पवार मैदान छोडकर क्यों भागे

A Sharad Pawar

लगाातार चालीस सालों से चुनाव जीत रहे शरद पवार ने पहली बार ऐसा किया  कि खुद ही चुनाव लडने का ऐलान किया औरअबखुद ही भाग गये ।कह रहे कि परिवार से ज्यादा लोगों को चुनाव नही लडना चाहिये ।

बेटी सुप्रिया बारामती से चुनाव लड रही है और पवार ने खुद को माढा लोकसभा सीट का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। पिछलीबार ये सीट एनसीपी के विजयसिंह मोहिते पाटिल ने जीती थी । पवार ने एक रैली में खुद मोहिते पाटिल का नाम लेकर कहा था कि मोहिते पाटिल चाहते है कि इस बार माढा से पवार ही चुनाव लडे .मजबूरी में मोहिते पाटिल ने भी हां कर दिया था।

पवार अब कह रहे है कि सुप्रिया के अलावा अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने मावल से टिकट मांगी है इसलिए वो खुद भी चुनाव लडे ये ठीक नही होगा .इस तरह कहा जा रहा है कि पवार ने पारिवारिक कारणों से सीट छोड दी ।

लेकिन कई सवाल खडे हो रहे है कि क्या अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार की नही सुन रहे ।और पवार से पूछे बिना ही पार्थ पवार का नाम घोषित कर दिया । यानि पवार परिवार में सब कुछ ठीक नही .दरअसल शरद पवार का पूरा मकसद इस बार अपनी बेटी सुप्रिया को सथापित करना है । इसलिए खुद भी बारामती से लगी माढा सीट से लडने का ऐलान कर दिया था ताकि पार्थ पवार को काट सके .लेकिन अजीत पवार माने नहीं . मजबूरन  पवार को बीेेंच में हीे नाम वापस लेना पडा।

पवार के नाम वापस लेेने की एक बडी वजह माढा से मोहिते पाटिल परिवार का बागी होना भी है । विजय सिंह दादा के बेटे रंजीत सिंह मोहिते पाटिल की बीजेपी से बात चल रही है ।अगर रंजीत सिंह मोहिते पाटिल बीजेपी जाकर माढा से खडे हो गये तो पवार हार भी सकते थे।ऐसे में पवार को ये रिस्क लेना ठीक नही लगा. साथ ही पवार की मुशिकल ये है कि अगर खुद खडे रहे तो बहुत सा समय देना होगा जिससे सुप्रिया समेत बाकी की मदद नही कर पायेगें।

पवार को प्रकाश अंबेडक र का भी डर लग गया ।प्रकाश ने कहा था कि वो पवार के खिलाफ चुनाव लडेगे ऐसा होता तो पवार को भारी नुकसान होता ।इसलिए पवार ने सारे गणित समझकर परिवार के नाम पर पीछे हटना ही बेहतर समझा।

 

संदीप सोनवलकर 

 

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