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		<title>इस मानसून सत्र से राज्यसभा में होगा डिजिटल कामकाज, उपाध्यक्षों के पैनल में 50 फीसदी महिलाएं शामिल</title>
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		<pubDate>Fri, 21 Jul 2023 12:25:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उपाध्यक्षों के पैनल में चार महिला सांसदों को नामित किया है। पैनल में नामांकित सभी महिला सदस्य पहली बार राज्यसभा की सदस्य बनीं हैं। एस. फांगनोन कोन्याक नगालैंड से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होनेवाली पहली महिला हैं। मानसून सत्र...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उपाध्यक्षों के पैनल में चार महिला सांसदों को नामित किया है। पैनल में नामांकित सभी महिला सदस्य पहली बार राज्यसभा की सदस्य बनीं हैं। एस. फांगनोन कोन्याक नगालैंड से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होनेवाली पहली महिला हैं।<br />
मानसून सत्र से पहले पुनर्गठित पैनल में कुल आठ नाम हैं, जिनमें से आधी महिलाएं हैं। उच्च सदन के इतिहास में यह पहली बार है कि उपाध्यक्षों के पैनल में महिला सदस्यों को समान प्रतिनिधित्व दिया गया है। उपाध्यक्षों के पैनल में नामांकित महिला सदस्यों में पीटी उषा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और प्रसिद्ध एथलीट रहीं हैं। उन्हें जुलाई 2022 में राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया था। वह रक्षा समिति, युवा मामले और खेल मंत्रालय की सलाहकार समिति और नैतिकता समिति की सदस्य हैं।<br />
इसी प्रकार एस. फांगनोन कोन्याक नगालैंड से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होनेवाली पहली महिला और संसद या राज्य विधानसभा के किसी भी सदन के लिए चुनी जाने वाली राज्य की दूसरी महिला हैं। वह परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय की सलाहकार समिति की सदस्य हैं। महिला सशक्तिकरण समिति, हाउस कमेटी और उत्तर-पूर्वी इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान संस्थान, शिलांग की गवर्निंग काउंसिल की सदस्य हैं। वहीं,<br />
डॉ. फौजिया खान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से हैं। वह अप्रैल 2020 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं थीं। वह महिला सशक्तिकरण समिति, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण समिति, कानून और न्याय मंत्रालय की सलाहकार समिति की सदस्य हैं। इसी प्रकार सुलता देव जुलाई 2022 में बीजू जनता दल से राज्यसभा के लिए चुनी गईं। वे उद्योग समिति, महिला सशक्तिकरण समिति, लाभ के पद संबंधी संयुक्त समिति, संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना समिति और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की सलाहकार समिति की सदस्य हैं। इन महिला सदस्यों के अलावा वी. विजयसाई रेड्डी, घनश्याम तिवारी, डॉ. एल. हनुमंथैया और सुखेंदु शेखर रे को भी उपाध्यक्षों के पैनल में शामिल किया गया है।<br />
आपको बता दें कि इस मानसून सत्र से राज्यसभा में कामकाज पूरी तरह से डिजिटल तरीके से होगा। राज्यसभा के सभापति अब सदन में उपस्थिति, बोलने वाले सदस्यों के विवरण और अन्य प्रासंगिक जानकारी से संबंधित मामलों के लिए इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट का उपयोग करेंगे।</p>
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		<title>कैसे मनायें हरितालिका का त्यौहार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Newsmantra]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Aug 2020 07:18:34 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[विधि]]></category>
		<category><![CDATA[शिव का पूजन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हरतालिका तीज (गौरी तृतीया) व्रत हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं। यह आमतौर पर अगस्त – सितम्बर के महीने में ही आती है. इसे गौरी तृतीया व्रत भी कहते...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>हरतालिका तीज (गौरी तृतीया) व्रत</p>
<p>हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं।</p>
<p>यह आमतौर पर अगस्त – सितम्बर के महीने में ही आती है. इसे गौरी तृतीया व्रत भी कहते है। भगवान शिव और पार्वती को समर्पित इस व्रत को लेकर इस बार उलझन की स्थिति बनी हुई है। व्रत करने वाले इस उलझन में हैं कि उन्हें किस दिन यह व्रत करना चाहिए। इस उलझन की वजह यह है कि इस साल पंचांग की गणना के अनुसार तृतीया तिथि का क्षय हो गया है यानी पंचांग में तृतीया तिथि का मान ही नहीं है।</p>
