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	<title>politics - newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</title>
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		<title>कांग्रेस का भविष्य नहीं वर्तमान खराब है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Mar 2024 07:24:57 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>इन दिनों हर कांग्रेसी नेता ये पूछ रहा है कि कांग्रेस में रहकर क्या फायदा . क्या ये पार्टी रहेगी या नहीं और कांग्रेस का कोई भविष्य है या नहीं . असल में ये वर्तमान से उपजा निराशावाद है जो कांग्रेसी नेताओं को आगे नहीं देखने दे रहा है . लगातार दस साल सत्त्ता से बाहर रहने के बाहर कांग्रेसी नेता छटपटाने लगे हैं उनको लगने लगा है कि एकाध बार और तो वो इंतजार कर सकते है लेकिन अगर आगे भी ऐसा ही रहा तो .ऊपर से बीजेपी का अगले 25 साल तक राज करने का नारा उनको और भी घबरा देता है. लेकिन असल जमीनी हकीकत देखें तो कांग्रेस का वर्तमान जरुर खराब है लेकिन भविष्य नहीं.ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपने कैडर को ये समझाना होगा कि अभी भली है पार्टी सबसे निचले पायदान पर है लेकिन आगे भविष्य ठीक होगा.</p>
<p>कांग्रेस के रणनीतिकार ये मानते है कि अभी लीडरशिप खुद भी तय नही कर पा रही है कि इसी बार मोदी को हराया जाये या अगले बार तक मोदी के जाने का इंतजार किया जाये. राहुल गांधी और उनके करीबी मानते है कि अभी लड़ाई लंबी और विचारधारा की है सत्ता में आने की राहुल को कोई जल्दबाजी नही हैं. उनको लगता है कि विचारधारा की लड़ाई पर कायम रहो जल्दी ही जब भी लोग बीजेपी से ऊबेंगे या मोदी की लीडरशिप कमजोर होगी तो मौका कांग्रेस को ही मिलेगा. वैसे उनकी बात में दम भी है क्योंकि खुद बीजेपी के नेता मानते है कि इसी बार बहुत चुनौती है भले ही नारा 400 पार का हो लेकिन जमीन पर अब बीजेपी के अंदर ही और बाहर भी विरोध होने लगा है. बीजेपी के नेता भी ये सवाल उठाने लगे है कि बाहर से आये लोगों को तरजीह दी जा रही है उनको नहीं. अगर इस बार बीजेपी और उसके सहयोगी 400 का आंकड़ा पार नहीं करते या बहुमत से दो कदम भी पीछे रह जाते है तो फिर उनकी विश्वसनीयता मे तेजी से कमी आयेगी. कांग्रेस जीत सकती है कुछ ज्यादा सीटें .</p>
<p>अभी कांग्रेस की रणनीति बनाने में लगे लोगों को लगता है कि किसी भी हालत में इस बार कांग्रेस की सीटें कुछ बढ़ सकती है और ये आंकड़ा 80 तक पहुंच सकता है. कांग्रेस के नेताओं को कर्नाटक,तेलंगाना. आंध्रप्रदेश . महाराष्ट्र और बिहार से कुछ बढ़त की उम्मीद है साथ ही मध्यप्रदेश ,राजस्थान . उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक से तीन सीट का इजाफा हर राज्य में मिलने की उम्मीद है . इसलिए कांग्रेस को लगता है कि अब उसके पास खोने को कुछ नही पाने को ही . हालांकि अब भी कई राज्यों में करीब 30 से 35 विधायक और इतने ही बड़े नेता बीजेपी जाने को तैयार है इसलिए पार्टी को संवाद बढ़ाना होगा और इन नेताओं को समझाना होगा कि बीजेपी में अब वैकेंसी नहीं है और वहां जाकर कुछ मिलने वाला नही है .जो नेता लड़ने तैयार है उनको रोकना चाहिये .<br />
कांग्रेस में जेनरेशन चेंज .</p>
<p>ये ऐसा आखिरी चुनाव है जिसमें कांग्रेस की पुरानी पीढ़ी रहेगी उसके बाद दूसरी और तीसरी यानि नई पीढ़ी के लोग आ जायेंगे . तब कमलनाथ .अशोक गहलोत , भूपेंद्र हुडडा , मुकुल वासनिक और मधूसूदन मिस्त्री जैसे पुराने लोग हट जायेगें और वही बचेंगे जो लड़ पायेंगे . ये सच है कि देश में आज भी लोगों में कांग्रेस का आधार बचा हुआ है. अब भी उसके पास कम से कम तीन सरकारें तो है ही और आगे भी आ सकती है. ऐसे में पार्टी में कैडर का भरोसा बनाये रखना जरुरी है. पार्टी को नेगेटिव बातों से हटकर सारे कैडर को साथ लेकर और हर राज्य में किसी एक के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर काम करना होगा तो आगे जाकर कुछ तस्वीर बदल सकती है.<br />
एक बात जरुर याद रखें परिवर्तन ही संसार का नियम है कोई भी स्थाई नहीं है राजनीति में तो बिल्कुल भी नहीं इसलिए लंबी रणनीती पर काम हो और नयी लीड़रशिप बनायी जाये तो कुछ बदल सकता है.</p>
<p><strong>-संदीप सोनवलकर </strong></p>
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		<title>मराठा वोट बैंक अब बंट गया कई खानों में फायदा बीजेपी को मिलेगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Mar 2024 08:15:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>महाराष्ट्र बनने के बाद से ही राज्य की राजनीति को कंट्रोल करने वाले मराठा वोट बैंक में सेंध लग गयी है और अब मराठा वोटर इतना भ्रम में है कि उसे समझ नहीं आ रहा है कि नेताओं के साथ जाये या अलग से अपना भला सोचे . इसका सीधा फायदा बीजेपी को लोकसभा चुनाव में मिलेगा क्योंकि अब तक मराठा वोट परंपरागत तौर पर कांग्रेस या शरद पवार की एनसीपी के साथ ही रहा है लेकिन अब करीब 28 फीसदी ये वोट कई खानों में बंट गया है.</p>
