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		<title>कैबिनेट : अब फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट कर सकेंगे सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में इंटर्नशिप, बायोफ्यूल नीति को भी मंजूरी</title>
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		<pubDate>Tue, 04 Jul 2023 12:16:16 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना।</strong> मंगलवार को हुई बिहार मंत्रिपरिषद् की बैठक में कुल आठ एजेंडों पर मुहर लगी। मंत्रिपरिषद् की बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने सूचना भवन के सभाकक्ष में पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने सरकारी मामलों में वकीलों की नियुक्ति में बड़ा बदलाव किया है। राज्य स्तर के मामलों पर सरकारी वकील की नियुक्ति महाधिवक्ता, कानून सचिव की कमेटी करेगी। इसकी अंतिम स्वीकृति कानून मंत्री देंगे। जिलास्तर के मामलों के लिए वकीलों की नियुक्ति डीएम और जिला जज करेंगे। विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के दिशा-निर्देश के आलोक में राज्य चिकित्सा परिषद (स्टेट मेडिकल काउंसिल) में निबंधन के क्रम में राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की सुविधा देने का भी निर्णय लिया गया।</p>
<p>वहीं, उद्योग विभाग के अंतर्गत बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2023 की स्वीकृति दी गई। इसके अनुुसार राज्य सरकार द्वारा लागू इथेनॉल प्रोत्साहन नीति-2021 के अन्तर्गत केवल शत-प्रतिशत इथेनॉल उत्पादन करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य था। वर्तमान में नवीकरणीय उर्जा के विस्तार के लिए इथेनॉल के अलावा कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) के उत्पादन को भी प्रोत्साहित करने का विचार है। इसी उद्देश्य के साथ राज्य मंत्रिपरिषद ने बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2023 के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।</p>
<p>बायोफ्यूल्स के उत्पादन से जीवाश्म ईंधन के आयात पर राष्ट्रीय निर्भरता कम होगी जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके उपयोग से पर्यावरणीय प्रदूषण कम होगा एवं किसानों को गन्ना एवं अनाज उत्पाद का शीघ्र भुगतान हो सकेगा। साथ ही कचरा को सम्प्रेस्ड गैस में परिवर्तित करने की सुविधा प्राप्त होगी, जिससे व्यापार के नये अवसर प्राप्त होंगे। इस नीति के तहत शत-प्रतिशत इथेनॉल उत्पादन करने वाली वैसी नई ग्रीन फिल्ड इकाइयाें को प्रोत्साहित किया जाएगा जो ग्रीन फिल्ड के रूप में स्थापित होंगी। साथ ही कम्प्रेस्ड बायो गैस, जैव सीएनजी उत्पादन करने वाली इकाइयां इस नीति के तहत प्रोत्साहित की जाएंगी।<br />
इस नीति के तहत इकाइयों के वाणिज्यिक उत्पादन की तिथि निर्धारित होने के बाद ही वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस नीति के अंतर्गत मात्र वैसी नई बायोफ्यूल इकाइयां विचारणीय होंगी जो जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के मापदंडों के अनुरूप स्थापित की जायेंगी। ईटीपी एवं कैप्टीव पावर प्लांट की स्थापना पर होने वाले व्यय को भी स्वीकृत परियोजना लागत में शामिल किया जायेगा।</p>
<p>इस नीति के तहत पूंजीगत अनुदान प्लांट एवं मशीनरी की लागत का 15 प्रतिशत या अधिकतम पांच करोड़ रूपये अनुमान्य होगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ावर्ग की महिला, दिव्यांग, वार विडो, एसिड अटैक पीड़ित एवं थर्ड जेंडर उद्यमियों की स्थिति में पूंजीगत अनुदान प्लांट एवं मशीनरी की लागत का 15.75 प्रतिशत या अधिकतम 5.25 करोड़ रुपये अनुमान्य होगा। इस नीति के अंतर्गत देय अनुदान बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 के तहत देय अनुदान के अतिरिक्त होगी।<br />
