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	<title>HINDI DIWAS - newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</title>
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	<title>HINDI DIWAS - newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</title>
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		<title>देश की एकता का सूत्रधार है हिंदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Sep 2025 16:44:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News Mantra: Exclusive]]></category>
		<category><![CDATA[HINDI DIWAS]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी दिवस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देश की एकता और अखंडता की भाषा है हिंदी हिंदी दिवस पर विशेष आलेख हिंदी को संवैधानिक रूप से भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकृति प्राप्त है। आज़ादी के पश्चात सन् 1950 ई॰ में भारतीय संविधान ने इसे राजभाषा के रूप में दर्जा दिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ही...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>देश की एकता और अखंडता की भाषा है हिंदी</strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>हिंदी दिवस पर विशेष आलेख</strong></p>
<p>हिंदी को संवैधानिक रूप से भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकृति प्राप्त है। आज़ादी के पश्चात सन् 1950 ई॰ में भारतीय संविधान ने इसे राजभाषा के रूप में दर्जा दिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ही भारत में हिंदी को राजभाषा बनाने की आवाज मुखर रूप से सुनाई देने लगी थी लेकिन इसमें देश की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता का ध्यान रखना भी तत्कालीन दौर में नई आजादी मिले देश के लिए गंभीर विषय था। परिणामस्वरूप स्वतंत्र भारत की संविधान सभा में 12 सितंबर 1949 से राजभाषा से संबंधित विवेचना शुरू हुई तथा कुल 324 सदस्यों में से 312 सदस्यों द्वारा संघ की राजभाषा हिंदी और देवनागरी लिपि के रूप में पारित हो गई।</p>
<p>हिंदी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। संस्कृत और हिंदी भाषा के रिश्ते को माँ-बेटी के रिश्ते के समान माना जाता है। भक्ति आन्दोलन (14वीं-17वीं सदी) के दौरान कबीर, तुलसीदास, सूरदास जैसे संतों ने हिंदी को जन-जन की भाषा के रूप में प्रचलित किया। हिंदी भाषा ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ आन्दोलन चलाने तथा जन-जन को जागृत करने के लिए भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं ने हिंदी को ही महत्वपूर्ण माना। यहाँ तक कि हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने कहा था, “हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा बन सकती है।” जन-जन तक अपने विचार पहुंचाने के लिए हिंदी अखबार सफल संसाधन के रूप में उभरे। हमारे देश के क्रांतिकारी कवियों और लेखकों ने लोगों में एकता एवं देशभक्ति जागृत करने के लिए हिंदी भाषा को सार्थक और सहज के साथ जनव्यापी समझा। ऐसा इसलिए था क्योंकि उस वक़्त हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा थी जो सारे देश के लोगों को एक सूत्र में बांधती थी | भारत के ज्यादातर लोग हिंदी समझ सकते थे और आज भी यह तर्क यथावत लागू होता हैं |</p>
<p>राष्ट्रीय एकता में हिंदी की अहम् भूमिका हमेशा से ही रही हैं। वर्तमान समय में हिंदी भाषा भारत के 11 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की आधिकारिक भाषा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, लगभग 52.8 करोड़ लोग अर्थात 43.63 प्रतिशत हिंदी को मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। हिंदी भाषा की अन्य बोलियों जैसे भोजपुरी, अवधी, ब्रज, राजस्थानी आदि जोड़ने पर संख्या 57 प्रतिशत से अधिक हैं। भारत के 75 प्रतिशत विद्यालयों में हिंदी भाषा विषय के रूप में पढ़ाई जाती हैं। एनसीआरटी एवं सीबीएसई की कक्षाओं में हिंदी का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर समानता और एकरूपता का मानक स्थापित करते हैं। 40 प्रतिशत से अधिक समाचार पत्र हिंदी भाषा में प्रकाशित होते हैं |</p>
