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		<title>अब चलेगी शिंदेशाही</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jan 2024 08:42:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
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					<description><![CDATA[-संदीप सोनवलकर वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर के करीब डेढ़ साल के इँतजार के बाद आये फैसले ने इतना तो साफ कर ही दिया है कि अब महाराष्ट्र में केवल शिंदेशाही चलेगी . सरकार में ही नहीं आने वाले चुनाव में भी .इस फैसले का महाराष्ट्र की राजनीति पर...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>-संदीप सोनवलकर वरिष्ठ पत्रकार</strong><br />
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर के करीब डेढ़ साल के इँतजार के बाद आये फैसले ने इतना तो साफ कर ही दिया है कि अब महाराष्ट्र में केवल शिंदेशाही चलेगी . सरकार में ही नहीं आने वाले चुनाव में भी .इस फैसले का महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी असर होगा. एक तरफ एकनाथ शिंदे अब सेफ हो गये है और अगले कुछ महीनों तक खुलकर खेल सकते हैं तो दूसरी तरफ उदधव ठाकरे गुट को कानूनी लड़ाई से आगे लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और सिम्पथी लेने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी क्योंकि अब अगला कोई भी बदलाव चुनाव के बाद ही होगा .<br />
लेकिन इन सबके बीच एक तीसरा खेमा भी है बीजेपी का जिसे अब चुनाव तक तो शिंदे की लीडरशिप में ही काम करना होगा . बीजेपी का चेहरा भी अब महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ही होंगे और देवेंद्र फणनवीस को फिलहाल साइड सीट से ही काम चलाना होगा . वो अभी तो ये नहीं कह पायेंगे कि मैं फिर आउंगा . इतना ही एकनाथ शिंदे की बारगेनिंग पावर भी इसके साथ ही बढ़ गयी है. वो भी अब लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उतनी सीट तो मांग ही सकते हैं जितने पर उनके विधायक और सांसद जीते यानि विधानसभा की 43 और लोकसभा की 13 सीटें . इससे बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में भी संघर्ष बढ़ेगा .<br />
इसका एक फायदा अजीत पवार को भी होगा जो खुद ही अपने चाचा की पार्टी तोड़कर असली एनसीपी होने का दावा कर रहे हैं स्पीकर को उनके दावे पर भी फैसला देना है. चुनाव आयोग भी सुनवाई पूरी कर चुका है .अब अजीत पवार मान सकते हैं कि उनको भी असली एनसीपी के तौर पर चुनाव चिन्ह मिल जायेगा और उनके भी विधायक अयोग्य नहीं होंगे .इससे अजीत पवार की भी बारगेनिंग पावर बढ़ सकती है और अपना फैसला आने के बाद वो भी जीती हुयी सीटों के लिए दवाब बनायेंगे.<br />
इस बीच एक बात पर चर्चा शुरु हो गयी है कि अब बीजेपी चाहती है कि लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी हो जायें क्योकि विधानसभा में ये साबित हो गया है कि जो हुआ वो सही हुआ इसलिए बीजेपी मान रही है कि इससे उदधव ठाकरे गुट के प्रति बन रही सिम्पथी में कमी आयेगी जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. इसी हफ्ते में बीजेपी ने दो अहम बैठकें पुणे और नाशिक में कोर ग्रुप की बैठक के तौर पर की जिसमें इस बात पर चर्चा की गयी कि चुनाव की तैयारी क्या हो. यानि भाजपा अंदरखाने से दोनों चुनाव के लिए तैयार हो रही है . उसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि राष्ट्रपति कोविद की अध्यक्षता में बनी एक देश एक चुनाव की हाईलेवल कमिटी में सुझाव देने की अंतिम तारीख इसी महीने है और उसके बाद फरवरी तक रिपोर्ट आ गयी तो बजट सेशन में इसे मंजूर कर दिया जायेगा . तब बीजेपी चाहेगी कि कम से कम दस से ज्यादा राज्यों के चुनाव एक साथ तो हो जायें .इनमें महाराष्ट्र के साथ साथ झारखंड भी शामिल हो जायेगा.<br />
लेकिन इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की चिंतायें भी बढ़ा दी है. कांग्रेस को अब इस बात का डर लगने लगा है कि उसके कम से कम 12 विधायक टूट सकते है और मार्च में होने वाले राज्यसभा चुनाव में खेल हो सकता है तब विधानसभा स्पीकर से उनको भी राहत मिल सकती है. अगर कांग्रेस के बड़े नेता टूटे तो इससे इंडिया गठबंधन के मनोबल पर असर होगा . दिल्ली में हुयी बैठक में भी इस बात पर चिंता जतायी गयी कि तीनों दलों के पास धनबल और बाहुबल की कमी है साथ ही सरकारी एजेंसियों के डर से कोई मदद भी नहीं कर रहा . तो चुनाव कैसे लड़ा जाये .कहा जा रहा है कि मराठवाड़ा के एक बड़े कांग्रेसी नेता अशोक चव्हाण अगर टूट गये तो कांग्रेस का मनोबल एकदम कम हो जायेगा.<br />
