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	<title>astrology - newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</title>
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		<title>संकष्टी चतुर्थी व्रत की जानकारी</title>
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		<pubDate>Wed, 08 Jul 2020 06:44:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>🌺🌺 संकष्टी चतुर्थी हिंदू पंचांग के अनुसार, चंद्र मास में दो चतुर्थी होती हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। तथा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, जो अमावस्या के बाद आती है, विनायक चतुर्थी कहलाती है। जैसा कि आप जानते हैं, संकष्टी...</p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c/">संकष्टी चतुर्थी व्रत की जानकारी</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f33a.png" alt="🌺" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f33a.png" alt="🌺" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> संकष्टी चतुर्थी</strong></p>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, चंद्र मास में दो चतुर्थी होती हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। तथा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, जो अमावस्या के बाद आती है, विनायक चतुर्थी कहलाती है। जैसा कि आप जानते हैं, संकष्टी चतुर्थी व्रत हर महीने होता है। मुख्य संकष्टी चतुर्थी माघ महीने में आती है। यदि मंगलवार को संकष्टी चतुर्थी आ रही है। ताकि संकष्टी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाए। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है। इसी तरह पश्चिम और दक्षिण भारत में और खासकर महाराष्ट्र में और जानें अंगारकी चतुर्थी की कहानी गणेश भक्त और वेदवेते अग्निहोत्री ऋषि भारद्वाज अवंती शहर में रह रहे थे। एक बार जब वह क्षिप्रा नदी पर स्नान के लिए गए, तो एक अप्सरा पानी का खेल खेल रही थी।</p>
<p>उसे देखकर भारद्वाज का मूलाधार पिघल गया। यह पृथ्वी द्वारा धारण किया गया था। वह पुत्र जो उसके बाद पृथ्वी पर पैदा हुआ, वह जसवंत के फूल के समान लाल था। जब वह सात साल का था, तो पृथ्वी ने उसे ऋषियों को सौंप दिया। उन्होंने उपनयन किया, वेद पढ़ाए और गणेश मंत्र की पूजा करने को कहा। फिर लड़का जंगल में चला गया। उन्होंने एक हजार वर्षों तक तपस्या करके गणेश को प्रसन्न किया। उन्होंने गणेश जी से प्रसन्न होने के लिए कहा, जो स्वर्ग में रहें और अमृत प्रदर्शन करें और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हों। इस पर गणेश जी ने आज सभी को चतुर्थी का उपहार दिया। ड्रा जैसा कि आपका नाम भूमिपुत्र है, भौम अकारक की तरह लाल है, इसलिए अंककर और मंगल भी प्रसिद्ध होंगे क्योंकि यह शुभ कार्यों को करने की शक्ति रखता है। इस चतुर्थी को अनारकी कहा जाएगा और यह उपवास करने वालों के लिए ऋण मुक्त और पुण्य होगा। गणेश ने उन्हें आकाश में एक जगह दी जहां आपको ग्रहों में जगह मिलेगी और आप अमृत पीएंगे। मंगलवार को ऐसा ही युद्ध हुआ था और गणेश के उपहार के कारण, अंगारकी चतुर्थी बहुत महत्वपूर्ण हो गई थी।</p>
<p><strong>गणेश छंद</strong></p>
<p>गणेशायनमस्तुभ्यंसर्वसिद्धिप्रदायक।<br />
संकष्टरमेदेव गृहाणा जल्दी्यनमो ते स्तुते ेद<br />
कृष्णपक्षेचतुथ्र्यातुसम्पूजितविधुडये।<br />