<p>वैश्विक स्तर पर भी हिंदी सक्रिय रूप से अपनी पहचान लगातार बनाने में सफल रही है। सुदूर देश मॉरीशस में हिंदी आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित है तथा वहाँ की 70 प्रतिशत आबादी भारतीय है। यहाँ तक कि फिजी में संसद के आधिकारिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग होता है। हिंदी साहित्य एवं संगीत की झलक सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो में आज भी देखने को मिलती हैं। सबसे तेज़ी से स्वीकार्य और बढ़ने वाली भाषा फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम पर हिंदी ही हैं। वर्तमान दौर में हिंदी गानों और अन्य सामग्रियों को सबसे अधिक यूट्यूब पर देखा जाता है। बॉलीवुड फिल्मों, गानों, योग और साहित्य ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाई है। शिक्षा के क्षेत्र में भी हिंदी भाषा पीछे नहीं रही। विश्वभर में करीब 170 से अधिक विश्वविद्यालयों (रूस, जापान, जर्मनी, अमेरिका, कोरिया आदि) में हिंदी पढ़ाई जाती है। ऑक्सफ़ोर्ड, कैम्ब्रिज और हावर्ड जैसे प्रतिष्ठित और पुराने विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा विभाग सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। हिंदी भाषा एक ऐसी भाषा हैं जो राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को सक्रिय रूप से मजबूती प्रदान करती हैं।</p>
<p>परंतु कई प्रश्न भी उठते हैं कि जहाँ हिंदी भाषा को विश्व स्तर पर अधिक सम्मान मिल रहा हैं वही दूसरी ओर हमारे ही देश में क्या सही मायनों में हिंदी को व्यापक सम्मान मिल रहा है? जिस भाषा के माध्यम से हमें आज़ादी मिली उसी भाषा को लोग अब बहिष्कृत और तिरस्कृत करने लगे हैं। हास्यास्पद यह हैं कि आज कल कई लोग अपनी ही मातृभाषा हिंदी में बात करने को अपमान मानते हैं तथा हिचकते हैं। वें समझते हैं कि हिंदी भाषा में बात करने से उनका स्तर नीचे हो जाएगा या उन्हें दोयम नजर से देखा जाएगा। गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों में इसका महत्त्व कुछ अभिभावकों द्वारा समझा तो जा रहा हैं परंतु कई विद्यालयों में इसे केवल एक विषय के रूप में ही लिया जाता है, जिसे माना जाता हैं कि आगे जाकर उच्च शिक्षा के लिए यह विषय उपयोगी नहीं है। जबकि हिंदी किसी भी अन्य विषय से कहीं भी कम नहीं है। यह रोजगारपरक विषय है और इसे भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर पर उसी सम्मान के नजर से देखने की आवश्यकता है। केंद्र की वर्तमान सरकार ने हिंदी को लेकर बेहद ही सार्थक पहल की थी लेकिन आज भी संगोष्ठियों और भाषणों से बाहर यह धरातल पर उतनी कारगर नहीं हो सकी है। हिंदी को बोलना जितना आसान है उतना ही शुद्ध हिंदी लिखना और बोलना कठिन कृत्य है लेकिन कई बार हिंदी को बेहद आसान समझ लिया जाता है और व्याकरण की समझ के बगैर इसके इस्तेमाल से हिंदी का अपभ्रंश कर दिया जाता है जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा भी मंडराने लगता है। यह एक विडंबना ही हैं कि आज़ादी के पश्चात जहाँ हिंदी भाषा को सम्मान मिलना चाहिए था वहीं वह अपने अस्तित्व के लिए अपने ही उद्भव स्थल में जूझ रही है। कई राज्यों में तो हिंदी बोलने पर ही विरोध किया जा रहा है जो अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। आखिर हिंदी को सही रूप से अपने ही देश में सम्मान और वाजिब दर्जा कब मिलेगा तथा सही अधिकार कब मिलेंगे? ऐसे यक्ष प्रश्न मन में उभरते हैं। जिस हिंदी भाषा ने आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी उसका सम्मान हमें करना चाहिए तथा हिंदी भाषा के महत्त्व को समझना चाहिए एवं इसकी उन्नति के लिए सदा अग्रसर रहना चाहिए। यही भाषा हैं जो हर भारतीय को आपस में एकता के रूप में जोड़ती है और उनमें आत्मीयता का संचार करती है।</p>
<p><strong>मोनिका त्रिवेदी</strong></p>
<p><strong>(लेखिका मंजुश्री पब्लिक स्कूल, सिक्किम में हिंदी की अध्यापिका हैं)</strong></p>