इस नीति के तहत अनुदान प्राप्त करने के लिए इकाइयों को स्टेज-1 क्लीयरेंस के लिए आवेदन देने की अंतिम तिथि 30.06.2024 है। साथ ही इन इकाइयों को दिनांक- 30.06.2025 तक वित्तीय प्रोत्साहन मंजूरी के लिए आवेदन करना होगा। यह नीति संकल्प निर्गत की तिथि से 31.03.2028 तक प्रभावी रहेगी। उद्योग विभाग के ही तहत बिहार राज्य निवेश प्रोत्साहन (वस्त्र एवं चर्म) नीति-2022 की अवधि विस्तार 30 जून 2024 तक करने की स्वीकृति दी गई और आवेदन की तिथि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी गई है।</p>
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		<title>..तो क्या सबसे अधिक आइएएस-आइपीएस देने वाले राज्य में गणित-विज्ञान पढ़ाने वाले नहीं हैं?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jun 2023 11:57:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Political]]></category>
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		<category><![CDATA[teacher reinstatement]]></category>
		<category><![CDATA[डोमिसाइल समाप्त]]></category>
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		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री नीतीश कुमार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>-शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर की खरी-खरी, कहा-इस कारण लिया गया डोमिसाइल समाप्त करने का निर्णय पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में वैसे तो 25 एजेंडों पर मुहर लगी, लेकिन जो सबसे अहम फैसला लिया गया वह यह कि अब किसी भी...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>-शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर की खरी-खरी, कहा-इस कारण लिया गया डोमिसाइल समाप्त करने का निर्णय</p>
<p><strong>पटना।</strong> मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में वैसे तो 25 एजेंडों पर मुहर लगी, लेकिन जो सबसे अहम फैसला लिया गया वह यह कि अब किसी भी राज्य के नागरिक बिहार में शिक्षक बन सकते हैं।<br />
यानी डोमिसाइल (स्थाई निवासी) का मसला अब समाप्त कर दिया गया है।</p>
<p>इस फैसले से बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई है। हालांकि शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने तर्क किया है कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी है। इसकी वजह से बिहार की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी कारण यह निर्णय लिया गया। आगे कहा कि अब पूरे देश के अभ्यर्थी इसमें हिस्सा ले सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि देश के अन्य राज्यों के जो मेधावी विद्यार्थी हैं, वे शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। यानी शिक्षा मंत्री ने यह माना कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले शिक्षकों की कमी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स के अभ्यर्थी नहीं मिल पाते हैं। इस कारण सीट खाली रह जाती है। इस प्रकार के निर्णय की वजह यही है। जब शिक्षा मंत्री से कहा गया कि इस निर्णय का बिहार के शिक्षक अभ्यर्थी और शिक्षक संघ विरोध कर रहे हैं तो उन्होंने दो टूक कहा कि हर निर्णय का विरोध होता है, हम क्या कर सकते हैं। उधर, जैसे ही बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी दी, विरोध शुरू हो गया। शिक्षक और अभ्यर्थी संघ ने कहा कि बिहार के अभ्यर्थियों की हकमारी की गई है। इसके विरोध में छात्र संघ भी सड़क पर उतरेगा।</p>