<p>असल में बीजेपी का हमेशा से ये प्रयोग रहा है कि महाराष्ट्र में मराठों के मजबूत वर्चस्व को तोड़ने के लिए माधव फार्मूला यानि माली धनगर और वंजारी सारे ओबीसी को एक साथ लाया जाये और मराठा बनाम ओबीसी को तेज किया जाये जिससे मराठा अगर एक तरफ जायें तो पूरा ओबीसी बीजेपी के साथ आ जाये .इसका फायदा बीजेपी को 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में मिला भी लेकिन अब बीजेपी उससे एक कदम आगे बढ़ गयी है. राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि संघ की सलाह पर बीजेपी ने मराठा वोट बैंक को ही अब कई खानों में बांट दिया है. एकनाथ शिंदे के तौर पर मराठा सीएम बनाकर पहले तो शिवसेना का वोट बैंक तोड़ा फिर कुछ दिन बाद अजित पवार को लेकर शरद पवार के मराठा वोट बैंक में सेंध लगा दी.</p>
<p>इतना ही नहीं दूसरी तरफ जब मराठों ने अपने राजनीतिक वजूद की ताकत दिखाने के लिए मराठा आऱक्षण का आंदोलन शुरु किया तो पहले तो मराठों को कुनबी यानि ओबीसी और गैर कुनबी में बांट दिया . इस आंदोलन को लेकर मनोज जरांगे नाम का एक मराठा युवक बहुत लोकप्रिय हुआ उसके पीछे पूरा समाज खड़ा दिखाई दिया लेकिन सरकार ने उसकी कुछ मांगे मानी कुछ नहीं और आखिर में मराठा आरक्षण का केवल प्रस्ताव विधानसभा में पास कर दिया तो अगले ही दिन मनोज जरांगे को भी शब्दजाल में फंसा कर डिसक्रेडिट कर दिया . मजबूरन मनोज जरांगे को अपना आंदोलन बीच में ही छोड़ना पड़ा . इससे पूरा मराठा समाज निऱाश है .<br />
दूसरी तरफ छगन भुजबल की लीडरशिप में ओबीसी ने बिना कुछ हिंसा के अपना अधिकार बचाये ऱखने के लिए जमकर दवाब बनाया और सरकार को मजबूर किया कि वो मराठों को ओबीसी में शामिल करने के बजाय अलग से आरक्षण दे जबकि पचास प्रतिशत की सीमा के चलते जातिगत आधार पर अलग से ये आरक्षण देना कानूनी तौर पर नहीं टिकेगा . अब ओबीसी को संदेश साफ है कि इतना बड़ा आंदोलन करके भी मराठा समाज को कुछ नहीं मिला.</p>
<p>इस सबसे मराठा नेताओं को अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही है इसलिए वो मजबूरी में ही सही लेकिन किसी भी हालत में बीजेपी के साथ जाने तैयार नही है. उनका वोटर इसके लिए तैयार नहीं लेकिन नेताओं को खुद को बचाना है इसलिए वो बीजेपी के साथ जाकर मोदी लहर में ही जीतना चाहते हैं. कांग्रेस के अशोक चव्हाण जैसे दिग्गज नेता भी इस मोह से नहीं बच पाये और बीजेपी चले गये . और भी करीब 15 मराठा नेता एक एक करके बीजेपी का दामन थाम रहे हैं. उधर शरद पवार की ये आखिरी पारी है सो वो कितना मराठा वोट ले पायेंगे ये तो चुनाव में ही पता चल पायेगा लेकिन उनके ही परिवार में फूट पड़ गयी है . बेटी के खिलाफ ही पवार परिवार की बहू लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती है.</p>
<p>महाराष्ट्र के इतिहास पर नजर डालें तो मुगल काल और आदिलशाही में यही हुआ था मराठा अपने घर और वतनदारी को बचाने के लिए अलग अलग खेमें में बंटे हुए थे और बाहरी राज कर रहे थे तब सोलहवी सदी के अंत में मराठा छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठों के मतभेद खत्म कर एक साथ किया और स्वराज्य की बात की लेकिन अब इतिहास फिर से खुद को दोहरा रहा है. मराठा अब तक सत्ता पर हावी रहे हैं .एक या दो बार को छोड़कर मराठा ही मुखयमंत्री बनता है और राज्य की सहकारी चीनी मिलों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक पर उनका ही राज रहा है लेकिन अब ये पकड़ छूट रही है . अगर मराठों की राजनीतिक ताकत कम हुयी तो इसका खामियाजा पूरे समाज पर होगा .</p>
<p><strong>-संदीप सोनवलकर </strong></p>
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		<title>दोस्त दोस्त ना रहा .. क्यों भाग जाते हैं राहुल के दोस्त</title>
		<link>https://newsmantra.in/friends-are-no-longer-friends-why-do-rahuls-friends-run-away/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jan 2024 06:56:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
		<category><![CDATA[CONGRESS]]></category>
		<category><![CDATA[MILIND DEORA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>-संदीप सोनवलकर वरिष्ठ पत्रकार सन 2004 से ही राहुल गांधी के करीबी दोस्त रहे और कई बार राहुल को विदेशी विश्वविघालयों में लेक्चर के लिए साथ ले जाने वाले पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा अब उसी दिन पार्टी छोड़कर चले गये जिस दिन से राहुल गांधी असल में 2024 के लोकसभा...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>-संदीप सोनवलकर वरिष्ठ पत्रकार</strong><br />
सन 2004 से ही राहुल गांधी के करीबी दोस्त रहे और कई बार राहुल को विदेशी विश्वविघालयों में लेक्चर के लिए साथ ले जाने वाले पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा अब उसी दिन पार्टी छोड़कर चले गये जिस दिन से राहुल गांधी असल में 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रचार का शंखनाद भारत जोड़ों न्याय यात्रा 2.0 की शुरुआत मणिपुर से कर रहे थे .<br />
मिलिंद तो शुक्रवार को ही शामिल हो रहे थे लेकिन एन टाइम पर प्रोग्राम टाल दिया गया क्योंकि रणनीतिकारों ने तय किया कि कांग्रेस को ये झटका उसी समय दिया जाये जबकि राहुल की यात्रा की दूसरी शुरुआत हो रही . ताकि मीडिया को भी कांग्रेस की आलोचना करने का मौका मिल जाये. मिलिंद भी मजबूरी में ही सही इसके लिए तैयार हो गये और जाते जाते कह भी गये कि कांग्रेस में अब उनकी कोई नहीं सुनता ..हालांकि ये सवाल जरुर पूछा जाना चाहिये कि सन 2004 में पहली बार सांसद और उसके बादा 2009 से मंत्री बनने वाले मिलिंद ने राहुल गांधी के साथ ही संसदीय सफर शुरु किया था और राहुल के करीबी होने का खूब फायदा भी उठाया था . किसको इतनी कम उम्र में सांसद होने का फायदा मिलता है और मंत्रालय भी मिला. पिता मुरली देवड़ा तो खैर कारपोरेटर से सांसद और मंत्री तक गये मिलिंद को पिता के नाम के कारण ही सब कुछ मिला.<br />