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		<title>एनटीपीसी बोंगाईगांव के कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता और हिंदी दिवस की शपथ ली गई।</title>
		<link>https://newsmantra.in/ntpc-bongaigaon-hindi-diwas/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Sep 2024 05:59:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PSU Mantra]]></category>
		<category><![CDATA[HINDI DIWAS]]></category>
		<category><![CDATA[NTPC Bongaigaon]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एनटीपीसी बोंगाईगांव में 14 सितंबर 2024 को हिन्दी दिवस मनाया गया। समारोह के शुरुआत श्री देवव्रत कर, महाप्रबंधक (ओएंडएम) द्वारा कर्मचारियों को हिन्दी के प्रयोग की शपथ दिला कर किया किया गया। हिन्दी दिवस पर अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पूर्वी क्षेत्र II) एवं परियोजना प्रमुख, बोंगाईगांव द्वारा...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>एनटीपीसी बोंगाईगांव में 14 सितंबर 2024 को हिन्दी दिवस मनाया गया। समारोह के शुरुआत श्री देवव्रत कर, महाप्रबंधक (ओएंडएम) द्वारा कर्मचारियों को हिन्दी के प्रयोग की शपथ दिला कर किया किया गया। हिन्दी दिवस पर अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पूर्वी क्षेत्र II) एवं परियोजना प्रमुख, बोंगाईगांव द्वारा जारी किए गए संदेशों को प्रदर्शित किया गया।।</p>
<p>इसके पश्चात एनटीपीसी बोंगाईगांव के कर्मचारियों द्वारा राजभाषा हिन्दी पर लघु-प्रस्तुतियाँ दी गईं। श्री ओंकार नाथ, अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) ने इस अवसर पर राजभाषा हिन्दी के संवैधानिक दर्जे पर प्रकाश डाला और सरकारी उपक्रमों में हिन्दी के प्रयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। श्री देवव्रत कर, महाप्रबंधक (ओएंडएम) ने हिन्दी की व्यापकता पर ध्यान आकर्षित करते हुये कर्मचारियों से हिन्दी का दैनिक जीवन एवं कार्यालय में अधिकाधिक उपयोग करने की अपील की। समारोह में श्री आशुतोष बिस्वास, महाप्रबंधक (परिचालन) एवं सभी विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।</p>
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		<title>जनभाषा के रूप में स्वीकार्यता को फाइलों में जद्दोजहद करती हिंदी</title>
		<link>https://newsmantra.in/hindi-diwas-14-september/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Sep 2024 08:42:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Research and Education]]></category>
		<category><![CDATA[14 september]]></category>
		<category><![CDATA[HINDI DIWAS]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मोनिका त्रिवेदी लेखिका ताकत्सी इंटरनेशनल स्कूल, सिक्किम की हिन्दी अध्यापिका हैं हिंदी को केवल पखवाड़ा और दिवस के रूप में न रखें सीमित हिंदी दिवस &#8211; 14 सितंबर यह वह दिन है जब संविधान में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मोनिका त्रिवेदी</strong><br />
लेखिका ताकत्सी इंटरनेशनल स्कूल, सिक्किम की हिन्दी अध्यापिका हैं</p>
<p><strong>हिंदी को केवल पखवाड़ा और दिवस के रूप में न रखें सीमित</strong></p>
<p><strong>हिंदी दिवस &#8211; 14 सितंबर</strong> यह वह दिन है जब संविधान में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी पखवाड़ा या हिंदी मास के रूप में इसे मनाने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। कैसी विडंबना है कि जो भाषा संविधान द्वारा स्वीकृत है, जो देश के राजकीय कार्यों और न्यायालयों में प्रयुक्त होती है, जो शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संवाद की भाषा है और जो राष्ट्रीय नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्यवहार की भाषा है, उसे कुछ दिनों, सप्ताह या महीनों तक सीमित कर दिया जाता है। आजादी प्राप्ति के साथ ही हिंदी को राजभाषा बनाने की माँग देश के हर कोने से उठने लगी थी। परिणामस्वरूप, स्वतंत्र भारत की संविधान सभा में 12 सितंबर 1949 से राजभाषा संबंधी चर्चा शुरू हुई और 14 सितंबर को गोपाल स्वामी अय्यंगर द्वारा प्रस्तुत राजभाषा प्रस्ताव को सभा के 324 सदस्यों में से 312 सदस्यों ने समर्थन दिया, जिसके बाद हिंदी को संघ की राजभाषा और देवनागरी लिपि के रूप में स्वीकार कर लिया गया।</p>
