंडित-पुजारी से विधि जानकर इस व्रत का उद्यापन करें।<br />
इसके अलावा इस व्रत को 5,7,9,11,या 20 साल तक लगातार किया जाता है।<br />
सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर</p>
<p>हम आशा करते हैं कि जया-पार्वती व्रत पर लिखा हमारा यह लेख आपके लिए सहायक साबित होगा। एस्ट्रोसेज के साथ जुड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।</p>
<p>🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏</p>
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		<title>ये एक्ट आफ गाड नहीं एक्ट आफ ह्यूमन है</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Apr 2020 07:45:13 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>इन दिनों परेश रावल की फिल्म याद आ रही है जिसमें वो भूकंप के बाद जब बीमा कंपनियां उसे मुआवजा देने से मना कर देती है तो वो ईशवर पर ही मुकदमा कर देता है . फिल्म में वो मुकदमा तो जीत जाता है लेकिन समाज की मानसिकता नहीं बदल पाता जहां उसको भी लोग भगवान बना देते हैं .मजे की बात ये कि ये फिर कोरोना की महामारी में भी हो रहा है . पूरी दुनिया के बडे बडे राजनेता किसी ना किसी की तलाश में लगे है जहां ये कह सकें कि ये सब तो मेरे नहीं उसके कारण हो रहा है .</p>
<p>लार्ड एक्शन ने लिखा है कि दुनिया में ऐसी कोई भी महामारी इतनी भयानक नहीं जिसके लिए इंसान खुद के अलावा किसी और को जिम्मेदार ठहरा सके . इन दिनों लिओपोल्ड कोल्हर की एक किताब द ब्रेकडाउन नेशन पड रहा हूं जिसमें दुनिया में महामारी या संकट के समय प्रागैताहिसिक काल से ही अब तक बताये जा रहे बहानों या थ्योरीस की बात की गयी है.<br />
दरअसल जब से मानव से समाज बनाया और सर्वाईवल आफ फिटेस्ट जैसी थ्यौरी पर काम करना शुरु किया तब से ही लालच , मोह</p>
<p>खुदगर्जी , सुरक्षा के नाम पर दूसरे की बलि जैसी बातें भी बढती गयी .इनसे ही किसी भी संकट या गलती के लिए दूसरे को जिम्मेदार ठहराने की बात सिसटम में समाहित हो गयी है.</p>
<p>शुरुआती दौर में इंसान जब सिर्फ शिकार पर था और थोडा समाज बनने लगा तो काल्पनिक शक्ति को ही सर्वशक्तिमान मानने लगा .इसमें पहले ताकतवर के राज की बात आयी फिर दैवीय शक्ति की और उसके साथ ही दानवी शक्ति की . आज भी यही है बीमारी के समय कुछ इसे दैवीय प्रकोप यानी एक्ट आफ गाड बता रहे है तो कुछ इसे शैतान का प्रकोप बता रहे है. कुछ प्रकृति का प्रकोप जैसी थ्योरी पर काम कर रहे हैं.</p>
<p>बडे बडे देश एक दूसरे पर इल्जाम थोप रहे है .अमेरिका अपनी गलती के बजाय चीन और विशव स्वास्थय संगठन को जिम्मेदार बता रहा है तो चीन में ही कुछ लोग शी जिनपिंग या कुछ अफरीकी मूल के लोगो को जिम्मेदार बता रहे हैं. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी गांव में बीमारी फैलने पर किसी एक महिला को चुडैल बताकर उसे जला दिया जाता है या फिर किसी भी बडी घटना पर कोई एनकाउंटर हो जाता है . अगर बात बन गयी तो ठीक नहीं तो फिर किसी नये की तलाश की जाती है .</p>
<p>भारत में भी महामारी के समय कभी मोदी , कभी बीजेपी या कांग्रेस शासित सरकार को तो कभी मजदूरों को इसके लिए जिम्मेदार बताने में समूचा मीडिया लगा है . कारपोरेट दफ्तरों में भी मंदी में लोग तलाशे जा रहे है जिनको जिम्मेदार बताया जा सके . उनकी छंटनी की जायेगी .उघोग जगत इसी नाम पर सरकार से फायदे उठाना चाहता है . वो चाहता है कि मजदूर 8 के बजाय 12 घंटे काम करे ताकि ज्यादा उत्पादन हो तो घाटा कम हो .मजदूर को लगता है कि फायदा तो सेठ का ही होगा उसका तो शोषण ही होगा .अब यहां कोई पूंजीवादी होना चाहता है तो कोई साम्यवादी तो कुछ समाजवादी हो जाये लेकिन कोई ये मानने को तैयार नहीं होगा कि उसकी अपनी भी जिम्मेदारी है .</p>
<p>सेपियन्स लिखने वाले हरारी बाबा को फिर से एक पढ़ना चाहिये .वो भी कह रहे है कि अगर इस महामारी के बाद पूरी दुनिया अपने साथ साथ दूसरे इसमे प्रकृति के बारे भी सोचने लगे तो शायद आगे दुनिया चलेगा वरना तो हम सब जोम्बी यानि मुर्दो की तरह रहेगे जो अपने फायदे के लिए पहले दूसरों को और फिर खुद को ही खाने लगेगा .</p>