<p>भले ही नीतीश कैबिनेट के इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया हो, लेकिन जिस पाक-साफ नीयत से यह फैसला लिया गया है, वह स्वागतयोग्य है। बिहार के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की योग्यता किसी से छुपी नहीं है। गांवों के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में कुछ ऐसे शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं, जिन्हें ए फॉर एप्पल और बी फॉर बॉल की स्पेलिंग नहीं आती है। यही वजह है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे सिर्फ खिचड़ी खाकर (मध्याह्न भोजन) खाकर घर चले जाते हैं और ऐसे शिक्षकों को उनका भविष्य संवारने से कोई मतलब नहीं रहता। अब सिक्के के दूसरे पहलू को देखें। यही बिहार सबसे अधिक आइएएस-आइपीएस देश को देता है। संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में देश के क्रीम यानी सबसे अधिक पढ़ा-लिखा तबका शामिल होता है। कई आइआइटियन और एमबीबीएस भी इस परीक्षा में शामिल होते हैं। फिर भी, आखिर क्या वजह है कि सबसे अधिक अभ्यर्थी बिहार के ही बाजी मारते हैं। शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर जो कह रहे हैं, उसमें दम है। उसकी सराहना होनी चाहिए कि कम से कम उन्होंने इतनी हिम्मत तो दिखाई कि सार्वजनिक रूप से बिहार की शिक्षा व्यवस्था के स्याह पक्ष को सामने रखा। उन्होंने साफ कहा कि साइंस, मैथ और अंग्रेजी की समस्या थी। इस कारण ऐसा किया गया। तो क्या यह मान लिया जाए कि जो प्रदेश हरसाल सबसे अधिक आइएएस-आइपीएस देता रहा है, वहां साइंस, मैथ और अंग्रेजी पढ़ाने वाले अभ्यर्थी नहीं मिल रहे हैं!</p>
<p>जब इस संबंध में वरीय पत्रकार अनिल कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के कारण अधिकांश मेधावी विद्यार्थी पलायन कर जा रहे हैं। उनके पास इससे बेटर ऑप्शन है। ऐसे में शिक्षक बनने की लालसा पाले लोग वही हैं जो सिर्फ डिग्रीधारी हैं। जब बड़े पैमाने पर नियोजित शिक्षकों की बहाली हुई और नियोजन इकाइयां पंचायत के मुखिया या जिला परिषद के अध्यक्षों ने कैसे शिक्षकों को और किस प्रकार बहाल किया, यह किसी से छुपा है क्या? अब ऐसे शिक्षक ही नियोजित से नियमित बनने का सपना देख रहे हैं। उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें कुछ आता-जाता नहीं है। सिर्फ मानदेय से मतलब है। अगर शिक्षा व्यवस्था की नींव प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इमानदार कोशिश की जा रही है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए। अगर आपमें भी योग्यता है तो ओपन कंप्टीशन में शामिल होकर अपनी जगह बनाइये। सरकार आपको परीक्षा में शामिल होने से थोड़े ना रोक रही है। हां, मंगलवार को लिया गया निर्णय ऐतिहासिक है। बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक नियुक्ति, स्थानान्तरण, अनुशासनिक कार्रवाई और सेवाशर्त संशोधन नियमावली-2023 को स्वीकृति दी गई है तो सरकार का यह इमानदार प्रयास है। इसका विरोध नहीं होना चाहिए। सरकार ने अपने वोट बैंक की परवाह ना करते हुए यह निर्णय लिया है। इसलिए राज्य के हर सजग नागरिक का यह कर्त्तव्य है कि दलगत भावना से उपर उठकर इसका समर्थन करें। राज्य में विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए अब बिहार के स्थायी निवासी होने की क्वालिफिकेशन जरूरी नहीं है।</p>
<p>आपको बता दें कि राज्य में 1.70 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। कुछ समय पूर्व ही सरकार ने पंचायत और नगर निकाय से शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया को समाप्त कर बिहार लोकसेवा आयोग बीपीएससी के माध्यम से शिक्षकों की बहाली का निर्णय लिया था। आयोग के जरिये बहाल शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह कि इससे प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने का मौका मिलेगा, जिससे बिहार की शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी। पहले कंप्यूटर, विज्ञान, अंग्रेजी और गणित विषय में अभ्यर्थियों की संख्या कम रहती थी। लेकिन, अब पूरे देश से जब शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थी आवेदन करेंगे तो कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच श्रेष्ठ का ही चयन हो पाएगा। यह निर्णय राज्य के शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम तो कहा ही जाना चाहिए।</p>
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