<p>हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार करने के कई महत्वपूर्ण कारण थे। वास्तव में, हिंदी का विस्तार भारत की अन्य भाषाओं की तुलना में काफी व्यापक रहा है। यही वजह है कि गुलाम भारत को आजादी के लिए प्रेरित करने और एकजुट करने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हमारे देश में भाषाई चेतना हमेशा से ही मुक्ति चेतना के अंग के रूप में विकसित होती रही है। &#8216;भारत माता&#8217; और &#8216;वंदे मातरम्&#8217; दोनों ही बंगाल की देन हैं। भारत के आधुनिक नवजागरण के अग्रदूत राजा राम मोहन राय को अखिल भारतीय भाषा की तलाश थी, जो विशाल राष्ट्र के लिए उपयुक्त हो। इसी कारण उन्होंने 1826 में कोलकाता से &#8216;बंगदूत&#8217; नामक साप्ताहिक पत्र निकाला, जिसमें हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। रामकृष्ण परमहंस और उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद भी अपने प्रवचनों में हिंदी का प्रयोग करते थे। लेकिन राष्ट्रभाषा की यह चेतना सबसे पहले ब्रह्म समाज के प्रखर नेता केशवचंद्र सेन में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई। उन्होंने ही स्वामी दयानंद सरस्वती, जो स्वयं गुजरात से थे, को &#8216;सत्यार्थ प्रकाश&#8217; संस्कृत में न लिखकर जनभाषा हिंदी में लिखने की सलाह दी। स्वामी दयानंद ने देश-विदेश में हिंदी का प्रचार किया और हिंदी माध्यम के आर्य विद्यालयों की स्थापना कर राष्ट्रभाषा हिंदी का प्रथम चरण पूरा किया।</p>
<p>कांग्रेस की स्थापना (1885) के बाद भारतीय चिंतन में आकार ले चुकी स्वतंत्र राष्ट्र और राष्ट्रभाषा हिंदी की अवधारणा को मूर्त रूप दिया गया। लोकमान्य तिलक हिंदी को उसी रूप में भारत की राष्ट्रभाषा मानते थे, जैसे उन्होंने स्वतंत्रता को हमारा जन्मसिद्ध अधिकार बताया था। गांधीजी के लिए हिंदी-सेवा देश की स्वतंत्र आत्मा के साक्षात्कार की साधना थी। आजाद हिंद फौज ने भी अपने कौमी तराने के लिए हिंदी को ही चुना। हिंदी का विकास वास्तव में भारत के पुनर्जागरण का इतिहास है। इसकी वाणी ने कुलीनता के द्वार पर दस्तक दी। दमन, शोषण और उपेक्षा की घाटियों और वीरानों से इसे गुजरना पड़ा, पर हर कठिनाई ने इसे नई ऊर्जा दी और यह &#8216;बहता नीर&#8217; बनती गई। इस जनगंगा के तट पर देशभर के संतों ने साहित्य साधना की, समाज सुधारकों ने अपनी योजनाएँ बनाई, और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे ससम्मान अपनाया। यह खुसरो-जायसी, रहीम-रसखान, कबीर-रैदास और तुलसी-सूर की भाषा है। इसे कभी राजाश्रय नहीं मिला, यह तो जन-जन के मन में समाई हुई है। संविधान की स्वीकृति के बाद हिंदी का भी वही हाल हुआ। वह षड्यंत्रों और राजनीतिक चालों का शिकार बनी। राज की मूल में सत्ता है, और जहाँ सत्ता है, वहाँ चालें खेली जाती हैं।</p>
<p>हिंदी अंग्रेजी के कुचक्र में उलझी हुई है, और उसका संघर्ष भी हिंदी से अलग नहीं रहा है। हमें इससे सीख लेनी चाहिए। इंग्लैंड की अत्यंत प्राचीन भाषा और आज के विश्व की सर्वाधिक समृद्ध भाषाओं में से एक अंग्रेजी का सितारा भी 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अस्त हो गया था, जब इंग्लैंड के तत्कालीन शासक हेराल्ड को पराजित कर नार्मन्स नायक ड्यूक ऑफ विलियम्स ने इंग्लैंड पर अधिकार कर लिया। नार्मन्स की भाषा फ्रेंच का प्रभुत्व इंग्लैंड पर छा गया। शासन, शिक्षा और इंग्लैंड के अभिजात्य वर्ग की भाषा फ्रेंच हो गई। स्वयं को शिक्षित कहलाने वाले लोग फ्रेंच का ही प्रयोग करने लगे; अंग्रेजी जानते हुए भी, अंग्रेजी बोलना अपनी शान के खिलाफ समझा जाता था, जैसे आज भारत का प्रबुद्ध वर्ग हिंदी बोलने को समझता है।</p>
