नई दिल्ली। केंद्रीय विद्युत और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को नई दिल्ली में चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन ‘भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी, राज्य मंत्री श्रीपद नाइक, विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद भी उपस्थित रहे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मनोहर लाल ने बताया कि भारत ने अपनी निर्धारित राष्ट्रीय प्रतिबद्धता (एनडीसी) के तहत 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता का लक्ष्य समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है और अगले दो दशकों में इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।
विद्युत क्षेत्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भारत अब बिजली की कमी वाले देश से निकलकर बिजली अधिशेष (सरप्लस) वाला राष्ट्र बन गया है। पिछले वर्षों में पारेषण बुनियादी ढांचे में 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक हो गया है। साथ ही सौर ऊर्जा क्षमता भी 2.8 गीगावाट से बढ़कर 143 गीगावाट से अधिक हो गई है। वर्ष 2024-25 में देश ने 250 गीगावाट की उच्चतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया है और भविष्य में 270 गीगावाट से अधिक की मांग के लिए भी पूरी तरह तैयार है। भारत अब स्वयं को किफायती ऊर्जा के वैश्विक निर्यातक के रूप में स्थापित कर रहा है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा दीर्घकालिक स्थिरता का आधार है, लेकिन थर्मल पावर अभी भी ऊर्जा प्रणाली की रीढ़ बनी रहेगी। उन्होंने विकास के लिए गति और कौशल के साथ संतुलित ऊर्जा परिवर्तन पर जोर दिया। वहीं राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने जानकारी दी कि 2014 के बाद से भारत की स्थापित बिजली क्षमता दोगुनी से अधिक हो गई है और अब 32 लाख से अधिक परिवार और 23 लाख किसान स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं, जो एक सहभागी ऊर्जा अर्थव्यवस्था की ओर बड़े बदलाव का संकेत है।
विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि भारत अब दुनिया के सबसे बड़े सिंक्रोनाइज्ड ग्रिडों में से एक का संचालन कर रहा है, जो स्मार्ट मीटर और उन्नत नीतिगत ढांचे से सुसज्जित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले चरण में तकनीक, डेटा और वैश्विक भागीदारी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इतने बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित करने के लिए बिजली क्षेत्र का वित्तीय रूप से व्यवहार्य और मजबूत होना अनिवार्य है। यह शिखर सम्मेलन न केवल एक आयोजन है, बल्कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ऊर्जा नेतृत्व का एक बड़ा अभियान है।