क्षिप्रंप्रसीददेव गृहाण जल्दी्यनमो ते स्तुते सी<br />
यह अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत है</p>
<p>&#8220;संकष्टी चतुर्थी&#8221; भगवान गणेश की पूजा का दिन है। दिन के दौरान उपवास करते हैं, रात के समय भगवान गणेश की पूजा करते हैं, व्रत तोड़ने के लिए चंद्र दर्शन करते हैं। ऐसा इस व्रत का संक्षिप्त ज्ञान है। &#8220;श्रीसंकटशहरगणपति&#8221; इस व्रत के देवता का नाम है। इस व्रत को करने वाली स्त्री या पुरुष को श्रावण मास में संकष्टी के दिन व्रत शुरू करना चाहिए। व्रत को 21 संकष्टों को लगातार करते हुए मनाया जाना चाहिए। इच्छा पूरी होने तक कुछ उपवास करते हैं, जबकि अन्य लगातार उपवास करते हैं। संकष्टी कलाकारों को व्रत तोड़ने से पहले हमेशा &#8220;संकष्टी चतुर्थी महात्म्य&#8221; पढ़ना चाहिए। संकष्टचतुर्थी के दिन काले तिलों से स्नान करना चाहिए। दिनभर गणेशजी का ध्यान करके उपवास करना चाहिए। आवश्यकतानुसार उपवास वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। अपना व्यवसाय दिन भर करें।</p>
<p>यदि आवश्यक हो तो शाम / रात में स्नान करें। फिर एक साफ थाली या चौकोर पर चावल या गेहूं का एक छोटा सा ढेर रखें, उस पर साफ पानी से भरा कलश (तांबा) रखें; कलश के चारों ओर दो वस्त्र लपेटें, उस पर एक तमंचा रखें और उसमें &#8220;श्रीसंकटहार गणपति&#8221; रखें। (भगवान, गणेश की सोने, चांदी, तांबे आदि धातु की मूर्तियाँ या चित्र) पूजा करने वाले को लाल रंग का वस्त्र पहनना चाहिए। पूजा में प्रवाहित होने वाली &#8220;गंध-अक्षत-पुष्प-वस्त्र&#8221; का रंग लाल होना चाहिए। : सो अपवस्त्र, गजमुखाय नम: अयं धूपं, मुसखावनयाय नम: इतना गहन, विप्राणताय नम: अतः नैवेद्य और धनदाय नम: अतः दक्षिणा अर्पित करें। पूजा के बाद, अगले ध्यान मंत्र के रूप में &#8220;श्रीसंकटशहरगणपति&#8221; का ध्यान करें।</p>
<p>रक्तांग रक्तवस्त्रं तुकुसुन्मगणै: पूजितं रक्तगंधै: स्त्रक्षीरभधो रत्नदीप सुरतरुविमले रत्नसिंहासननाथम् ो दोर्भी: पशंकुशेशता भयद्रुतिरुचिराम चन्द्रमौलिन त्रिनेत्रम्। ध्यायेच्छांत्यर्थमीशं गणपतीमलं श्री सहितं प्रसन्नम् ्य फिर अपनी इच्छाओं की राहत और पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। मम सर्वविघ्ननिवृत्थ संज्ञाचरगणपतीपति्रीतिर्थ चतुर्थी सात्वंतात्वेन यथा मीलोतोपचार द्रव्यै: शोडोपचारे पूजाकरिहाय चार यानी। फिर निम्नलिखित &#8220;संकष्टी चतुर्थी महात्म्य&#8221; पढ़ें। 21 मोदक की दवा दिखाकर आरती करनी चाहिए। आरती के बाद &#8211; माया अशुद्धता के बिना या पदार्थ के बिना कृत्रिम है। तब सभी सिद्धियाँ गणेश के समान हैं।</p>
<p>इसलिए, सत्संग नमस्कार को जोड़ा जाना चाहिए। फिर चंद्रमा का दर्शन कर चंद्रमा को अर्घ्य (जल), गंध, अक्षत, पुष्प चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए। &#8220;रोहिनाथाय नम:&#8221; के रूप में अभिवादन। फिर उपवास तोड़ो। भोजन मोदक, मीठा, नमकीन और खट्टा होना चाहिए। [पंचांग में चंद्रोदय का समय दिया गया है।] भोजन के बाद मूर्ति की पूजा की जानी चाहिए और मूर्ति या चित्र को उठा लेना चाहिए। अनाज का उपयोग किया जाना चाहिए। तुलसी में जल डालें।</p>
<p><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></p>