<p>अंग्रेज़ी केवल अशिक्षितों और मजदूरों की भाषा बनकर रह गई। लेकिन 1337-1453 तक चले इंग्लैंड और फ्रांस के बीच युद्ध के कारण फ्रेंच जाति, भाषा और संस्कृति के प्रति विद्रोह की भावना पनपने लगी और अंग्रेज़ी का वर्चस्व बढ़ने लगा। धीरे-धीरे न्यायालयों और शिक्षा के क्षेत्र में अंग्रेज़ी को पुनः प्रवेश मिला। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकों के प्रकाशन में सबसे बड़ी समस्या शब्द-संपदा की कमी थी। कहा जाता है कि प्रशासनिक शब्दावली में अंग्रेज़ों के पास केवल दो शब्द थे &#8211; &#8220;किंग&#8221; और &#8220;क्वीन&#8221;। बाकी के जैसे &#8220;गवर्नमेंट&#8221;, &#8220;काउंसिल&#8221;, &#8220;पार्लियामेंट&#8221;, &#8220;क्राउन&#8221;, &#8220;काउंट&#8221; आदि अनेक शब्द फ्रेंच से आयातित थे। यही हाल कानून, कला, साहित्य, न्यायालय आदि शब्दावली के साथ भी था। विदेशी भाषा के शब्दों को अपनाने में अपनी भाषा की शुद्धता का भी प्रश्न था, परंतु 1775 में जॉनसन द्वारा प्रकाशित &#8220;ए डिक्शनरी ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज&#8221; में उन सभी शब्दों को सम्मिलित कर लिया गया, जो अंग्रेज़ी में प्रयोग किए जा सकते थे, और उन पर अंग्रेज़ी की मुहर लगा दी।</p>
<p>भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता की समस्या दूर होते ही बाकी सभी समस्याएं स्वतः समाप्त हो गईं। कहा जाता है कि जानसन के उस शब्दकोश में अंग्रेज़ी के केवल 15% शब्द ही मूल रूप से अंग्रेज़ी थे। हिंदी के साथ भी यही समस्या हो रही है। कई बार अंग्रेजी के शब्दों और अभिव्यक्तियों का हिंदी में अनुवाद करते समय सटीकता की कमी हो जाती है और शब्द हास्यास्पद भी बन जाते हैं । अंग्रेज़ी के जैसे &#8220;Good Morning”, “Good afternoon&#8221;, &#8220;Good evening&#8221;, और &#8220;Good night&#8221; के लिए हिंदी में &#8220;शुभ प्रभात, शुभ अपराह्न&#8221;, &#8220;शुभ संध्या&#8221;, और &#8220;शुभ रात्रि&#8221; जैसे शब्दों को उपयोग किया जाता है, लेकिन ये अनुवाद बहुत औपचारिक और कभी-कभी कृत्रिम लगते हैं। हिंदी में &#8220;नमस्ते&#8221;, &#8220;नमस्कार&#8221; या &#8220;प्रणाम&#8221; जैसे पारंपरिक अभिवादनों का प्रयोग आमतौर पर अधिक स्वाभाविक और उपयुक्त होता है। कुछ शब्दों का अनुवाद ऐसे प्रतीत होता है जैसे शब्द गढ़ने की कसरत की गई हो। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकों के लिए भी हम अपनी भाषा की शब्द-संपदा के व्यवहारीकरण का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p>शासक तथा अभिजात्य वर्ग की हिंदी के प्रति उपेक्षा हिंदी के विकास में सबसे बड़ी बाधा रही है। इस तरह संविधान की स्वीकृति के बावजूद हिंदी भारत की राजभाषा बनी, कहना संदेहास्पद है; पर इतना निश्चित कहा जा सकता है कि हिंदी देश की राष्ट्रभाषा है। देश के किसी भी कोने में जाएं, विचार-विमर्श के लिए आपको हिंदी की स्नेहिल छांव में ही आना पड़ेगा। देश-विदेश की विभिन्न भाषाओं के संपर्क में आने और अपनाने के कारण हिंदी आज फल-फूल रही है, लेकिन इसका और भी विकास होना आवश्यक है।</p>
<p>लोग हिंदी को बोल-चाल में अपना रहे हैं, पर दिल से अभी भी पूरी तरह से नहीं अपना रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को यह समझ आ गई है कि किसी ब्रांड को अखिल भारतीय बाजार देने के लिए हिंदी को अपनाना अनिवार्य है। प्रिंट मीडिया ने इसे राष्ट्रीयता दी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इसे वैश्विक बना दिया। हिंदी आजकल विभिन्न रूपों में मौजूद है। हर भाषा के चैनलों में हिंदी का मिश्रण हो रहा हैं। यहाँ तक कि हिंदी में भी हिंग्लिश शब्दों का प्रयोग हो रहा हैं। मानकीकरण की बाद में देखी जाएगी, फिलहाल तो ऐसा ही चलेगा। हिंदी भाषा सबसे आसान, इसे अपनाना ही है हमारी शान। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के लिए जो स्थान निर्धारित की गयी है वो और भी महत्वपूर्ण बनकर उभरे ताकि हिंदी को उसका सम्मान हिंदीभाषियों के बीच वापस से पनप सकें।</p>
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		<title>सरकारी कामकाज में हिंदी का हो सर्वाधिक प्रयोग</title>