<p>आपको बता दें कि इस विषय पर ना सिर्फ व्रती बल्कि ज्योतिषशास्त्री और पंचांग के जानकर भी दो भागों में बंटे हुए हैं। एक मत के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत २१ अगस्त को करना शास्त्र सम्मत होगा क्योंकि यह व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है जो २१ अगस्त को है<br />
२१ अगस्त को ११:०२एम मिनट तक तृतीया तिथि होगी, जिससे व्रत के लिए २१ सितंबर का दिन ही सब प्रकार से उचित है।</p>
<p>२० अगस्त को द्वितीया तिथि ०२ बजकर १३ मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसके बाद से तृतीया यानी तीज शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी २१ अगस्त को से ११ बजकर ०२ मिनट पर तृतीया समाप्त होकर चतुर्थी शुरू हो जाएगी,</p>
<p>खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं। कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा गया हैं,</p>
<p>विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से जहाँ कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है,</p>
<p>हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी एवम गणेश जी की पूजा का महत्व हैं। यह व्रत निराहार एवं निर्जला किया जाता हैं। शिव जैसा पति पाने के लिए कुँवारी कन्या इस व्रत को विधि विधान से करती हैं,</p>
<p>महिलाओं में संकल्प शक्ति बढाता है हरितालिका तीज का व्रत</p>
<p>हरितालिका तीज का व्रत महिला प्रधान है।इस दिन महिलायें बिना कुछ खायें -पिये व्रत रखती है।यह व्रत संकल्प शक्ती का एक अनुपम उदाहरण है। संकल्प अर्थात किसी कर्म के लिये मन मे निश्चित करना कर्म का मूल संकल्प है।इस प्रकार संकल्प हमारी अन्तरीक शक्तियोंका सामोहिक निश्चय है।इसका अर्थ है-व्रत संकल्प से ही उत्पन्न होता है।व्रत का संदेश यह है कि हम जीवन मे लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प लें ।संकल्प शक्ति के आगे असंम्भव दिखाई देता लक्ष्य संम्भव हो जाता है।माता पार्वती ने जगत को दिखाया की संकल्प शक्ति के सामने ईश्वर भी झुक जाता है,</p>
<p>अच्छे कर्मो का संकल्प सदा सुखद परिणाम देता है। इस व्रत का एक सामाजिक संदेश विषेशतः महिलाओं के संदर्भ मे यह है कि आज समाज मे महिलायें बिते समय की तुलना मे अधिक आत्मनिर्भर व स्वतंत्र है।महिलाओं की भूमिका मे भी बदलाव आये है ।घर से बाहर निकलकर पुरुषों की भाँति सभी कार्य क्षेत्रों मे सक्रिय है।ऎसी स्थिति मे परिवार व समाज इन महिलाओं की भावनाओ एवं इच्छाओं का सम्मान करें,उनका विश्वास बढाएं,ताकि स्त्री व समाज सशक्त बनें।</p>
<p>हरतालिका तीज व्रत विधि और नियम</p>
<p>हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं। प्रदोष काल अर्थात दिन रात के मिलने का समय। हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती, गणेश एव रिद्धि सिद्धि जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से बनाई जाती हैं।</p>
<p>विविध पुष्पों से सजाकर उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर चौकी रखी जाती हैं। चौकी पर एक अष्टदल बनाकर उस पर थाल रखते हैं। उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं। सभी प्रतिमाओ को केले के पत्ते पर रखा जाता हैं। सर्वप्रथम कलश के ऊपर नारियल रखकर लाल कलावा बाँध कर पूजन किया जाता हैं कुमकुम, हल्दी, चावल, पुष्प चढ़ाकर विधिवत पूजन होता हैं। कलश के बाद गणेश जी की पूजा की जाती हैं।</p>
<p>उसके बाद शिव जी की पूजा जी जाती हैं। तत्पश्चात माता गौरी की पूजा की जाती हैं। उन्हें सम्पूर्ण श्रृंगार चढ़ाया जाता हैं। इसके बाद अन्य देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन किया जाता है।</p>
<p>इसके बाद हरतालिका व्रत की कथा पढ़ी जाती हैं। इसके पश्चात आरती की जाती हैं जिसमे सर्वप्रथम गणेश जी की पुनः शिव जी की फिर माता गौरी की आरती की जाती हैं। इस दिन महिलाएं रात्रि जागरण भी करती हैं और कथा-पूजन के साथ कीर्तन करती हैं। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव को सभी प्रकार की वनस्पतियां जैसे बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण किया जाता है। आरती और स्तोत्र द्वारा आराधना की जाती है। हरतालिका व्रत का नियम हैं कि इसे एक बार प्रारंभ करने के बाद छोड़ा नहीं जा सकता।</p>
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