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शिवजी पर चढ़ाएं बेलपत्र महाशिवरात्रि

इस बार महाशिवरात्रि 1 मार्च को पड़ने वाली है. धार्मिक ग्रथों के मुताबिक इस दिन भगवान शिव और पार्वती का मिलन हुआ था. साथ ही मान्यता यह भी है कि इस दिन भोलेनाथ दिव्य ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए कई भक्त घरों में रूद्राभिषेक करते हैं. कहते हैं कि महाशिवरात्रि पर विधि-विधान से रूद्राभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. इसके अलावा महाशिवरात्रि पर बेलपत्र से शिव की पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं. ऐसे में जानते हैं कि भोलेनाथ को किन मंत्रों से बेलपत्र चढ़ाना चाहिए.

शिव को बेलपत्र चढ़ाने की कथा माता पार्वती से जुड़ी है. करते हैं कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी. साथ ही उन्होंने कई व्रत किए थे. एक बार भगवान शिव बेलपत्र वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या कर रहे थे. माता पार्वती जब शिव पूजा के लिए सामग्री लाना भूल गई तो उन्होंने वृक्ष के नीचे गिरे हुए बेलपत्र से शिव को ढक दिया. जिससे भगवान शिव बहुत अधिक प्रसन्न हुए. तब से शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है.

महाशिवरात्रि भारतीयों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है|भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|

कश्मीरी ब्राह्मणों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह शिव और पार्वती के विवाह के रूप में हर घर में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के उत्सव के 3-4 दिन पहले यह शुरू हो जाता है और उसके दो दिन बाद तक जारी रहता है।

महाशिवरात्रि को नेपाल में व विशेष रूप से पशुपति नाथ मंदिर में व्यापक रूप से मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर काठमांडू के पशुपतिनाथ मन्दिर पर भक्तजनों की भीड़ लगती है। इस अवसर पर भारत समेत विश्व के विभिन्न स्थानों से जोगी, एवम्‌ भक्तजन इस मन्दिर में आते हैं।

शिव जिनसे योग परंपरा की शुरुआत मानी जाती है को आदि (प्रथम) गुरु माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस रात को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जिससे मानव प्रणाली में ऊर्जा की एक शक्तिशाली प्राकृतिक लहर बहती है। इसे भौतिक और आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है इसलिए इस रात जागरण की सलाह भी दी गयी है जिसमें शास्त्रीय संगीत और नृत्य के विभिन्न रूप में प्रशिक्षित विभिन्न क्षेत्रों से कलाकारों पूरी रात प्रदर्शन करते हैं। शिवरात्रि को महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति के सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं व अविवाहित महिलाएं भगवान शिव, जिन्हें आदर्श पति के रूप में माना जाता है जैसे पति के लिए प्रार्थना करती हैं।

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