इधर जब 2014 और 2019 की लगातार दो हार के बाद से ही मिलिंद के सुर बदल गये .वो दिल्ली से दूर हो गये और राहुल के साथ भी उनके विदेश दौरे कम हो गये .हालांकि मिलिंद को प्रोफेशनल कांग्रेस का सह प्रमुख बनाया गया था शशि थरुर के साथ लेकिन मिलिंद इससे खुश नहीं थे बाद में ट्रेजरर भी सह प्रमुख ही बनाया गया उसके बाद मिलिंद ने नागपुर में नेताओं से बात करने की कोशिश की लेकिन बहुत भाव नहीं मिला तभी 28 दिसंबर को मिलिंद ने तय कर लिया था कि अब यहां नहीं रहना .. अब वो एकनाथ शिंद के साथ चले गये हैं. मिलिंद को इसके पहले 2014 में ही अरुण जेटली जी ने बीजेपी आने का न्यौता दिया था और तब मिलिंद चले जाते तो बेहतर होता लेकिन राहुल की दोस्ती के चलते नहीं गये .<br />
अब सवाल यही उठता है कि ऐसा क्या होता है कि राहुल गांधी के ही सारे करीबी और दोस्त एक एक करके उनको छोड़ जाते है. क्या राहुल को दोस्तों की सही पहचान नहीं है या फिर राहुल तो सही है उनको दोस्त ही कुछ ज्यादा उम्मीद कर लेते हैं. चाहे ज्योतिरादित्य सिंधिया हो या जितिन प्रसाद या फिर आर पीएन सिंह या अब देवड़ा सब तो राहुल के खास रहे हैं एक और मित्र रणनीतिकार प्रशांत किशोर को भी राहुल ने खूब सिर चढाया था वो भी छोड़ गये . लोग कहते हैं कि राहुल जब किसी पर भरोसा करते हैं तो पूरा करते हैं लेकिन जब उनको लगता कि उनके इसी भरोसे पर कोई फायदा उठा रहा है या उनके नाम का दुरुपयोग कर रहा है तो वो उसे छोड़ देते हैं . कब ये पता ही नहीं चल पाता.<br />
एक वाकया मेरे सामने हुआ 2019 के चुनाव के पहले महाराष्ट्र के बड़े नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल जो उस समय विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी थे वो सीट बंटवारे से पहले दिल्ली गये थे .उनको अशोक चव्हाण खुद लेकर राहुल गांधी के पास गये . उस समय विखे पाटिल अपने बेटे सुजय विखे पाटिल के लिए अहमदनगर की लोकसभा सीट चाह रहे थे जबकि एनसीपी नेता शरद पवार अपनी व्यक्तिगत खुन्नस के चलते ये सीट नहीं छोड़ रहे थे . विखे पाटिल परिवार ने शरद पवार को एक कानूनी मामले में फँसाया था और उसके चलते शऱद पवार का राजनीतिक कैरियर तक दांव पर लग गया था. विखे पाटिल राहुल के सामने पहुंचे तो राहुल ने उनकी बात को बीच में ही काटते हुए कह दिय़ा कि शरद पवार की बात तो माननी ही होगी अगर आप अपने बेटे को लोकसभा टिकट दिलाना चाहते हैं तो एनसीपी से मैं बात कर सकता हूं . विखे पाटिल ने कहा कि उनके परिवार की राजनीति शरद पवार विरोधी है कैसे वो चले जाये तो राहुल ने कि फिर आप तय कर लें. विखे पाटिल भरे मन से बाहर आये अगले ही दिन बीजेपी चले गये .<br />
राहुल गांधी से उनके गोरखपुर दौरे में भी मैंने उनसे 2012 में यही सवाल पूछा था तो उन्होनें कहा था कि मुझे सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट ही नजर आता है ग्रे नहीं जबकि भारत की राजनीती में तो सब ग्रे हैं. यही राहुल की मुश्किल भी है . विदेशों में पढ़ाई और फाइनेंस सेक्टर में नौकरी का उन पर खूब असर हुआ वो सब कुछ साफ साफ देखना चाहते हैं और वो भरोसा जल्दी करते हैं और छोड़ते भी है.ये भारतीय राजनीति में बहुत कठिन हैं .यही सब उनके पिता राजीव गांधी के साथ भी होता था उनके कई मित्र साथ रहे और कठिन समय में छोड़ते चले गये . लेकिन सोनिया गांधी ने ये सीख लिया था इसलिए उन्होने ये गलती नही की . कांग्रेस में अपने कटटर विरोधी और साफगोई वाले लोगों को भी साधती रही , मनाती रही ,पद देती रही और यहां तक कि बिना मन के भी गुलाम नबी आजाद जैसों को बहुत ऊंचे पद तक ले गयी लेकिन राहुल नाराज हुये तो सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया .<br />
एक वाकया है कांग्रेस का दिल्ली के बुराड़ी में अधिवेशन चल रहा था तब अहमद पटेल जो तब सोनिया गांधी के सलाहकार थे वो मंच पर नहीं सामने आकर सोफे पर बैठ गये . तब राहुल की उनसे खटपट चल रही थी . सोनिया गांधी ने ये देखा तो राहुल को इशारा किया और राहुल से खुद जाने कहा .राहुल खुद जाकर हाथ पकड़कर अहमद पटेल को मंच पर लाये और पहली पंक्ति में बिठा दिया . ये तहजीब सोनिया गांधी को हमेशा सबसे ऊपर रखती रही . राहुल को अभी ये सब सीखने और खुद में बदलाव लाने की जरुरुत है लेकिन कहते हैं कि स्वभाव नहीं बदलता आदत बदल सकती है.<br />
अब भी कांग्रेस में राहुल के करीबी ही कई बार दखलंदाजी करते हैं . अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खऱगे को न चाहते हुए भी कई बार के सी वेणुगोपाल और राहुल के बाकी करीबियों की सुननी पड़ती है . खऱगे अब भी कई जगह मन से फैसले नहीं ले पाते और राहुल के करीबी गलत फैसले तक करा ले जाते हैं इसका असल महाराष्ट्र में तो खास तौर पर देखने मिलता है. जाहिर है लंबे समय तक पार्टी में ये सब अच्छा नहीं है. महाराष्ट्र में तो आने वाले समय में कम से कम 14 विधायक और कुछ बड़े नेता भी इसी लिए पलायन कर सकते क्योंकि राहुल उनकी सुनते नहीं और जिसकी सुनते हैं वो किसी और की नहीं सुनता .जाहिर है राहुल को तो पहले दोस्त सही चुनने होंगे और उन दोस्तों को पहले से ही सिर पर चढ़ाना बंद करना होगा और फिर अगर कुछ गलत भी हो तो बिना पता लगे साइडलाइन करना होगा ताकि पार्टी का नुकसान ना हो वरना ये दोस्तों के दोस्त ना रहने का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा .</p>