		<link>https://newsmantra.in/hindi-should-be-used-more-in-government-work/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Sep 2023 10:32:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government- press- release]]></category>
		<category><![CDATA[Govt. Mantra]]></category>
		<category><![CDATA[HINDI DIWAS]]></category>
		<category><![CDATA[Press Information Bureau]]></category>
		<category><![CDATA[सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना। हिंदी दिवस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) और केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवारा का शुभारंभ गुरुवार को कर्पूरी ठाकुर सदन में पीआईबी के अपर महानिदेशक एसके मालवीय, साहित्यकार शिवदयाल, पीआईबी के निदेशक आशीष एके लाकरा और सीबीसी के प्रमुख...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना।</strong> हिंदी दिवस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) और केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवारा का शुभारंभ गुरुवार को कर्पूरी ठाकुर सदन में पीआईबी के अपर महानिदेशक एसके मालवीय, साहित्यकार शिवदयाल, पीआईबी के निदेशक आशीष एके लाकरा और सीबीसी के प्रमुख एवं उपनिदेशक संजय कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।</p>
<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पीआईबी-सीबीसी के अपर महानिदेशक एसके मालवीय ने कहा कि हिंदी पूरे हिंदुस्तान की भाषा है। सरकारी कामकाज में हिंदी का सर्वाधिक प्रयोग होना चाहिए। हमें कम से कम अपना हस्ताक्षर हिंदी में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंगेजी एक विशेष वर्ग की भाषा बनी हुई है जो हमें भाषायी गुलाम बनाये हुए हैं। इससे बाहर निकलने की जरूरत है। श्री मालवीय ने कहा कि कई देशों में वहां की मातृभाषा राष्ट्रभाषा है। हमें भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए, क्योंकि हिंदी हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा बोली और समझी जाती है।</p>
<p>कार्यक्रम के मुख्य वक्ता साहित्यकार शिवदयाल ने कहा कि हिंदी के प्रयोग को लेकर हमें अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। आजादी के 75 साल बाद भी हम आज हिंदी के प्रयोग की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को प्राथमिकता दी गई है। यह एक अच्छी पहल है, यह हमें अंग्रेजी भाषा की मानसिक गुलामी से मुक्ति दिलाएगी। साथ ही, आने वाली पीढ़ी को भी इससे फायदा होगा। उन्होंने कहा कि जहां तक सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग की बात है, तो यह हिंदी भाषी क्षेत्रों में हो ही रहा है। हमें अहिंदी क्षेत्रों में पहल और तेज करने की जरूरत है, क्योंकि हिंदी पूरे देश में बोली और समझी जाती है।</p>
<p>पीआईबी के निदेशक आशीष एके लाकरा ने अपने संबोधन में कहा कि अहिंदी क्षेत्रों में संचार के लिए हिंदी के प्रयोग पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सेवा में देशभर में तबादले होते रहते हैं, ऐसे में अहिंदी क्षेत्र में संचार के लिए अधिकारी और सहयोगी आपस में हिंदी भाषा में ही संपर्क करते हैं। हालांकि वह टूटी-फूटी होती है। जरूरत है अहिंदी भाषी अधिकारी व सहयोगियों के बीच हिंदी के प्रचार-प्रसार की। सीबीसी पटना के प्रमुख एवं उपनिदेशक संजय कुमार ने कहा कि संविधान सभा ने लंबी चर्चा के बाद 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा स्वीकारा था। इसके बाद संविधान के अनुच्छेद-343 से 351 तक राजभाषा के संबंध में व्यवस्था की गयी। इस स्मृति को याद रखने और हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों एवं कार्यालय सहयोगियों के बीच एक पखवारे तक हिंदी को सरकारी कामकाज में बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।</p>
