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कैसे करें जया पार्वती का व्रत

हिन्दू धर्म में किये जाने वाले व्रत-और पूजा अनुष्ठानों का मकसद हमारी मनोकामनाएं पूरी करके हमारे जीवन में शुख-शांति लाना होता है। हालाँकि जीवन में शांति हासिल करने के लिए हमें परेशानी का हल मिलना बेहद आवश्यक है। ऐसे में अगर आपके जीवन में कोई समस्या है जिसका जवाब आपको नहीं मिल पा रहा है तो, अभी हमारे एक्सपर्ट ज्योतिषियों से प्रश्न पूछें और जानें हर समस्या का सटीक हल।

हिन्दू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को जया पार्वती व्रत शुरू होता है, जो सावन महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया को समाप्त होता है। इस वर्ष जया पार्वती व्रत 3-जुलाई 2020, से शुरू होकर 8-जुलाई 2020, को पूरा होगा। इस व्रत में माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विधान बताया गया है। इस व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी महिला या कुंवारी कन्या इस व्रत को रखती है उनके सौभाग्य में वृद्धि, संतान की प्राप्ति, पति की लंबी आयु, और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इस व्रत की कथा और महत्व जानने के लिए पढ़ें ये पूरा आर्टिकल।

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कहा जाता है कि कोई भी व्रत अगर नियम से किया जाये तो ही उसका फल मिलता है, अन्यथा नहीं। तो आइये जानते हैं कि जया-पार्वती व्रत को किस विधि से किया जाना चाहिए।

किसी भी अन्य व्रत-पूजा की तरह इस दिन भी सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें, और इसके बाद हाथ में जल लेकर इस व्रत को पूरा करने का मन में ही संकल्प लें।

इसके बाद अपनी यथाशक्ति से सोने, चाँदी, या मिट्टी के बैल पर बैठे शिव-पार्वती की मूर्ति की एक ऊँचें स्थान पर स्थापना करें। स्थापना के दौरान वेद मंत्रों का उच्चारण करें।

पूजा में कुमकुम, कस्तूरी, अष्टगंध, शतपत्र, व, फूल इत्यादी अवश्य शामिल करें।

इसके बाद पूजा में नारियल, फल, फूल, मिष्ठान, दाख इत्यादि के साथ माता पार्वती और भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें।
पूजा के दौरान भगवान का स्मरण करें। (आगे पढ़ें इस व्रत में क्या बरतनी होती है सावधानी) पूजा के अंत में कथा सुनें या पढ़ें।

इस पूजा के बाद यूँ तो ब्राह्मणों को भोजन कराने का नियम निर्धारित हैं, लेकिन क्योंकि देश की मौजूदा परिस्तिथि के मद्देनजर यह मुमकिन नहीं हो सकता, ऐसे में ब्राह्मणों के नाम पर भोजन चढ़ा दें और फिर उसे या तो पास के किसी मंदिर में दे आयें या फिर किसी ज़रूरतमंद इंसान को दान कर दें। इसके बाद खुद बिना नमक वाला भोजन कर लें।

कहा जाता है कि जो कोई भी इंसान पूरी श्रद्धा-भक्ति से इस पूजन विधि से जया पार्वती व्रत को रखता है उसे माँ पार्वती की प्रसन्नता अवश्य हासिल होती है।

जया पार्वती व्रत का महत्व

सुहागिन महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं। इस व्रत को करने से संतान सुख की भी प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस व्रत को अगर कुंवारी लड़कियाँ रखती हैं तो उन्हें मनचाहा पति और शीघ्र विवाह का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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इस व्रत से जुड़ी एक परम्परा के अनुसार माना जाता है कि, इस व्रत की समाप्ति के एक दिन पहले जागरण और कीर्तन किया जाना चाहिए। ऐसा करना बेहद शुभ माना गया है। जो भी महिलाएं या लड़कियाँ इस व्रत को रखती हैं, उन्हें एक रात्रि पूर्व जागरण और कीर्तन करना होता है।

जया पार्वती व्रत कथा

इस व्रत के बारे में प्रचलित कथा के अनुसार बताया जाता है कि, एक बार एक ब्राह्मण और उनकी पत्नी ख़ुशी-ख़ुशी अपना जीवन यापन कर रहे थे। हालाँकि जीवन की सभी ख़ुशियों के बावजूद वो संतान सुख से वांछित थे। एक दिन महर्षि नारद ब्राह्मण के घर पहुंचे तो दोनों को चिंतित देख उन्होंने वजह जाननी चाही।

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ब्राह्मण और उनकी पत्नी सत्या ने उन्हें बताया कि, हमारे जीवन में सब कुछ है लेकिन संतान नहीं है। कृपया हमारी मदद कीजिये और हमें कोई उपाय सुझाईये। तब नारद जी ने उन्हें माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने की सलाह दी। उपाय मानकर दोनों भगवान की भक्ति में लीन तो हो गए, लेकिन एक दिन एक सांप ने ब्राह्मण को काट लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी।

अपने पति को निर्जीव देखकर सत्या को जब कुछ नहीं समझ आया तो, उन्होंने माँ पार्वती का स्मरण करना शुरू कर दिया। सत्या की भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने ब्राह्मण को पुनर्जीवित कर दिया। इसके बाद माता पार्वती ने ब्राह्मण और उसकी पत्नी से कोई वर मांगने को कहा। तब ब्राह्मण और उनकी पत्नी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा जाहिर की। ब्राह्मण और उनकी पत्नी की बात सुनकर माता पार्वती ने उन्हें जया-पार्वती व्रत रखने की सलाह दी, और कुछ ही समय में इस व्रत के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, तभी से इस व्रत को रखने की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।

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जया पार्वती व्रत रखने जा रहे हैं तो, इस बात का विशेषतौर पर रखें ध्यान।

इस व्रत में नमक खाना वर्जित माना गया है।
इसके अलावा गेंहू का आटा और कोई भी सब्जी इस व्रत में नहीं खानी होती है।
इस व्रत में फल, दूध, दही, जूस, दूध से बनी मिठाई खाई जा सकती है।
इस व्रत को कुछ लोग एक दिन के लिए रखते हैं, तो कुछ पांच दिनों के लिए। इस व्रत के पूरा होने के बाद मंदिर जाकर आटे की बनी रोटी या पूड़ी, सब्जी खायी जाती है और तब ही इस व्रत का उद्यापन पूरा माना जाता है। हालाँकि अभी मंदिर नहीं जा सकते हैं तो फोन पर या वीडियो कॉल पर किसी पंडित-पुजारी से विधि जानकर इस व्रत का उद्यापन करें।
इसके अलावा इस व्रत को 5,7,9,11,या 20 साल तक लगातार किया जाता है।
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हम आशा करते हैं कि जया-पार्वती व्रत पर लिखा हमारा यह लेख आपके लिए सहायक साबित होगा। एस्ट्रोसेज के साथ जुड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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