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		<title>सेमीफाइनल का होगा असर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से बदलेगी तस्वीर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Nov 2023 06:29:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लोग भले माने या माने या इसे खारिज करने की कोशिश करें लेकिन ये तय है कि तीन दिसंबर को पांच राज्यों के चुनावी परिणामों का दूरगामी असर होगा . सबसे बड़ा असर मनोबल पर होगा जीत हार से ज्यादा . कांग्रेस अगर तीन राज्य मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ और तेलंगाना...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लोग भले माने या माने या इसे खारिज करने की कोशिश करें लेकिन ये तय है कि तीन दिसंबर को पांच राज्यों के चुनावी परिणामों का दूरगामी असर होगा . सबसे बड़ा असर मनोबल पर होगा जीत हार से ज्यादा . कांग्रेस अगर तीन राज्य मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ और तेलंगाना जीत गयी तो वो देश में विरोधी मोर्चे इंडिया गठबंधन को लीड करने की दावेदार होगी वहीं बीजेपी जीती तो पार्टी में आयी सुस्ती हटेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा में फिर से बड़ी जीत का रास्ता तय होगा.</p>
<p>सबसे मजेदार चुनाव तेलंगाना को होगा क्योंकि कांग्रेस अगर जीत जाती है तो कर्नाटक के बाद दक्षिण का सबसे बड़ा उलटफेर होगा . इसके दो संदेश होंगे एक तो कांग्रेस की दक्षिण में दमदार वापसी का रास्ता खुलेगा दूसरा बीजेपी के दक्षिण का दरवाजा बंद हो सकता है. इसलिए पूरे चुनाव में बीजेपी का जोर इस बात पर रहा कि भले उसे सीट कम मिले लेकिन बीआरएस जीतना चाहिये कांग्रेस नहीं . राहुल गांधी ने इसका खुलासा भी किया कि बीजेपी के दो यार ओवेसी और केसीआर लेकिन चुनाव परिणाम के बाद सब भूल जायेगें .</p>
<p>उधर मध्यप्रदेश का चुनाव भी कम दिलचस्प नहीं है . अनुमान बता रहा है कि जीत का अंतर कांग्रेस और बीजेपी में दस से बारह सीटों का ही होगा यानि 2018 की तरह ही मामला फंस सकता है . पिछली बार 35 सीटें ऐसी थी जिन पर अंतर पांच हजार से कम वोटों का था इन्ही पर जोर दोनों ने लगाया है. इसके अलावा बीजेपी ने सांसदों और मंत्रियों को चुनाव में उतारकर चुनाव को उठा दिया है. कहा जा रहा है कि गुजरात की तरह ही बीजेपी एमपी को अपनी प्रयोगशाला मानती है और चुनाव जीतने के लिए सब कुछ किया गया है. कांग्रेस में तकलीफ ये कि कर्नाटक जीतने के बाद वो ओवर कांफिंडेस मे है इसलिए चुनाव पूरी तरह के कमलनाथ पर छोड़ दिया गया है और वो ही जीत हार के जिम्मेदार होंगे . ऐसे में खेल उलट भी सकता है.</p>
<p>छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल में मोर्चा संभालकर रखा है और वो जीत के करीब भी है लेकिन बीजेपी ने नक्सल बहुल इलाकों में पहले राउंड में बहुत मेहनत की और वहां बीजेपी को बीस में से 7 या आठ सीट मिल सकती है जबकि पिछली बार यहां 20 में 19 सीट कांग्रेस ले गयी थी ये अंतर भी जीत के मार्जिन को कम कर सकता है. दूसरी तरफ राजस्थान में भले ही अशोक गहलोत ने चुनाव ठीक से लड़ा है लेकिन ये इबारत साफ है कि कांग्रेस किसी भी हालत में 70 सीट से आगे नहीं जा रही है . गहलोत और सचिन पायलट की लड़ाई में हार कांग्रेस की ही होगी .</p>
<p>इन चुनाव परिणामो का असर राष्ट्रीय राजनीती पर जरुर होगा . इंडिया गठबंधन में कांग्रेस अभी किसी से बात नहीं कर रही है .अगर कांग्रेस तीन राज्य जीत गयी तो वो बारगेन करने की हालत में होगी अगर हारी तो झुककर काम करना होगा तब रीजनल पार्टियां हावी हो जायेगी साथ ही कांग्रेस के बहुत से नेता देशभर में इंतजार कर रहे हैं कांग्रेस हारी तो अगला प्रयोग महाराष्ट्र और कर्नाटक में जल्द हो सकता है. कांग्रेस अगर जीत गयी तो फिर देश की हवा पलटेगी और बीजेपी को अगला लोकसभा चुनाव कठिन होगा .यानि सेमीफाइनल जीत हार से ज्यादा मनोबल पर असर डालेगा .</p>
<p><strong>-संदीप सोनवलकर वरिष्ठ पत्रकार</strong></p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82/">सेमीफाइनल का होगा असर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से बदलेगी तस्वीर</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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		<title>Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel pays floral tribute to the late Mr. Dulari Lal Sinha</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jun 2023 04:01:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>Legislative Assembly Speaker, Cabinet Ministers, and various public representatives arrived at Bodra village to comfort the grieving family. Raipur 20 June 2023: Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel visited Bodra village in the Gurur development block of Balod district and paid floral tribute to the late Mr. Dulari Lal Sinha, the father...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>Legislative Assembly Speaker, Cabinet Ministers, and various public representatives arrived at Bodra village to comfort the grieving family.</p>