<p>मौके पर सीबीसी पटना के कार्यक्रम प्रमुख पवन कुमार सिन्हा ने कहा कि हिंदी संपर्क भाषा है और इसे बनाने में हिंदी फिल्म, साहित्य और टीवी की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि हिंदी बहुत आगे निकल चुकी है। इसका प्रयोग विश्वव्यापी और ठीक-ठाक हो रहा है। दक्षिण और उत्तर-पूर्व में हिंदी लोग बोलते और समझते हैं। जरूरत है इसे और सबल बनाने की। इस अवसर पर कई अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये।</p>
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		<title>हिंदी बने देश की भाषा, अमित शाह</title>
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		<pubDate>Sat, 14 Sep 2019 08:40:18 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[AMIT SHAH]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शनिवार को हिंदी दिवस (Hindi Diwas) के अवसर पर देश को शुभकानाएं दी और हिंदी का इस्‍तेमाल अधिक से अधिक करने पर जोर दिया। उन्‍होंने राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी व सरदार वल्‍लभभाई पटेल के सपनों ‘एक देश एक भाषा (One Nation One Language)’ का...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शनिवार को हिंदी दिवस (Hindi Diwas) के अवसर पर देश को शुभकानाएं दी और हिंदी का इस्&#x200d;तेमाल अधिक से अधिक करने पर जोर दिया। उन्&#x200d;होंने राष्&#x200d;ट्रपिता महात्&#x200d;मा गांधी व सरदार वल्&#x200d;लभभाई पटेल के सपनों ‘एक देश एक भाषा (One Nation One Language)’ का जिक्र कर कहा कि इसे साकार करने के लिए हिंदी का इस्&#x200d;तेमाल बढ़ाना होगा।उन्&#x200d;होंने ट्वीट कर कहा, ‘भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है परंतु पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने। आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है।’</p>
<p>उन्&#x200d;होंने एक और ट्वीट कर कहा, ‘आज हिंदी दिवस के अवसर पर मैं देश के सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि हम अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रयोग को बढाएं और साथ में हिंदी भाषा का भी प्रयोग कर देश की एक भाषा के पूज्य बापू और लौह पुरूष सरदार पटेल के स्वप्न को साकार करने में योगदान दें।’</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्&#x200d;यक्ष जेपी नड्डा ने भी हिंदी दिवस के मौके पर देश को शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘पूरे देश में हिंदी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जो हम सब को एक धागे में पिरोती है और दुनिया में हमारी पहचान भी है। आप सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं। हम सब हिंदी का इस्&#x200d;तेमाल अधिक से अधिक करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।’</p>
<p>इस मौके पर कांग्रेस प्रवक्&#x200d;ता रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्वीट किया और कहा, ‘आशा-अभिलाषा है हिंदी, सबको साथ लेकर चलनेवाली भाषा है हिंदी! हिंदी साहित्य की सेवा में लगे हुए सभी लेखकों, कवियों और पत्रकारों को नमन करते हुए देशवासियों को हिंदी-दिवस की शुभकामनाएँ!!’ हर वर्ष 14 सितंबर को देश में हिंदी दिवस मनाई जाती है। इसी दिन भारत की आधिकारिक भाषा के तौर पर हिंदी को चुना गया था। देश के लिए चुने गए 22 भाषाओं में से एक हिंदी है।हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। हिंदी विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा है। यह भाषा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। इसे भारत में राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। हिंदी भाषी लोगों की सबसे बड़ी संख्या भारत में है। 43.63 फीसद के साथ 53.0 करोड़ भारतीय हिंदी बोलते हैं। दुनिया की भाषाओं का इतिहास रखने वाली संस्था एथ्नोलॉग के मुताबिक हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा है।</p>
<p>कब हुई मनाने की शुरुआत<br />
14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। इस निर्णय के बाद हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।</p>
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