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		<title>मन से रावण जो निकाले राम उसके मन में हैं&#8230;</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Oct 2019 06:37:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>दशहरा का मतलब होता है दश हरा .यानि शरीर के दसों विकारों से मुक्ति .जिसमें सबसे बडा है अंहकार . रावण वैसे तो लंका का राजा था . वो प्रकांड विद्वान ,शिवभक्त ,बलशाली और प्रतापी राजा था लेकिन जब अहंकार ने उसे पकड लिया तो कहते है कि उसका अहंकार...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दशहरा का मतलब होता है दश हरा .यानि शरीर के दसों विकारों से मुक्ति .जिसमें सबसे बडा है अंहकार . रावण वैसे तो लंका का राजा था . वो प्रकांड विद्वान ,शिवभक्त ,बलशाली और प्रतापी राजा था लेकिन जब अहंकार ने उसे पकड लिया तो कहते है कि उसका अहंकार एक सिर से बढकर दस के बराबर हो गया तभी से उसे दशानन कहने लगे. सच है अगर मन से रावण रुपी अहंकार को निकाल दे बस राम तो सबके मन में हैंl</p>
<p>दशहरे का मतलब केवल शक्ति पूजा नहीं बल्कि भक्ति भी है तभी तो रावण को भले ही बडे मैदानों में खडा कर जलाया जाता है लेकिन राम का ये संदेश भी होता है कि अब सब मिलकर रहें .यही आज की सबसे बडी जरुरत भी है l</p>
<p>देश में दशहरा मनाने को लेकर कई कहानियां प्रचलित है लेकिन सबसे ज्यादा प्रचलित रामायण की वो कहानी है जिसमें रावण ने अपने अंहकार के चलते मां सीता का अपहरण किया तो राम ने वानरों की सेना जुटाकर भी उसे हरा दिया .कहते है कि इसी दिन राम ने रावण का वध किया इसलिए उसके पुतले को जलाया जाता है. लेकिन गहराई से देखे तो इसमें कई संदेश छिपे हैं. पहला महिला के आत्मसम्मान का .राजा या कोई भी किसी को स्त्री के अपमान या अपहरण की इजाजत नही दी जा सकती वरना दंड सबसे बडा होगा .. दूसरा राम वैसे तो विष्णु के अवतार माने जाते है और उस समय वो अयोध्या के निर्वासित राजा भी थे वो चाहते थे तो अय़ोध्या और बाकी राजाओं से सेना मांग सकते थे लेकिन राम ने वानरों और आदिवासियों की सेना बनायी और संदेश दिया कि नेतृत्व सही हो तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं . फिर जब रावण का वध किया तो कहते है कि खुद राम ने लक्ष्मण को रावण से आशीर्वाद लेने भेजा और कहा कि अब अहंकार नहीं है तो रावण प्रखर विद्वान है . राम की इस कथा में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश सबसे अहम है और यही दशहरा का मतलब भी हैl</p>
<p>एक कहानी ये भी है कि मां दुर्गा ने राक्षसों का वध किया और शक्ति की स्थापना की ताकि सभी लोग शांत से रह सके .मां के इसी प्रताप के कारण कई लोग पूरे नौ दिन उपवास रखते हैं फिर दशहरे की पूजा से नये काम की शुरुआत करते हैं. बुंदेलखंड में इन नौ दिन में गेंहू की बालियां उगाने का चलन है .दशहरे से फसल कटाई की शुरुआत भी होती है .इस तरह यह किसानों का भी त्यौहार है<br />
शमी वृक्ष की पूजा करें l</p>
<p>एक और कहानी महाकाव्य महाभारत से निकलती है। कहानी के अनुसार पांडवों को 12 साल का वनवास और एक वर्ष छुपकर बिताना पड़ा था, क्योंकि उन्हें कौरवों ने जुए के खेल (चौसर) में पराजित कर दिया था। इसलिए उन्होंने निर्वासन के अंतिम वर्ष अलग अलग भेष में रहकर बिताने की योजना बनाई। चूँकि वे नहीं चाहते थे कि कोई और शख्स पहचान पाए कि उन्होंने अपने दिव्य और शक्तिशाली हथियारों को शमी के वृक्ष में छिपाया था।</p>
<p>एक वर्ष के अंत में वे अपने हथियार खोजने के लिए वापस आए और देवी दुर्गा, देवता की पूजा की। वे अपने हथियारों को लाने के बाद कौरवों के खिलाफ युद्ध में सीधे चले गए और बाद में विजयी हुए।</p>