<p>Raipur 20 June 2023: Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel visited Bodra village in the Gurur development block of Balod district and paid floral tribute to the late Mr. Dulari Lal Sinha, the father of Sanjari Balod MLA Mrs. Sangeeta Sinha. He also conveyed his condolences to Mrs. Sangeeta Sinha and her family members.</p>
<p>Chief Minister Mr. Baghel praised the remarkable contributions of the late Mr. Dulari Lal Sinha in social service and public welfare. Expressing his deep condolences, Mr. Baghel stated that Mr.Sinha&#8217;s demise is an irreparable loss for the society. He offered comfort to the grieving family and prayed for their strength during this difficult time.</p>
<p>Legislative Assembly Speaker Dr. Charandas Mahant , Home Minister Mr. Tamradhwaj Sahu, Urban Administration Minister Dr. Shivkumar Dahariya, Women and Child Development Minister Mrs. Anila Bhediya, and various public representatives were present.</p>
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		<title>महाराष्ट्र में बीजेपी को बड़े चेहरों की तलाश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jun 2023 06:49:31 +0000</pubDate>
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<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b/">महाराष्ट्र में बीजेपी को बड़े चेहरों की तलाश</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="font-weight: 400;">लोकसभा की सीटों के हिसाब से महाराष्ट्र देश में उत्तरप्रदेश के बाद आता है और इसलिए भाजपा के रणनीतिकार यहां से अधिकतम सीट जीतने की कोशिश में लगे हैं. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष और सचिव विनोद तावड़े लगातार बड़े चेहरों की तलाश कर रहे हैं. पार्टी ने देश भर में कम से कम 50 ब्यूरोक्रेट और पार्टी के सीनियर मंत्रियों को जो अब तक चुनाव नहीं लड़े है उनको चुनना शुरु कर दिया है.</p>
<p style="font-weight: 400;">महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है . 2019 में बीजेपी शिवसेना ने मिलकर 48 में से 42 सीटें जीत ली थी लेकिन अब शिवसेना में फूट और महाविकास आघाड़ी के तीन दलों की एकजुटता के डर से बीजेपी ने इस बार कई नये चेहरे उतारने की तैयारी शुरु कर दी है . पार्टी अपने 22सांसदों में से कम से कम 8 को बदल सकती है. इसलिए पार्टी ने उन चेहरों पर बात करना शुरु कर दिया है जो नये हो लेकिन लोग उन्हें जानते हैं. सबसे पहला दांव पुराने रिटायर या वर्तमान सरकारी आईएएस और आईपीएस पर खेला जायेगा .महाराष्ट्र में अब तक तीन ऐसे सीनियर की तलाश हो चुकी है . उनसे पर्दे के पीछे से बात की जा रही है.</p>
<p style="font-weight: 400;">सबसे सीनियर और सरकार में इस समय नीति आयोग के साथ काम कर रहे प्रवीण परदेशी को विदर्भ की सीट से उतारा जा सकता है. प्रवीण परदेशी को दिल्ली के काम के बाद वापस लाया जा रहा है. परदेशी की ख्याति लातूर में भूकंप के दौरान बहुत बढिया काम करने की रही है वो मुख्य सचिव पद के भी दावेदार थे लेकिन चूक गये .अब वो राजनीती में हाथ आजमाना चाहते हे. दूसरे बड़े अफसर अभी की सरकार का वार रूम संभाल रहे और मुंबई नागपुर समृर्दि महामार्ग बनाने वाले राधेश्याम मोपलवार है जिन पर शिवसेना शिंदे गुट और बीजेपी दोनो की नजर लगी हुयी है उनको परभणी हिंगोली की सीट पर उतारा जा सकता है. मोपलवार जमीनी स्तर पर कई काम कर चुके है और मराठवाड़ा में पानी पंचायत का काम करवा चुके हैं.</p>
<p style="font-weight: 400;">तीसरे अफसर मुंबई पुलिस आयुक्त रह चुके परमवीर सिंह है जो अब बीजेपी के बहुत करीब है . पिछली सरकार में उनकी बड़े खराब तरीके से विदाई हुयी थी लेकिन अब उनको क्लीन चिट मिल चुकी है और उनका निलबंन भी खत्म हो चुका है . परमवीर महाराष्ट्र के बजाय हरियाणा या राजस्थान की किसी गूजर बहुल सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते है. बीजेपी पहले भी सरकारी अफसरों को टिकट देने का प्रयोग कर चुकी है, 2014 में मुंबई के सह पुलिस आयुक्त सत्यपाल मलिक इस्तीफा देकर चुनाव लड़े थे और जीतकर मंत्री भी बने . इस बार भी कम से कम छह पूर्व अफसर महाराष्ट्र के चुनाव लड़ना चाहते हैं. कहा तो ये भी जा रहा है कि विवादित अफसर समीर वानखेड़े ने भी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी थी लेकिन अभी वो फंसे हुये हैं.</p>
<p style="font-weight: 400;">इसके अलावा भाजपा महाराष्ट्र के दो सीनियर मंत्री जो अब तक राज्यसभा की राजनीति करते रहे है उनको लोकसभा लड़ने कह रही है. इनमे सबसे बड़ा नाम पीयूष गोयल का है जिनको मीरा भायंदर वाली सीट पर लड़ने कहा जा रहा है और वो जमीन तलाश रहे हैं. इनके अलावा प्रकाश जावड़ेकर भी अब राज्यसभा में नही है तो उनको चुनाव लड़ने कहा जा रहा है . साथ ही चर्चा ये भी है कि बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस को भी मुंबई की किसी लोकसभा सीट से उतारा जा सकता है. असल में बीजेपी को चिंता है कि इस बार चेहरे नहीं बदले तो मुश्किल हो सकती है .</p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>-संदीप सोनवलकर </strong></p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b/">महाराष्ट्र में बीजेपी को बड़े चेहरों की तलाश</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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		<title>मध्यप्रदेश में कुछ बड़ा होने वाला है .</title>
