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विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम में बोले डॉ. प्रदीप-नवजात शिशु का पहला वैक्सीन मां का दूध

विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम में बोले डॉ. प्रदीप-नवजात शिशु का पहला वैक्सीन मां का दूध

पटना। विश्व स्तनपान सप्ताह पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (भारत सरकार) के पटना एवं क्षेत्रीय कार्यालय छपरा तथा आईसीडीएस गोपालगंज व थावे के संयुक्त तत्वावधान में थावे प्रखंड स्थित सीडीपीओ कार्यालय सभागार में एकदिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन गोपालगंज के अनुमंडल पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार, केंद्रीय संचार ब्यूरो (पटना) के कार्यक्रम प्रमुख पवन कुमार सिन्हा और थावे प्रखंड की सीडीपीओ अंजू कुमारी ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि शिशु का पहला वैक्सीन मां का दूध होता है। इसलिए जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध ही नवजात शिशु को पिलाना चाहिए। मां के दूध में कैल्शियम, आयरन प्रोटीन व अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। उन्होंने कहा कि पहला छह माह केवल और केवल मां का दूध शिशु को पिलाना चाहिए। मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत 1991 में हुई थी और शुरुआत में केवल एक दिन के लिए ही स्तनपान दिवस के रूप में मनाया जा रहा था। लेकिन, इसकी आवश्यकता और उद्देश्यों को देखते हुए इसे एक सप्ताह तक मनाने का निर्णय लिया गया और तब से यह हर वर्ष अगस्त माह के पहले सप्ताह में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि स्तनपान को लेकर महिलाओं में कई भ्रांतियां भी है। इसे दूर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिलाओं को छह माह का मातृत्व अवकाश मिलता है, लेकिन इसके बाद भी महिलाएं दो वर्षों तक स्तनपान कराती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यस्थल पर ब्रेस्टफीडिंग रूम की आवश्यकता महसूस की गई और उसकी व्यवस्था की दिशा में तेजी से कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से महिलाओं को स्तनपान के संबंध में विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है।

विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम में बोले डॉ. प्रदीप-नवजात शिशु का पहला वैक्सीन मां का दूध

केंद्रीय संचार ब्यूरो (पटना) के कार्यक्रम प्रमुख पवन कुमार सिंहा ने कहा कि विश्व स्तनपान पर आयोजित विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं के माताओं के बीच स्तनपान को बढ़ावा देना और बच्चों को बीमारी व कुपोषण से बचाने के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं के बीच स्तनपान को लेकर फैली भ्रांतियों को खत्म करने और स्तनपान की आवश्यकताओं व लाभ के बारे में ग्रामीण स्तर तक की महिलाओं को बताना और उन्हें जागरूक करना है। थावे प्रखंड की स्वास्थ्य प्रबंधक खुशबू कुमारी ने कहा कि मां और बच्चे का रिश्ता सभी रिश्तों से बड़ा होता है। इसका सबसे बड़ा कारण स्तनपान ही है। जहां बच्चों से सभी के रिश्ते उसके जन्म के साथ शुरू होते हैं। वहीं, मां का रिश्ता सभी रिश्तों से नौ महीना अधिक होता। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर फीडिंग रूम अवश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने संस्थानों में बोतल फ्री जोन बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्तनपान से न केवल बच्चों की सुरक्षा होती है, बल्कि माता भी कई बीमारियों से सुरक्षित होती हैं। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने से ब्रेस्ट कैंसर और ओवरी कैंसर जैसी समस्याओं से महिलाओं को निजात मिलता है। उन्होंने कहा कि स्तनपान कराने से गैरसंचरण बीमारियों का खतरा बच्चों में कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसा माहौल बनाना है जहां महिलाएं कार्यस्थल पर अपने नवजात शिशुओं को बेझिझक ब्रेस्ट फिडिंग करा सकें।

आईसीडीएस गोपालगंज के जिला समन्वयक ब्रजकिशोर सिंह ने कहा कि मां के दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जो बच्चों के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म से पूर्व और जन्म के बाद सबसे आवश्यक है कि माताओं की काउंसलिंग की जाए ताकि उनमें स्तनपान को लेकर किसी प्रकार की भ्रांति ना रहे। उन्होंने कहा कि डब्बा बंद दूध पर भी लिखा होता है कि मां का दूध ही सर्वोत्तम है। उन्होंने कहा कि हमें एक गांव को गोद लेकर और एक लक्षित तरीके से गांव को बोतल फ्री करने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है और यह केवल काउंसलिंग से ही संभव है।

महिला हेल्पलाइन गोपालगंज की प्रबंधक नाजिया प्रवीण ने कहा कि महिलाएं सोचती हैं कि बच्चे को बोतल थमा दो और उसके हाथ में मोबाइल दे दो तो हमारी छुट्टी हो जाएगी। लेकिन यह नहीं जानतीं हैं कि यह बिल्कुल भी बच्चों के विकास के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि गांव में स्तनपान को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां हैं जिसे हमें दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं को स्तनपान के प्रति सचेत व जागरूक करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने बच्चों के लिए पालना गृह और माताओं के लिए फीडिंग रूम व चेंजिंग रूम अधिक से अधिक बनाने पर जोर दिया।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि हमें डब्बा बंद दूध व मदर फीडिंग में मदर फीडिंग को चुनाव करना चाहिए। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा होती है, बल्कि माता की भी इससे सुरक्षा होती है। कार्यक्रम स्थल पर आंगनबाड़ी सेविका सहायिकाओं के बीच स्तनपान संबंधी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लीं और मौके पर उन्हें अतिथियों ने पुरस्कृत भी किया। साथ ही कार्यक्रम स्थल पर रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय संचार ब्यूरो पटना के सहायक क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी अमरेंद्र मोहन ने किया।

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