<p>The post <a href="https://newsmantra.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c/">संकष्टी चतुर्थी व्रत की जानकारी</a> appeared first on <a href="https://newsmantra.in">newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu &amp; Kashmir, Trending news | News Mantra</a>.</p>
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		<title>नागपंचमी पर सांप को दूध पिलाने से पहले जान लें, ये जरूरी बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2020 06:14:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>🙏 ।।श्री गुरूदेव दत्त।। 🙏 नागपंचमी पर सांप को दूध पिलाने से पहले जान लें, ये जरूरी बातें यूं ही न बनें क‍िसी भी परंपरा का ह‍िस्‍सा नागपंचमी के पर्व पर सांपों को दूध प‍िलाने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। लेक‍िन क्‍या आप जानते हैं क‍ि...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> ।।श्री गुरूदेव दत्त।। <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></strong></p>
<p><strong>नागपंचमी पर सांप को दूध पिलाने से पहले जान लें, ये जरूरी बातें</strong></p>
<p><strong>यूं ही न बनें क&#x200d;िसी भी परंपरा का ह&#x200d;िस्&#x200d;सा</strong></p>
<p>नागपंचमी के पर्व पर सांपों को दूध प&#x200d;िलाने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। लेक&#x200d;िन क्&#x200d;या आप जानते हैं क&#x200d;ि इस परंपरा के चलते नागपंचमी के द&#x200d;िन या फिर कुछ द&#x200d;िनों बाद क&#x200d;ितने सांपों की मौत हो जाती है। बता दें क&#x200d;ि इस बार नागपंचमी 25 जुलाई को है। और अगर आप भी ऐसा ही करते आए हैं तो इस बार इस परंपरा का ह&#x200d;िस्&#x200d;सा बनने से पहले यहां बताई गई बातों पर एक बार गौर जरूर कर लें। ताकि परंपराओं के नाम पर कहीं बेजुबानों जीवों की जान न चली जाए।</p>
<p><strong>भविष्य पुराण में नागपूजा का ज&#x200d;िक्र</strong></p>
<p>भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में नागपूजा और नागों को दूध पिलाने का जिक्र किया गया है। मान्&#x200d;यता है कि सावन के महीने में नाग देवता की पूजा करने और नाग पंचमी के दिन दूध अर्पित करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और नागदंश का भय नहीं रहता है। यह भी मान्यता है कि नागों की पूजा से अन्&#x200d;न-धन के भंडार भी भरे रहते हैं। मगर विज्ञान की मानें तो सांप को दूध पिलाना काफी नुकसानदेय है।</p>
<p><strong>नाग को दूध प&#x200d;िलाने की धार्मिक मान्&#x200d;यताएं</strong></p>
<p>मान्&#x200d;यता है क&#x200d;ि नाग पंचमी के दिन सांप को दूध पिलाने और धान का लावा अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन सपेरे टोलियों में घर-घर घूमकर नागों के दर्शन करवाते हैं और भिक्षा मांगते हैं। श्रद्धालु नागों को दूध पिलाने के साथ सपेरे को भी दान देते हैं। लेकिन धार्मिक मान्&#x200d;यताओं के अनुसार नाग को दूध पिलाने से पाचन नहीं हो पाने या प्रत्यूर्जता से उनकी मृत्यु हो जाती है। इसलिए शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने को नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने को कहा गया है। लेकिन लोगों ने सांप को दूध प&#x200d;िलाने की परंपरा ही शुरू कर दी। जबक&#x200d;ि इससे सांपों की ज&#x200d;िंदगी पर बन आती है।</p>
<p><strong>सांप को दूध प&#x200d;िलाने पर वैज्ञानिक मत</strong></p>