कुल मिलाकर हम कह सकते है कि महाराष्ट्र की राजनीति में अगले कुछ महीने एकनाथ शिंदे के आसपास ही घूमेंगे.एक तरफ उन पर बीजेपी सहित गठबंधन को 48 में से 45 लोकसभा जीतने का भार होगा वहीं दूसरी तरफ अगर विधानसभा चुनाव हो गया तो कम से कम 50 सीटें लानी होगी ताकि अगली सरकार में भी उनकी सुनी जाये वरना बीजेपी अंदर खाने तो शतप्रतिशत भाजपा पर काम कर ही रही है .</p>
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		<title>महाराष्ट्र की राजनीती में तलवारें खिंची  लेकिन हम दुश्मन एक है  शिंदे सरकार के विग्यापन से खलबली</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Jun 2023 06:42:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
		<category><![CDATA[bal thakre]]></category>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र की राजनीती में आ रहा भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा . अब एक नया मोड़ आया है जब सरकार चला रही शिंदे शिवसेना और बीजेपी ही आपस में भिड़ गये हैं. वो भी गृहमंत्री अमित शाह के नांदेड़ के दौरे के अगले ही दिन .इससे सवाल ये...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीती में आ रहा भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा . अब एक नया मोड़ आया है जब सरकार चला रही शिंदे शिवसेना और बीजेपी ही आपस में भिड़ गये हैं. वो भी गृहमंत्री अमित शाह के नांदेड़ के दौरे के अगले ही दिन .इससे सवाल ये भी उठने लगा है कि क्या शाह को ये सब पता है और वो उसे होने दे रहे हैं.</p>
<p>असल में अब शिंदे सरकार ने राज्य से सारे अखबारों मे एक विग्यापन देकर कहा है कि राष्ट्र में मोदी और महाराष्ट्र में शिंदे. इसी विग्यापन में दावा किया गया है कि राज्य में एक सर्वे कराया गया जिसमें सामने आया है कि भाजपा को 30.2 प्रतिशत लोग और शिंदे शिवसेना को 16.2 प्रतिशत यानि कुल मुलाकर इस गठबंधन सरकार को 46 .4 फीसदी लोग पसंद करते है.</p>
<p>इसी में आगे कहा गया है कि मुख्यमंत्री के तौर पर एक नाथ शिंदे को 26.1 प्रतिशत और फणनवीस को 23 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं यानि कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शिंदे अब फणनवीस से आगे है जबकि बीजेपी मानती है कि फणनवीस ही उनके नेता है और वहीं मुख्यमंत्री का चेहरा है .</p>
<p>अब सवाल ये उठ रहा है कि ये सब शिंदे खुद अपने मन से कर रहे हैं या दिल्ली के आका से पूछकर .. क्योकि लगता नही कि शिंदे अपने दम पर ये कर सकते हैं .इस समय शिंदे का पूरा पब्लिसिटी काम तो दिल्ली के इशारे पर आयी एजेंसी ही कर रही है साथ ही शिंदे के ओएसडी आनंद मढिया भी गुजरात के है और शाह के करीबी है तो क्या इसका मतलब है कि बीजेपी की लीडरशिप ही देवेंद्र फणनवीस को छोटा करके दिखाना चाहती है और ये तय हो गया है कि अब शिंदे ही हमेशा चेहरा होंगे. ये सब सवाल महाराष्ट्र बीजेपी के नेताओँ को परेशान कर रहे हैं .</p>
<p>एक चर्चा ये भी है कि दो दिन पहले अखबारों में एक खबर छपवाई गयी थी कि बीजेपी आलाकमान शिंदे गुट के पांच मंत्रियों के काम से खुश नही है और ये मंत्री माल कमा रहे हैं इसलिए उनको हटाने की बात चल रही है .इस पर शिंदे गुट के मंत्री भडक गये थे . असल में शिंदे अपने साथ आये 42 विधायकों में से किसी को नाराज करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहते इसलिए कहा जा रहा है कि ये विग्यापन जवाबी हमला है .इस तरह शिवसेना और बीजेपी खुद ही एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं.</p>
<p>एक तीसरी खबर दिलली के गलियारों से आ रही है कि शिंदे चाहते है कि फणनवीस को दिलली बुलाकर केंद्रीय मंत्री बना लिया जाये और वो ये बात दिलली के सामने ऱख चुके है इसलिए ये खींचतान हो रही है लेकिन सवाल ये है कि क्या बीजेपी ऐसा करेगी और फिर फणनवीस नही तो कौन होगा बीजेपी का चेहरा . इस बीच राज्य के अखबारों के सर्वे मे आ रहा है कि शिंदे और फणनवीस की जोड़ी लगातार अपना जनाधार खो रही है और बीजेपी को भी ये गठबंधन रास नही आ रहा है ..जानकारों का मानना है कि अगर अभी लोकसभा चुनाव हुये तो पिछली बार शिवसेना के साथ मिलकर 48 में से 42 सीटें जीतने वाले गठबंधन के बजाय नये शिंदे और बीजेपी गठबंधन को 20 सीट भी नहीं मिलेगी . बीजेपी ये नुकसान सहन नहीं कर सकती है. तो क्या आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में अभी और भी कई भूचाल आना बाकी है. मानसून के तेज हवाओँ से तो यही लगता है कि राज्य की राजनीती में बहुत कुछ होने वाला है .</p>
<p><strong>-संदीप सोनवलकर </strong></p>
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