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		<dc:creator><![CDATA[News Mantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 May 2023 10:04:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कर्नाटक चुनाव का असर मध्यप्रदेश में दिखने लगा है . उमस के साथ ही राजनीतिक तापमान गर्माने लगा है . जानकारों का मानना है कि अगले पंद्रह दिन में मध्यप्रदेश की राजनीति में एक साथ कई धमाके हो सकते है. सबसे पहला धमाका तो बीजेपी में ही चर्चा में है...</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%b9/">मध्यप्रदेश में कुछ बड़ा होने वाला है .</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कर्नाटक चुनाव का असर मध्यप्रदेश में दिखने लगा है . उमस के साथ ही राजनीतिक तापमान गर्माने लगा है . जानकारों का मानना है कि अगले पंद्रह दिन में मध्यप्रदेश की राजनीति में एक साथ कई धमाके हो सकते है.<br />
सबसे पहला धमाका तो बीजेपी में ही चर्चा में है वो ये भाजपा के आंतरिक सर्वे ने पार्टी की नींद उड़ा दी है. सर्वे में सामने आया है कि मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लीडरशिप में चुनाव हुये तो 70 से 75 सीटें आयेंगी और पार्टी की हार बहुत खराब हो सकती है. यानि कर्नाटक की तरह ही एंटी इनकंबेंसी फैक्टर काम करने वाला है. शिवराज को जनवरी में ही हटाया जाना था लेकिन संघ के दवाब के चलते उनको कुछ महीने दिये गये तब शिवराज ने राज्यभर में विकास यात्रा की शुरुआत की लेकिन ये बुरी तरह फ्लाप रही . जिससे शिवराज का ग्राफ एकदम गिर गया है. अब चर्चा है कि शिवराज के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा को भी बदला जायेगा . दो दिन पहले ही बीजेपी के केन्द्रीय आब्जर्वर आकर बैठक भी कर चुके हैं.<br />
इसका असर भाजपा की खींचतान में भी दिख रहा है . बीजेपी नेताओं की चौकड़ी ने मिलकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है यहां तक कि बीजेपी सांसद के पी यादव ने तो सिंधिया को मूर्ख तक बोल दिया है. बात इतनी बिगड़ी कि सिंधिया को सार्वजनिक तौर पर मंच से माफी मांगते हुए कहना पड़ा कि जो हुआ उसके लिए माफ करें.<br />
असल में बीजेपी की चौकड़ी को लगता है कि कहीं सिंधिया को सीएम बनाकर भेज दिया गया तो उनकी दुकान बंद हो जायेगी इसलिए गुना ग्वालियर क्षेत्र के बीजेपी के नेता खबरें चलवा रहे है कि सिंधिया नाराज है और कांग्रेस वापस जा सकते हैं. सिंधिया को अगर सीएम बनाया गया तो चुनाव भी उनके नाम पर ही लड़ा जायेगा ये बीजेपी के पुराने नेताओँ के सहन नहीं हो रहा . इस तरह खुलकर बीजेपी के नेता आपस में भिड़ गये है. बीजेपी में अँदरखाने नये सीएम के लिए आदिवासी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी का नाम चल रहा है जो संघ की पसंद हैं.<br />
इस बीच कांग्रेस ने भी बीजेपी में चले गये विधायकों की वापसी की खबर को हवा देना शुरु कर दिया है . कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि सिंधिया खेमें के साथ गये 26 में से 13 विधायक जुलाई के सत्र के बाद वापस जायेगें. हालांकि सिंधिया के साथ गये 26 में से 19 विधायक ही वापस लौट पाये थे . असल में कर्नाटक की तरह का खेल मध्यप्रदेश में बस शुरु ही होने वाला है .</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संदीप सोनवलकर</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%b9/">मध्यप्रदेश में कुछ बड़ा होने वाला है .</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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		<title>Supreme Court stayed  Central Vista work</title>
		<link>https://newsmantra.in/supreme-court-stayed-central-vista-work/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Dec 2020 06:09:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
		<category><![CDATA[cenrtal wista]]></category>
		<category><![CDATA[court]]></category>
		<category><![CDATA[govt]]></category>
		<category><![CDATA[janpath]]></category>
		<category><![CDATA[MODI]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[sc]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>The Supreme Court instructed central govt  not to carry out any construction, demolition or translocation of trees at the site of the new parliament project  till the Supreme Court decides on petitions challenging the project.</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/supreme-court-stayed-central-vista-work/">Supreme Court stayed  Central Vista work</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>The Supreme Court instructed central govt  not to carry out any construction, demolition or translocation of trees at the site of the new parliament project  till the Supreme Court decides on petitions challenging the project.</p>