<p>विज्ञान कहता है सांप को दूध पिलाना खतरनाक है। विज्ञान की मानें तो सांप रेप्&#x200d;टाइल जीव हैं न कि स्&#x200d;तनधारी। रेप्&#x200d;टाइल जीव दूध को हजम नहीं कर सकते और ऐसे में कई बार उनकी मृत्&#x200d;यु तक हो जाती है। दूध पिलाने से सांप की आंत में इन्&#x200d;फेक्&#x200d;शन हो सकता है। इसके चलते कई बार सांप की जिंदगी पर बन आती है।</p>
<p><strong>यह भी है मुख्&#x200d;य वजह</strong></p>
<p>दरअसल नाग पंचमी से महीने-डेढ़ महीने पहले जंगल से सांपों को पकड़ा जाता है। उसके बाद इन्&#x200d;हें बहुत ही निर्ममता से भूखा-प्&#x200d;यासा रखा जाता है और कई बार तो इनके दांत तक निकाल दिए जाते हैं। ताकि ये काट न सकें। एक महीने तक इस तरह से रहने के बाद सांप का शरीर सूख जाने के साथ ही उसकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। यही वजह है एक महीने तक भूखा-प्&#x200d;यासा रहने के बाद नागपंचमी वाले दिन सांप तेजी से दूध पी लेते हैं। जो क&#x200d;ि इनके लिए बहुत ही नुकसानदेय होता है।<br />
यूं बन जाता है दूध सांप के ल&#x200d;िए जहर</p>
<p>सर्प विशेषज्ञों के अनुसार सपेरे नाग पंचमी से पहले ही सांपों को पकड़कर उनके दांत तोड़ देते हैं और जहर की थैली निकाल लेते हैं। इससे सांप के मुंह में घाव हो जाता है। इसके बाद सपेरे सांप को भूख रखते हैं और नागपंचमी के द&#x200d;िन इन्&#x200d;हें दूध प&#x200d;िलाते हैं। सांप क्&#x200d;योंक&#x200d;ि मांसाहारी है इसलिए भूख-प्&#x200d;यास से परेशान सांप दूध को पानी समझकर पीते हैं। जो कि उनके मुंह में बने घाव में मवाद बन जाता है और इससे कुछ ही द&#x200d;िनों में सांपों की मौत हो जाती है। इसलिए बेहतर यही है क&#x200d;ि सांपों को नागपंचमी पर दूध प&#x200d;िलाने से बचें।</p>
<p><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></strong></p>
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		<title>वास्तुशास्‍त्र की आठ प्रमुख दिशाएं एवं उनके महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jul 2020 05:01:31 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[astrology]]></category>
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		<category><![CDATA[pashchim]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>🙏 ।।श्री गुरूदेव दत्त।। 🙏 !!! वास्तुशास्‍त्र की आठ प्रमुख दिशाएं एवं उनके महत्व !!! वास्तुशास्‍त्र में आठ प्रमुख दिशाओं का जिक्र आता है, जो मनुष्य के समस्त कार्य-व्यवहारों को प्रभावित करती हैं। इनमें से प्रत्येक दिशा का अपना-अपना विशेष महत्व है। अगर आप घर या कार्यस्थल में इन दिशाओं...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> ।।श्री गुरूदेव दत्त।। <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></p>
<p>!!! वास्तुशास्&#x200d;त्र की आठ प्रमुख दिशाएं एवं उनके महत्व !!!</p>
<p>वास्तुशास्&#x200d;त्र में आठ प्रमुख दिशाओं का जिक्र आता है, जो मनुष्य के समस्त कार्य-व्यवहारों को प्रभावित करती हैं।</p>
<p>इनमें से प्रत्येक दिशा का अपना-अपना विशेष महत्व है।</p>
<p>अगर आप घर या कार्यस्थल में इन दिशाओं के लिए बताए गए वास्तु सिद्धांतों का अनुपालन करते हैं, तो इसका सकारात्मक परिणाम आपके जीवन पर होता है।</p>
<p>इन आठ दिशाओं को आधार बनाकर आवास/कार्यस्थल एवं उनमें निर्मित प्रत्येक कमरे के वास्तु विन्यास का वर्णन वास्तुशास्&#x200d;त्र में आता है।</p>
