newsmantra.in l Latest news on Politics, World, Bollywood, Sports, Delhi, Jammu & Kashmir, Trending news | News Mantra
Political

महानगरपालिका चुनाव भाजपा के सहयोगियों को लिए खतरे की घंटी 

महानगरपालिका चुनाव भाजपा के सहयोगियों को लिए खतरे की घंटी 

संदीप सोनवलकर वरिष्ठ पत्रकार

मुंबई समेत राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव और उनके परिणाम ने ये साफ कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी शत प्रतिशत भाजपा के अपने नारे के लिए एक कदम और बढ़ गयी है और अब आने वाले समय में उसके दोनों सहयोगियों को वो बांह मरोड़ने का अवसर नहीं देगी .उल्टा भाजपा के दोनों सहयोगी एकनाथ शिंदे और अजित पवार को भाजपा ने एक तरह से औकात दिखा दी है और अब उनको भाजपा के रहमोकरम पर ही जीवित रहना पड़ेगा .. यानि जब तक भाजपा को जरुरत है तब तक ही वो साथ रहेंगे .

चुनाव परिणाम ये साफ इशारा कर रहे हैं कि 29 में से अधिकतर पर भाजपा अपने दम पर ही सत्ता हासिल करने में कामयाब रही और उसके सहयोगी दलों का कद और भी छोटा हो गया .विधानसभा चुनाव के बाद लग रहा था कि भाजपा अकेले आगे नहीं बढ़ सकती उसे 59 विधायकों वाली एनसीपी की जरुरत पड़ती रहेगी लेकिन महानगरपालिका के चुनाव में भाजपा ने शुरु से ही साफ कर दिया था कि वो अकेले लड़ना चाहती है . दिल्ली के दखल के बाद ही मुंबई समेत केवल 14 जगहों पर ही ठीक ठाक समझौता हो पाया और बाकी पर आमने सामने की लड़ाई रही ..

भाजपा ने सबसे पहले एकनाथ शिंदे को निपटाया और मुंबई में उनको भाजपा और उदधव ठाकरे की शिवसेना के बाद यानि तीसरे नंबर की पार्टी बना दिया . अजित पवार की एनसीपी को भाजपा ने मुंबई में भाव तक नहीं दिया और समझौता नहीं किया इससे अजित पवार के इकलौते नेता नवाब मलिक तक के परिवार को हार का सामना करना पड़ा . नवाब मलिक के भाई जो लगातार जीतते रहते थे वो भी कारपोरेटर का चुनाव हार गये . इतना ही भाजपा ने ठाणे जिले में सबसे ताकतवर माने जाने वाले एकनाथ शिंदे को केवल ठाणे शहर तक ही सीमित कर दिया .इसके अलावा नवी मुंबई , कल्याण डोंबिवली .वसई विरार जैसे बड़े इलाकों में भाजपा का परचम लहरा दिया .

भाजपा की ये जीत पूरी तरह से सीएम देवेंद्र फणनवीस की जीत है जिन्होंनें दिल्ली के दवाब में सहयोगियों से समझौता तो किया लेकिन जमीन पर ऐसी चाल चली कि अब उनको सहयोगियों से दबने की जरुरत नहीं है और केंद्र , राज्य के साथ जमीन स्तर पर महानगरपालिकाओं पर कब्जा करने का भाजपा का मिशन पूरा हो गया है. भाजपा ने 2022 में सबसे पहले एकनाथ शिंदे की बगावत कर ठाकरे की शिवसेना को कमजोर किया और उसके बाद पवार घराने में फूट हो गयी इस तरह विपक्ष को कमजोर कर दिया . इसका पूरा फायदा सिर्फ और सिर्फ भाजपा को ही मिला सहयोगी दल बस टापते ही रह गये .

दूसरा मुंबई का ट्रेंड ये दिखा रहा है कि भाजपा ने अपनी पुरानी ताकत बचाये रखी और महापौर पद भी ले लिया लेकिन तमाम फूट और करीब 60 पुराने कारपोरटरों को खोने के बाद भी मराठी का मुददा लेकर शिवसेना उदव ठाकरे और मनसे अपनी लाज बचाये रखने में कामयाब हो गये यानि राज्य का राजनीति में अब भी क्षेत्रीय राजनीती की जगह उदधव ठाकरे शिवसेना के पास ही रहेगी . सबसे कमजोर कांग्रेस ही रही जो मुंबई में सबसे कम सीट जीत पायी और उसके साथ ही उसके साथ रहने वाला दलित और मुस्लिम वोट भी खिसककर उदधव ठाकरे की शिवसेना के साथ चला गया इससे कांग्रेस की राहें और भी कठिन हो गयी है.

एक बड़ा ट्रेंड ये दिखा कि लोगों में इस बात की परवाह दिखी कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है और स्थानीय महानगरपालिका में केवल भाजपा ही सबसे तेजी से काम कर सकती है ऐसे में भाजपा के लिए वोट फायदे का सौदा मानकर दिया गया . भाजपा ने अपने विकास प्रोजेक्ट खासतौर पर मेट्रो और एयरपोर्ट जैसे मुददो को तरजीह दी .

कुल मिलाकर महानगरपालिका चुनाव का संदेश है कि अब महाराष्ट्र में भाजपा की सबसे बड़ी पार्टी है और उसके सहयोगियों को भाजपा के भरोसे ही रहना पड़ेगा और खुद को बचाने के लिए मेहनत करना प़ड़ेगा. मुंबई में ठाकरे ब्रांड खुद को बचाने में कामयाब रहा सत्तता नहीं मिली लेकिन इज्जत बच गयी .कांग्रेस राष्ट्रीय तौर पर मोदी विरोधी है लेकिन महाराष्ट्र में उसका बड़ा आपरेशन करने की जरुरत है . कांग्रेस का बचा खुचा वोट बैंक भी खिसक रहा है . लोकसभा में 14 सीट पाने वाली कांग्रेस के लिए भी ये खतरे की घंटी है.

Related posts

Kamal Nath Resigns as Chief Minister

Newsmantra

73 crore push for economy but no consensus on GST

Newsmantra

NO RELIEF TO CHIDAMBARAM

Newsmantra

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More