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<p>The court has, however, allowed the government to go ahead with the ground-breaking ceremony and complete the paperwork related to the project. The top court’s nod comes  before Prime Minister Narendra Modi is scheduled to lay the foundation stone for a new Parliament building that was proposed as part of the mega project on Thursday, December 10. The building is estimated to cost Rs 971 crore.</p>
<p>A bench of Justices AM Khanwilkar, Dinesh Maaheshwari and Sanjiv Khanna held a special hearing in the case &#8211; it has already reserved its verdict on the petitions against the project &#8211; and indicated their displeasure to Solicitor General Tushar Mehta at reports that the agencies had started work on the ground before their ruling.</p>
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<p>“It should not be a fait accompli presented to the court…. Stop at the foundation laying ceremony. Some deference must be shown to the court,” the bench observed.</p>
<p>Solicitor General Tushar Mehta told a bench headed by Justice A M Khanwilkar that there would be only foundation stone-laying ceremony, and no construction, demolition or felling of trees would be done for the project as of now.</p>
<p>The revamp, which was announced in September last year, envisages a new triangular Parliament building, with seating capacity for 900 to 1,200 MPs, that is targeted to be constructed by August, 2022 when the country will be celebrating its 75th Independence Day.</p>
<p>The common Central Secretariat is likely to be built by 2024.</p>
<p>Prime Minister Narendra Modi will lay the foundation stone on December 10 for the new Parliament building and the construction is expected to be completed by 2022 at an estimated cost of Rs 971 crore, Lok Sabha Speaker Om Birla had said on December 5.</p>
<p>The top court is seized of pleas which have raised questions over several aspects, including the environmental clearance granted to the project.</p>
<p>During the hearing conducted on Monday through video-conferencing, the bench asked Mehta to apprise it within five minutes about the government&#8217;s view on the issue of construction work for the project.</p>
<p>The bench observed that it would not allow construction or demolition till its decision on the pending pleas opposing the project.</p>
<p>The top court said the Centre can proceed with the requisite paperwork in the meantime.</p>
<p>On November 5, the apex court had reserved its verdict on a batch of pleas which have raised questions over the Centre&#8217;s ambitious Central Vista project, which covers three km stretch from Rashtrapati Bhavan to India Gate in Lutyens&#8217; Delhi.</p>
<p>The solicitor general had earlier argued in the top court that the project would &#8220;save money&#8221; which is paid as rent for housing central government ministries in the national capital.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>कौन बनेगा कांग्रेस का प्रमुख</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Aug 2020 06:02:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News Mantra: Exclusive]]></category>
		<category><![CDATA[CONGRESS]]></category>
		<category><![CDATA[mallikarjun kharge]]></category>
		<category><![CDATA[Mantra]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[RAHUL GANDHI]]></category>
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		<category><![CDATA[SONIA GANDHI]]></category>
		<category><![CDATA[sushil kumar shind e]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कौन बनेगा कांग्रेस का अध्यक्ष &#160; देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को नये अध्यक्ष की तलाश है ।ज्यादातर कांग्रेसी चाहते है कि गांधी परिवार की पार्टी की बागडोर सम्हाले लेकिन इस बार गांधी परिवार ने मन बना लिया है कि अध्यक्ष कोई गैर गांधी ही होगा । ऐसे में...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कौन बनेगा कांग्रेस का अध्यक्ष</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को नये अध्यक्ष की तलाश है ।ज्यादातर कांग्रेसी चाहते है कि गांधी परिवार की पार्टी की बागडोर सम्हाले लेकिन इस बार गांधी परिवार ने मन बना लिया है कि अध्यक्ष कोई गैर गांधी ही होगा । ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किसे अध्यक्ष बनाया जाए ।</p>
<p>पार्टी के दो पैमाने होंगे वरिष्ठता और निष्ठा । साथ ही पार्टी एक संदेश भी देना चाहेगी जिस पर कोई दलित ही खरा उतर सकता है। कांग्रेस पहले भी दलित सीताराम केसरी को अध्यक्ष बना चुकी है लेकिन केसरी तेज निकले और पीएम बनने का सपना देखने लगे थे ।</p>
<p>अगर इस कसौटी से देखा जाए तो पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और अभी महासचिव  मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों सबसे बेहतर साबित हो रहे है।।80 की उम्र के करीब होकर भी दोनों सक्रिय है और लॉयल भी।।तीसरा नाम मुकुल वासनिक का है लेकिन वो जूनियर होंगे और मुकुल के बनाने से कोई संदेश नही जाएगा ।</p>