<p>ब्रहांड अनंत है। इसकी न कोई दशा है और न दिशा। लेकिन हम पृथ्वीवासियों के लिए दिशाएं हैं।</p>
<p>ये दिशाएं पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाने वाले गृह सूर्य एवं पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र पर आधारित हैं।</p>
<p>यहां उल्लेखनीय है कि, आठों मूल दिशाओं के प्रतिनिधि देव हैं, जिनका उस दिशा पर विशेष प्रभाव पड़ता है।</p>
<p>इसका विस्तृत वर्णन नीचे किया गया है।</p>
<p>यहां हम आठ मूलभूत दिशाओं और उनके महत्व के साथ-साथ प्रत्येक दिशा के उत्तम प्रयोग का वर्णन कर रहे हैं।</p>
<p>चूंकि वास्तु का वैज्ञानिक आधार है, इसलिए यहां वर्णित दिशा-निर्देश पूर्णतः तर्क संगत हैं।</p>
<p><strong>१. पूर्व दिशा&#8230;.</strong></p>
<p>इस दिशा के प्रतिनिधि देवता सूर्य हैं। सूर्य पूर्व से ही उदित होता है। यह दिशा शुभारंभ की दिशा है।</p>
<p>भवन के मुख्य द्वार को इसी दिशा में बनाने का सुझाव दिया जाता है। इसके पीछे दो तर्क हैं।</p>
<p>पहला- दिशा के देवता सूर्य को सत्कार देना और</p>
<p>दूसरा वैज्ञानिक तर्क यह है कि, पूर्व में मुख्य द्वार होने से सूर्य की रोशनी व हवा की उपलब्धता भवन में पर्याप्त मात्रा में रहती है।</p>
<p>सुबह के सूरज की पैरा बैंगनी किरणें रात्रि के समय उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं को खत्म करके घर को ऊर्जावान बनाएं रखती हैं।</p>
<p><strong>२. उत्तर दिशा&#8230;.</strong></p>
<p>इस दिशा के प्रतिनिधि देव धन के स्वामी कुबेर हैं। यह दिशा ध्रूव तारे की भी है।</p>
<p>आकाश में उत्तर दिशा में स्थित ध्रुव तारा स्थायित्व व सुरक्षा का प्रतीक है। यही वजह है कि, इस दिशा को समस्त आर्थिक कार्यों के निमित्त उत्तम माना जाता है।</p>
<p>भवन का प्रवेश द्वार या लिविंग रूम/ बैठक इसी भाग में बनाने का सुझाव दिया जाता है।</p>
<p>भवन के उत्तरी भाग को खुला भी रखा जाता है। चूंकि भारत उत्तरी अक्षांश पर स्थित है, इसीलिए उत्तरी भाग अधिक प्रकाशमान रहता है।</p>
<p>यही वजह है कि, उत्तरी भाग को खुला रखने का सुझाव दिया जाता है, जिससे इस स्थान से घर में प्रवेश करने वाला प्रकाश बाधित न हो।</p>
<p><strong>३. उत्तर-पूर्व (ईशान कोण)&#8230;.</strong></p>
<p>यह दिशा बाकी सभी दिशाओं में सर्वोत्तम दिशा मानी जाती है। उत्तर व पूर्व दिशाओं के संगम स्थल पर बनने वाला कोण ईशान कोण है।</p>
<p>इस दिशा में कूड़ा-कचरा या शौचालय इत्यादि नहीं होना चाहिए।</p>
<p>ईशान कोण को खुला रखना चाहिए या इस भाग पर जल स्रोत बनाया जा सकता है।</p>
<p>उत्तर-पूर्व दोनों दिशाओं का समग्र प्रभाव ईशान कोण पर पडता है।</p>
<p>पूर्व दिशा के प्रभाव से ईशान कोण सुबह के सूरज की रौशनी से प्रकाशमान होता है, तो उत्तर दिशा के कारण इस स्थान पर लंबी अवधि तक प्रकाश की किरणें पडती हैं।</p>
<p>ईशान कोण में जल स्रोत बनाया जाए तो सुबह के सूर्य कि पैरा-बैंगनी किरणें उसे स्वच्छ कर देती हैं।</p>
<p><strong>४. पश्चिम दिशा&#8230;.</strong></p>
<p>यह दिशा जल के देवता वरुण की है। सूर्य जब अस्त होता है, तो अंधेरा हमें जीवन और मृत्यु के चक्कर का एहसास कराता है।</p>
<p>यह बताता है कि, जहां आरंभ है, वहां अंत भी है।</p>
<p>शाम के तपते सूरज और इसकी इंफ्रा रेड किरणों का सीधा प्रभाव पश्चिमी भाग पर पडता है, जिससे यह अधिक गरम हो जाता है।</p>
<p>यही वजह है कि, इस दिशा को शयन के लिए उचित नहीं माना जाता।</p>
