मुम्बई बीमार बहुत बीमार है इसे बचाना होगा

मुम्बई में गुरुवार को एक और हादसा हो गया ।पुल गिरने से 5 की मौत और 36 घायल हो गए। ।ये सब वो आम मुम्बईकर है जो घर पहुंचने के लिए अपनी ट्रैन पकड़ने जा रहे थे लेकिन पांच कभी घर नही पहुंच पाएंगे । एक साल में मुम्बई में ये 6 वा पुल हादसा है । एन दशहरे पर एलफिंस्टन में दब गए लोग भूले नही की अंधेरी का रेल पुल धंस गया। फिर हादसे होते रहे । रेलवे ने हड़बड़ी में 10 पुल को खतरनाक घोषित कर दिया कुछ तोड़ दिए कुछ नए बनाये लेकिन जो करना था वो अब तक नही हुआ। हर हादसे के बाद कहा जाता है कि रेलवे स्टेशन या उससे जुड़े बाहर के पुल का ऑडिट हर साल हो लेकिन नही होता। मुम्बई में ज्यादातर पुल 30 साल से 80 साल तक पुराने हैं उन पर यातायात का दवाब है लेकिन याद हादसे के समय ही आती है। अब हादसे के बाद रेलवे ने पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि ये पुल तो बीएमसी की हद में आता है हमारी नही बीएमसी कहेगी की रेलवे सुधार का पैसा नही देती। बीएमसी की सालाना कमाई 40 हजार करोड़ से ज्यादा है और रेलवे इससे ज्यादा कमा लेती है लेकिन जिम्मेदारी किसी की नही ।अब जबकि बीएमसी और रेलवे दोनों ही सत्ताधारी शिवसेना बीजेपी के पास है तो फिर क्या कमी । इस पुल की खासियत ये की इसे कसाब पुल भी कहते है।।आतंकी कसाब इसी पुल के नीचे से मुम्बई पुलिस मुख्यालय के पीछे वाली गली में गया था। आज भी इसे लोग कसाब गली कहते हैं । एक बात और ये पुल बीएमसी मुख्यालय से महज 10 मीटर दूर है और बीएमसी के कर्मचारी दिन भर इससे गुजरते है फिर भी इस पर किसी ने ध्यान नही दिया। मुझे लगता है जितना राजनीतिक दल जिम्मेदार है उससे ज्यादा वो अधिकारी जिम्मेदार है जो सेफ़्टी औडिट नही करते और हादसे का इंतजार करते है। मुम्बई देश की आर्थिक राजधानी है और देश का 60 प्रतिशत टैक्स मुम्बई से जुड़कर आता है लेकिन यहा सवा करोड़ से ज्यादा आबादी अकेली एक महानगर पालिका के भरोसे है। पालिका के अलावा पीडब्ल्यूडी,एमएमआरडीए जैसी एजेंसी भी है लेकिन सब में कोई तालमेल नही अभी शहर में हर जगह कुल मिलाकर 4 मेट्रो का काम चल रहा है ज्यादातर अंडरग्राउंड है। शहर समंदर किनारे बसा है ख़ुदा न खास्ता अगर जोरदार बारिश हो गई और शहर में 26 जुलाई 2005 की तरह पानी भर गया तो क्या होगा मेट्रो का। बूलेट ट्रैन और स्मार्ट सिटी की प्लानिंग से पहले मुम्बई को बचाना होगा ।उसका एक ही तरिका है शहर पर बोझ कम हो और शहर का विस्तार उपनगरीय इलाको में सही तरिके से हो । सबसे पहले तो मुम्बई महानगर की पूरी प्लानिंग और जिम्मेदारी तय हो । वरना एक फ़िल्म का गाना है ये मुम्बई शहर हादसों का शहर है,,,, संदीप सोनवलकर

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