<p>जानकारी है कि कांग्रेस अभी किसी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाएगी और वो ही दिसंबर में पार्टी के चुनाव कराएगा । अगर बिहार के नतीजे ठीक रहे तो राहुल फिर से अध्यक्ष बनेंगे अन्यथा गैर गांधी ही अध्यक्ष</p>
<p>बनेगा । गांधी परिवार का ये भी मानना है कि अभी लोकसभा चुनाव में चार साल है और आखिरी साल में ही गांधी परिवार बागडोर संभाले तब तक पार्टी को गैर गांधी को सौंपा जाये .</p>
<p>कांग्रेस ने 5 नामों पर विचार शुरू किया है और इनसे अलग अलग बात भी की है।।तीसरा नाम आनंद शर्मा है जो ब्राह्मण और तेजतर्रार है।।आनंद युथ कांग्रेस को सम्हाल चुके है लेकिन तुनकमिजाज है।बहुत तेज भी है और खुद को पीएम बनने लायक भी मानते है।।शायद यही चूक जाए,</p>
<p>संदीप सोनवलकर</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>चौथा नाम असम के पूर्व सीएम तरुण गोगोई का है।।इंदिरा गांधी ने बरुआ को अध्यक्ष बनाया था इन्होंने कहा था इंडिया इस इंदिरा ।। गोहोई बहुत लॉयल साबित होंगे पर हिंदी नही आती सो उत्तरभारत में किसी काम के नही ।उम्र के साथ साथ बीमार भी रहते है ।</p>
<p>अशोक गहलोत । राजस्थान के मुख्यमंत्री और 69 साल के गहलोत बहुत सक्रिय है। राजनीतिक रूप से मंझे और लॉयल भी। संगठन महामंत्री भी रहे है लेकिन अभी वो जयपुर नहीं छोड़ना चाहेंगे ।।</p>
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		<title>सुशांत केस में सबकी  राजनीती ,सब फायदा देख रहे हैं.</title>
		<link>https://newsmantra.in/sushant-case/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 13:24:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News Mantra: Exclusive]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[CONGRESS]]></category>
		<category><![CDATA[Mantra]]></category>
		<category><![CDATA[Mantra Special]]></category>
		<category><![CDATA[ncp]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[Shivsena]]></category>
		<category><![CDATA[SUSHAANTSINGH RAJPUT]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सुशांत केस में सबकी  राजनीती ,सब फायदा देख रहे हैं. संदीप सोनवलकर एक्टर सुशांत राजपूत की कथित आत्महत्या के मामले में एक नहीं कई राजनीतिक धारायें बह रही है . ये राजनीति किसी एक दल तक सीमित नहीं है बल्कि सबने उसका फायदा उठाया है. अब तो सुप्रीम कोर्ट ने...</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/sushant-case/">सुशांत केस में सबकी  राजनीती ,सब फायदा देख रहे हैं.</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>सुशांत केस में सबकी  राजनीती ,सब फायदा देख रहे हैं.</p>
<p>संदीप सोनवलकर</p>
<p>एक्टर सुशांत राजपूत की कथित आत्महत्या के मामले में एक नहीं कई राजनीतिक धारायें बह रही है . ये राजनीति किसी एक दल तक सीमित नहीं है बल्कि सबने उसका फायदा उठाया है. अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई जांच का आदेश दे दिया तो राजनीती और गहरा गयी है.</p>
<p>दलगत राजनीती..</p>
<p>सुशांत केस में पहला एंगल दलगत राजनीती का है. सत्ता से बेदखल हो चुकी बीजेपी महाराष्ट्र में किसी तरह से सरकार को घेरना चाहती है. इसलिए पार्टी और उसके प्रवक्ता लगातार मीडिया के जरिये उसे उठा रहे हैं. बीजेपी को लगता है कि इस बहाने एक तरफ वो ठाकरे परिवार को निशाना बना सकती है वहीं दूसरी तरफ तीन दलों की सरकार में दरार लाने की कोशिश भी बीजेपी की है क्योंकि मुख्यमंत्री के बेटे का नाम आ रहा है वहीं एनसीपी का गृहमंत्री है. बस उसमें बीजेपी चूक गयी कि शरद पवार किसी तरह नहीं डर रहे वो तो अपने पोते के साथ भी नहीं गये .</p>
<p>आदित्य बनाम पार्थ .</p>
<p>इस खेल में शरद  पवार के भतीजे पार्थ पवार भी कूद गये क्योंकि उनकी आदित्य पवार से पुरानी दुश्मनी है . पार्थ ने 2019 का चुनाव लडा था तो आदित्य ने पुरानी दोस्ती नहीं निभाई और पार्थ को शिवसेना उम्मीदवार ने हरा दिया . आदित्य और पार्थ दोनों दोस्त थे दोनों साथ पार्टी करते थे . चुनाव में आदित्य के करीबी लोगों ने पार्थ की पार्टी करते हुए फोटो जारी कर दी थी जिसके जवाब में पार्थ ने भी आदित्य की फोटो जारी कर दी जिससे दूरियां और बढ गयी .</p>
<p>बिहार बनाम महाराष्ट्र</p>
<p>महाराषट्र चुनाव में बिहारियो का मुददा उठता रहा है ये पहला मौका जब बिहार चुनाव में महाराष्ट्र सरकार का मुददा भी उठ रहा है . असल में वो इसलिए क्योंकि शिवसेना इस बार सरकार की मुखिया है. बीजेपी और जेडीयू को लगता है इसी बहाने राजपूत वोट बैंक एकजुट हो सकता है . शिवसेना  और एनसीपी ने तो खुलकर आरोप भी लगाया है.</p>
<p>बालीवुड की राजनीती .</p>
<p>इस मामले में बालीवुड के गुट भी आपस में राजनीती कर एक दूसरे पर कीचड उछाल रहे हैं .कंगना रानाउत सबसे आगे और है इसी बहाने कंगना ने कई बडे फिल्मकारो से अपना हिसाब चुकता कर लिया है .बहस नेपोटिज्म से लेकर आगे तक गयी . .</p>
<p>सबकी अपनी राजनीती और सबसे अपने चूल्हे हैं जाहिर है कौन नहीं चाहेगा कि उसकी रोटी पक जाये और उसको फायदा हो जाये. बात तो तब है जब सचमुच सीबीआई जांच से कुछ निकले .</p>
<p>&nbsp;</p>
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