<p>इस दिशा में शौचालय, बाथरूम, सीढियों अथवा स्टोर रूम का निर्माण किया जा सकता है। इस भाग में पेड -पौधे भी लगाए जा सकते हैं।</p>
<p><strong>५. उत्तर- पश्चिम (वायव्य कोण)&#8230;</strong></p>
<p>यह दिशा वायु देवता की है। उत्तर- पश्चिम भाग भी संध्या के सूर्य की तपती रोशनी से प्रभावित रहता है।</p>
<p>इसलिए इस स्थान को भी शौचालय, स्टोर रूम, स्नान घर आदी के लिए उपयुक्त बताया गया है।</p>
<p>उत्तर- पश्चिम में शौचालय, स्नानघर का निर्माण करने से भवन के अन्य हिस्से संध्या के सूर्य की उष्मा से बचे रहते हैं,</p>
<p>जब कि यह उष्मा शौचालय एवं स्नानघर को स्वच्छ एवं सूखा रखने में सहायक होती है।</p>
<p><strong>६. दक्षिण दिशा&#8230;..</strong></p>
<p>यह दिशा मृत्यु के देवता यमराज की है। दक्षिण दिशा का संबंध हमारे भूतकाल और पितरों से भी है।</p>
<p>इस दिशा में अतिथि कक्ष या बच्चों के लिए शयन कक्ष बनाया जा सकता है।</p>
<p>दक्षिण दिशा में बॉलकनी या बगीचे जैसे खुले स्थान नहीं होने चाहिएं।</p>
<p>इस स्थान को खुला न छोड़ने से यह रात्रि के समय न अधिक गरम रहता है और न ज्यादा ठंडा।</p>
<p>लिहाजा यह भाग शयन कक्ष के लिए उत्तम होता है।</p>
<p><strong>७. दक्षिण- पश्चिम (नैऋत्य कोण)&#8230;.</strong></p>
<p>यह दिशा नैऋुती अर्थात् स्थिर लक्ष्मी (धन की देवी) की है। इस दिशा में आलमारी, तिजोरी या गृहस्वामी का शयन कक्ष बनाना चाहिए।</p>
<p>चूंकि इस दिशा में दक्षिण व पश्चिम दिशाओं का मिलन होता है, इसलिए यह दिशा वेंटिलेशन के लिए बेहतर होती है।</p>
<p>यही कारण है कि, इस दिशा में गृह स्वामी का शयन कक्ष बनाने का सुझाव दिया जाता है।</p>
<p>तिजोरी या आलमारी को इस हिस्से की पश्चिमी दीवार में स्थापित करें।</p>
<p><strong>८. दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण)&#8230;.</strong></p>
<p>इस दिशा के प्रतिनिधी देव अग्नि हैं। यह दिशा उष्&#x200d;मा, जीवन शक्ति और ऊर्जा की दिशा है।</p>
<p>रसोईघर के लिए यह दिशा सर्वोत्तम होती है। सुबह के सूरज की पैराबैंगनी किरणों का प्रत्यक्ष प्रभाव पडने के कारण रसोईघर मक्खी-मच्छर आदी जीवाणुओं से मुक्त रहता है।</p>
<p>वहीं दक्षिण- पश्चिम यानी वायु की प्रतिनिधि दिशा भी रसोईघर में जलने वाली अग्नि को क्षीण नहीं कर पाती।<br />
<img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f41d.png" alt="🐝" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f33c.png" alt="🌼" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f33c.png" alt="🌼" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f41a.png" alt="🐚" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f41a.png" alt="🐚" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> ॐ नमो भगवते वासुदेवाय <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f41a.png" alt="🐚" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f41a.png" alt="🐚" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f33c.png" alt="🌼" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f33c.png" alt="🌼" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f41d.png" alt="🐝" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></p>
<p><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></p>
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