<p>यह आयोजन दशमी में हुआ था और चूंकि बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी, इसलिए उस दिन को नवरात्रि के नौ दिनों को तमस, रज और सत्व के तीन मूल गुणों के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। पहले तीन दिन तमस के होते हैं, जहां देवी दुर्गा और काली की तरह उग्र होती हैं। अगले तीन दिन लक्ष्मी से संबंधित हैं – सौम्य लेकिन भौतिक रूप से उन्मुख देवी। अंतिम तीन दिन मां सरस्वती को समर्पित हैं, जो सत्त्व है। यह ज्ञान और विज्ञान से संबंधित है।</p>
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		<title>नवरात्र नौवां दिन &#8211; माँ सिद्धिदात्री</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Oct 2019 05:22:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नवरात्र नौवाँ दिन सिद्धिदात्री नवरात्री के नौवें दिन माँ दुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैl माता का ये रूप सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है मान्यता है की देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक और गृहस्थ आश्रम में रहने वाले माँ के भक्त...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नवरात्र नौवाँ दिन</strong></p>
<p><strong>सिद्धिदात्री</strong></p>
<p>नवरात्री के नौवें दिन माँ दुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैl माता का ये रूप सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है मान्यता है की देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक और गृहस्थ आश्रम में रहने वाले माँ के भक्त सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करते है. जिससे वो यश बल और धन प्राप्त करते है l माँ का ये रूप अष्ट सिद्धियां प्रदान करने वाला है माँ कमल पर विराजती है उनके हाथो में कमल शंख, गदा और सुदर्शन चक्र है l</p>
<p>💐 नवरात्री शुभकामनाएं l</p>
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		<title>MR. AMOL KALE HAS BEEN SWORN IN AS SPECIAL INVITED MEMBER FOR SHRI TRIUPATI BALAJI DEVSTHAN TRUST</title>
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		<pubDate>Fri, 27 Sep 2019 06:29:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>MR. AMOL KALE HAS BEEN SWORN IN AS SPECIAL INVITED MEMBER FOR SHRI TRIUPATI BALAJI DEVSTHAN TRUST FROM OUR REPRESENTATIVE. An industrialist Amol Kale has been appointed as the special invited member of the famous Shri Tirupati Balaji Devasthan Trust Tirumala in Andhra Pradesh on September 23.Amol Kale was sworn...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>MR. AMOL KALE HAS BEEN SWORN IN AS SPECIAL INVITED MEMBER FOR SHRI TRIUPATI BALAJI DEVSTHAN TRUST FROM OUR REPRESENTATIVE.</p>
<p>An industrialist Amol Kale has been appointed as the special invited member of the famous Shri Tirupati Balaji Devasthan Trust Tirumala in Andhra Pradesh on September 23.Amol Kale was sworn in as Special Invitee Member of the Trust by Special Officer AV Dharma Reddy of Tirupati Devasthan to Tirumala. Along with Kale, the other five members of the Goddess appointed by the Andhra Pradesh government took oath on Monday.</p>
<p>Shri Tirupati Balaji Devasthan is a famous shrine in India, and a large number of devotees come to see Shri Tirupati Balaji. Shri Tirupati Balaji Devasthan Trust Tirumala is famous for being the largest religious trust organization in the country and in the world. The appointment of Amol Kale as an invited member of this Trustee is a very important matter. Amol Kale has always been at the forefront of religious and social activities and also being a special invited on Trust he will also be president of Local advisory committee Mumbai(Maharashtra)</p>
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